कोहरे की आड़ में सैन्य क्षेत्रों में घुस सकते हैं आतंकी, अलर्ट जारी
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पठानकोट में वायु सेना के अड्डे पर आतंकियों के हमले के बाद से उत्तर भारत
सेना हाईकमान ने इसी संबंध में उत्तर भारत की तमाम छावनियों को फॉग अलर्ट भेजा है। इसमें लोकल मिलिट्री अथॉरिटीज को धुंध के दौरान अपने-अपने इलाकों में चौकसी ज्यादा बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।
दरअसल, धुंध और कोहरे का आलम सर्दियों में उत्तर भारत में सबसे ज्यादा होता है। भारत-पाक सीमा पर भी सर्दियों में धुंध का असर रहता है। एक सैन्य अफसर के अनुसार इसलिए यह कोहरा आतंकियों को घुसपैठ करने में काफी मददगार साबित होता है। दूसरी ओर, छावनियां काफी खुले और हरियाली भरे क्षेत्र में होती हैं, इसलिए छावनी क्षेत्रों में कोहरे का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है।
इसकी आड़ में ये लोग आधी रात व अल सुबह छावनी इलाकों में प्रवेश कर जाते हैं और आर्मी के कैंपों, क्वार्टरों व अन्य जगहों को निशाना बनाते हैं। इसलिए सेना हाईकमान ने अब कोहरे के दौरान ज्यादा चौकसी बरतने को कहा है।
बड़ा और आबादी वाले क्षेत्र से सटा है सैन्य क्षेत्र
घने कोहरे से ढंकी रहती है अंबाला छावनी: इन दिनों उत्तर भारत का सबसे
बड़ा अंबाला छावनी का इलाका भी आधी रात से अल सुबह के समय घने कोहरे के
आगोश में रहता है। रात को तो कई सड़कों पर कोहरे में दृश्यता पूरी तरह से
शून्य हो जाती है।
खुले क्षेत्र में तो कोहरा इतना ज्यादा घना होता है कि
क्वार्टरों में लोगों को थोड़ी दूरी पर पड़ोसियों के घर तक नहीं दिखते।
जबकि सेना की यूनिटों तक में कोहरे की वजह से दृश्यता बहुत कम रहती है। ऐसी
स्थिति में संदिग्ध व आतंकी छावनी क्षेत्र और सैन्य यूनिटों में घुस सकते
हैं। इसी को लेकर सेना हाईकमान ने छावनियों को फॉग अलर्ट भेजा है।
अंबाला
छावनी में कोहरे में सुरक्षा लोकल मिलिट्री अथॉरिटी के लिए बड़ी चुनौती
है। सैन्य क्षेत्र चारों ओर से खुला और सिविलियन इलाके से सटा हुआ है।
इसलिए इस क्षेत्र में कोहरे में सेना की सुरक्षा टीमों की गश्त करने और
पहरा देने में ज्यादा दिक्कत आती है।
छावनी की सीमा पर फौज ने नाके तो लगाए
हैं, लेकिन फिर भी कोहरे के दौरान कई ऐसे इलाके हैं, जो घुसपैठ की नजर से
संवेदनशील बने रहते हैं।