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कार्मल कॉन्वेंट हादसा: चंडीगढ़ प्रशासन के जवाब से हाईकोर्ट नाराज, कहा- आंखों में धूल झोंकने का प्रयास न करें

Tue, 02 Aug 2022 01:16 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 02 Aug 2022 01:16 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि वो हेरिटेज वृक्ष जो प्राइवेट प्रॉपर्टी पर हैं उनके रखरखाव के बारे में हलफनामे में कुछ नहीं है। इस प्रकार आंखों में धूल झोंकने का प्रयास न करें। इस पर यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट से जवाब दाखिल करने की मोहलत मांगी। हाईकोर्ट ने प्रशासन को मोहलत देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

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High Court angry with Chandigarh administration response over Chandigarh school tree accident
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पेड़ गिरने से गई एक छात्रा की जान और एक की बाजू जाने के मामले में यूटी प्रशासन ने सोमवार को जवाब सौंपा। हलफनामा हेरिटेज वृक्षों के मामले में मौन पाए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए यूटी प्रशासन को फटकार लगाई और कहा कि आंखों में धूल झोंकने का प्रयास न किया जाए।

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याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट कुनाल मुलवानी ने हाईकोर्ट को बताया कि नौ जुलाई को कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में एक पीपल के वृक्ष के नीचे छात्राएं बैठी थीं। इस वृक्ष के बगल में प्रशासन ने एक बोर्ड लगाया है जिसमें इसे विरासत का दर्जा दिया गया है। उस दिन इस वृक्ष का एक हिस्सा उखड़ कर छात्राओं पर गिर गया और इसके चलते 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 साल की बच्ची को जान गंवानी पड़ी। 
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इसके साथ ही एक बच्ची को बाजू गंवानी पड़ी और कई अन्य घायल हो गईं। याची ने बताया कि यह पहला हादसा नहीं है जिसमें वृक्ष के कारण मुसीबत आई हो। इससे पहले 2013 में सेक्टर 17 में मृत वृक्ष गिरने के चलते 20 साल की लड़की को टांग गंवानी पड़ी थी। तब हाईकोर्ट ने प्रशासन को लड़की को 20 लाख 15 हजार रुपये मुआवजा जारी करने का आदेश दिया था।

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याची ने कहा कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है इसकी जांच हाईकोर्ट के वर्तमान जज को सौंपी जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार के हादसे न हो इसके लिए एक कमेटी गठित की जाए जो दिशा निर्देश तैयार करे। इसके साथ ही प्रशासन को पिछले पांच साल में वृक्षों का रखरखाव, लोगों के लिए खतरनाक वृक्षों की पहचान से जुड़ा आंकड़ा सौंपने का आदेश दिया जाए।

प्रशासन ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि शहर के सभी स्कूलों में मौजूद वृक्षों की जांच की गई है। इसके साथ ही यह भी बताया कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है उसकी जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई है। मृतक बच्ची के परिवार को 20 लाख, गंभीर रूप से घायल बच्चों के परिवार को 10 लाख व मामूली तौर पर जख्मी बच्चों के परिवार को एक लाख रुपये देने का निर्णय लिया गया है। 

हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि पिछली सुनवाई पर आपसे हेरिटेज वृक्षों के रखरखाव के बारे में जवाब मांगा गया था जिसका इस हलफनामे में जिक्र नहीं है। कोर्ट ने कहा कि वो हेरिटेज वृक्ष जो प्राइवेट प्रॉपर्टी पर हैं उनके रखरखाव के बारे में हलफनामे में कुछ नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार आंखों में धूल झोंकने का प्रयास न किया जाए। इस पर यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट से जवाब के लिए मोहलत मांगी। हाईकोर्ट ने प्रशासन को मोहलत देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

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