आशुतोष महाराज के दाह संस्कार पर हाईकोर्ट की रोक
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की समाधि पर सस्पेंस बरकरार है। वहीं, हाईकोर्ट ने उनके दाह संस्कार के फैसले पर रोक जारी रखी है।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार एवं जस्टिस एजी मसीह की डिवीजन बेंच ने आशुतोष महाराज के दाह संस्कार पर अब अंतिम बहस का आदेश दिया है। उधर तपेश्वरी भारती एवं अन्य साध्वियों की ओर से प्रतिवादी बनने की अर्जी पर सरकार व दलीप झा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने एक दिसंबर को फैसला सुनाया था कि आदेश मिलने के बाद 15 दिन के भीतर प्रशासनिक अधिकारियों की कमेटी दाह संस्कार करे। मुकम्मल जिम्मा मुख्य सचिव को सौंपा गया था और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेवारी पुलिस प्रमुख को सौंपी गई थी।
इस फैसले को पंजाब सरकार, आशुतोष महाराज के बेटा होने का दावा करने वाले दलीप झा एवं दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने अलग-अलग अपील दायर कर चुनौती दी थी और अपील पर सुनवाई तक रोक लगाने की मांग की थी। डिवीजन बेंच ने तीनों अपीलकर्ताओं की मांग एक समान होने के कारण सोमवार तक एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी थी। अब यह रोक अगली सुनवाई 19 मार्च तक जारी रहेगी।
साध्वियों का दावा है कि आशुतोष महाराज समाधि में है
पिछली सुनवाई पर रोक लगाते हुए बेंच ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस मुद्दे पर ठोस फैसला लिया जाएगा। पंजाब सरकार ने उस वक्त कहा था कि यह एक धार्मिक मामला है और हाईकोर्ट के पास धार्मिक मामलों में इस तरीके का आदेश देने का हक नहीं है।
इसके अलावा किसी ने भी यह मांग नहीं की कि दाह संस्कार का जिम्मा राज्य लगाया जाए। संस्थान के वकील सीनियर एडवोकेट सत्यपाल जैन ने कहा था कि एकल बेंच ने दलीप झा का आशुतोष महाराज होने का दावा नकार दिया था।
उन्होंने यह भी कहा था कि उसके पास याचिका दायर करने का हक नहीं है। जब याचिका का हक ही नहीं रहा तो इसके आगे एकल बेंच को दाह संस्कार के बारे फैसला करने का हक नहीं था। उधर दलीप झा केवकील एसपी सोही ने बेंच को बताया था कि दलीप ने आशुतोष महाराज का बेटा होने के पुख्ता सबूत पेश किए थे। उसका बेटा होने के हक को गलत तरीके से नकारा गया है।
आशुतोष महाराज के शव से डीएनए मिलान की पेशकश भी की गई थी, लेकिन एकल बेंच ने इस बारे कोई फैसला नहीं दिया। दलीप झा ने पंजाब सरकार की अपील पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह सारा कुछ राजनीति से प्रेरित है। संस्थान में वोट बैंक होने के कारण सरकार उसे शव नहीं सौंप रही।
साध्वियों ने डिवीजन बेंच में अपील से पहले एकल बेंच में अर्जी देकर फैसला संशोधित करने का आग्रह किया था। कहा था कि उनके प्रतिवादी बनने की मांग पर एकल बेंच ने कोई निर्णय नहीं लिया, स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यह मांग एकल बेंच ने ठुकरा दी थी और अब साध्वियों ने डिवीजन बेंच में अर्जी देकर प्रतिवादी बनने की मांग की है। कहा है कि दाह संस्कार नहीं किया जाना चाहिए। साध्वियों का दावा है कि आशुतोष महाराज समाधि में है।