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Haryana: रुचिका केस में सीबीआई को 14 साल बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति, पूर्व डीजीपी थे आरोपी
Thu, 07 Mar 2024 08:44 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 07 Mar 2024 08:44 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर ने एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की थी और अब सीबीआई भी कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करना चाहती है तो याचिका का कोई औचित्य नहीं बचा। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। हालांकि राठौर की 83 वर्ष आयु को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें सीबीआई कोर्ट में पेशी से छूट दे दी है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
टेनिस खिलाड़ी रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को बड़ी राहत देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दे दी है। 14 साल पहले हाईकोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने पर रोक लगाई थी और तब से मामला विचाराधीन था।
एसपीएस राठौर ने रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 2010 में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने तब सीबीआई को जांच जारी रखने, लेकिन अंतिम रिपोर्ट दाखिल न करने का आदेश दिया था। गत वर्ष सीबीआई ने इस मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करने की छूट मांगी थी। सीबीआई ने अर्जी दाखिल करते हुए बताया कि एसपीएस राठौर के खिलाफ रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में जनवरी 2010 में एफआईआर दर्ज की गई थी। नवंबर 2010 में सीबीआई ने दो मामलों हत्या का प्रयास और फर्जी दस्तावेजों को लेकर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और हाईकोर्ट ने भी 2016 में इन दोनों केस को बंद करने का अनुरोध स्वीकार कर लिया था।
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि तीसरी एफआईआर में उनकी जांच में राठौर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। सीबीआई इस तीसरे मामले में भी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करना चाहती थी, लेकिन ऐसा नही कर सकी क्योंकि 25 जनवरी 2010 को हाईकोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
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हाईकोर्ट ने कहा कि राठौर ने एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की थी और अब सीबीआई भी कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करना चाहती है तो याचिका का कोई औचित्य नहीं बचा। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। हालांकि राठौर की 83 वर्ष आयु को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें सीबीआई कोर्ट में पेशी से छूट दे दी है। यदि अदालत को उनकी उपस्थिति की आवश्यकता हो तो इसके लिए वीडियो कॉंफ्रेंसिंग का इस्तेमाल करने का आदेश दिया है।
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एसपीएस राठौर ने रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 2010 में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने तब सीबीआई को जांच जारी रखने, लेकिन अंतिम रिपोर्ट दाखिल न करने का आदेश दिया था। गत वर्ष सीबीआई ने इस मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करने की छूट मांगी थी। सीबीआई ने अर्जी दाखिल करते हुए बताया कि एसपीएस राठौर के खिलाफ रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में जनवरी 2010 में एफआईआर दर्ज की गई थी। नवंबर 2010 में सीबीआई ने दो मामलों हत्या का प्रयास और फर्जी दस्तावेजों को लेकर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और हाईकोर्ट ने भी 2016 में इन दोनों केस को बंद करने का अनुरोध स्वीकार कर लिया था।
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सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि तीसरी एफआईआर में उनकी जांच में राठौर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। सीबीआई इस तीसरे मामले में भी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करना चाहती थी, लेकिन ऐसा नही कर सकी क्योंकि 25 जनवरी 2010 को हाईकोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
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हाईकोर्ट ने कहा कि राठौर ने एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दाखिल की थी और अब सीबीआई भी कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करना चाहती है तो याचिका का कोई औचित्य नहीं बचा। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। हालांकि राठौर की 83 वर्ष आयु को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें सीबीआई कोर्ट में पेशी से छूट दे दी है। यदि अदालत को उनकी उपस्थिति की आवश्यकता हो तो इसके लिए वीडियो कॉंफ्रेंसिंग का इस्तेमाल करने का आदेश दिया है।