{"_id":"5a36c3d44f1c1b87698c2363","slug":"head-constable-and-homeguard-linehajir-on-negligence-chandigarh-news","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बेटे को कार में सोता छोड़ शॉपिंग करने चले गए परिजन, पीछे से पुलिस ने किया टो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटे को कार में सोता छोड़ शॉपिंग करने चले गए परिजन, पीछे से पुलिस ने किया टो
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 18 Dec 2017 09:37 AM IST
विज्ञापन
Chandigarh Police towing
- फोटो : Demo Pics
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह तो लापरवाही की हद है। ट्रैफिक पुलिस नो पार्किंग वाले एरिया से गाड़ियों के धड़ाधड़ चालान काटने में लगी है, लेकिन उसे कोई अंदर बैठा भी दिखाई नहीं देता। ऐसा ही एक मामला रविवार को सेक्टर-34 में देखने को मिला।
यहां किसान मंडी के बाहर ट्रैफिक पुलिस ने एक कार को टो कर लिया, लेकिन यह ध्यान नहीं दिया कि उसमें एक छोटा लड़का सो रहा था। कार टो होने के बाद उसके मालिक को पता चला तो वहां सनसनी का माहौल हो गया। ट्रैफिक पुलिस के आला अधिकारियों तक मामला पहुंचा तो लापरवाही बरतने वाले हेड कांस्टेबल सुभाष और होम गार्ड जगसीर को लाइन हाजिर कर दिया गया है। हालांकि जिसकी कार टो की गई उसने भी फाइन जमा कराया क्योंकि गाड़ी नो-पार्किंग में खड़ी थी। बता दें कि नो पार्किंग में खड़ी गाड़ियां टो करने का अभियान चल रहा है। दो दिन पहले भी कुछ गाड़ियां टो होने की वजह से खराब हो गई थीं।
मोहाली फेज-एक निवासी एक परिवार सेक्टर-34 में आया था और मंडी के पास नो पार्किंग एरिया में अपनी कार खड़ी करके कुछ सामान लेने चले गए, जबकि गाड़ी में 12 वर्षीय लड़के को छोड़कर चले गए। इसी दौरान ट्रैफिक पुलिस कर्मी गाड़ी को टो करके ट्रैफिक पुलिस लाइन ले आए। उन्हें यहां आकर पता चला कि गाड़ी में लड़का सो रहा है। इसके बाद लड़के को उठाया और परिजनों से बात कराई। घबराए हुए परिजन ट्रैफिक लाइन पहुंचे और नो पार्किंग का फाइन भरकर अपनी गाड़ी छुड़ाई। हालांकि उन्होंने कोई शिकायत नहीं दी, लेकिन मामला आला अधिकारियों तक पहुंच गया तो लापरवाही के लिए एक हेड कांस्टेबल और एक होमगार्ड को लाइन हाजिर कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां किसान मंडी के बाहर ट्रैफिक पुलिस ने एक कार को टो कर लिया, लेकिन यह ध्यान नहीं दिया कि उसमें एक छोटा लड़का सो रहा था। कार टो होने के बाद उसके मालिक को पता चला तो वहां सनसनी का माहौल हो गया। ट्रैफिक पुलिस के आला अधिकारियों तक मामला पहुंचा तो लापरवाही बरतने वाले हेड कांस्टेबल सुभाष और होम गार्ड जगसीर को लाइन हाजिर कर दिया गया है। हालांकि जिसकी कार टो की गई उसने भी फाइन जमा कराया क्योंकि गाड़ी नो-पार्किंग में खड़ी थी। बता दें कि नो पार्किंग में खड़ी गाड़ियां टो करने का अभियान चल रहा है। दो दिन पहले भी कुछ गाड़ियां टो होने की वजह से खराब हो गई थीं।
विज्ञापन
मोहाली फेज-एक निवासी एक परिवार सेक्टर-34 में आया था और मंडी के पास नो पार्किंग एरिया में अपनी कार खड़ी करके कुछ सामान लेने चले गए, जबकि गाड़ी में 12 वर्षीय लड़के को छोड़कर चले गए। इसी दौरान ट्रैफिक पुलिस कर्मी गाड़ी को टो करके ट्रैफिक पुलिस लाइन ले आए। उन्हें यहां आकर पता चला कि गाड़ी में लड़का सो रहा है। इसके बाद लड़के को उठाया और परिजनों से बात कराई। घबराए हुए परिजन ट्रैफिक लाइन पहुंचे और नो पार्किंग का फाइन भरकर अपनी गाड़ी छुड़ाई। हालांकि उन्होंने कोई शिकायत नहीं दी, लेकिन मामला आला अधिकारियों तक पहुंच गया तो लापरवाही के लिए एक हेड कांस्टेबल और एक होमगार्ड को लाइन हाजिर कर दिया गया।
विज्ञापन
बच्चों को गाड़ी में छोड़कर जाना खतरनाक
Chandigarh Police towing
- फोटो : Demo Photo
बच्चों को गाड़ी में छोड़कर जाना खतरनाक
बच्चों को कार में छोड़कर जाना भी खतरे से खाली नहीं है। अगर गाड़ी चलती छोड़कर जाएं तो यह डर बना रहता है कि कहीं बच्चे गाड़ी से छेड़छाड़ न कर दें और कोई हादसा हो जाए। वहीं अगर गाड़ी को लॉक करके जाएं तो बच्चों को सांस लेने में भी दिक्कत आ सकती है। अगर गाड़ी लॉक न हो तो वह भी खतरनाक है क्योंकि इससे आपराधिक वारदात का खतरा बना रहता है। हालांकि इस मामले में बच्चा थोड़ा बड़ा है, लेकिन 12 साल की उम्र भी शरारतों वाली होती है।
बच्चे के साथ ड्राइव करें, तो इस्तेमाल होना चाहिए साइन बोर्ड का
अगर बच्चे के साथ गाड़ी ड्राइव कर रहे हों तो इसके लिए कई तरह की हिदायतें बरतनी होती हैं। मार्केट में इस तरह के कई साइन बोर्ड आते हैं, जिनसे दूसरे वाहन चालकों को संकेत मिलता है। जैसे मार्केट में एक टैग मिलता है, जिस पर बेबी ऑन बोर्ड लिखा होता है। यह टैग गाड़ी के पिछले शीशे पर लगा होता है। इसका मतलब यह चेतावनी देना है कि गाड़ी में बच्चा भी है।
उच्च अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। टोइिंग टीम ने जल्दबाजी में यह लापरवाही की है।
- राजीव अंबस्ता, डीएसपी ट्रैफिक
बच्चों को कार में छोड़कर जाना भी खतरे से खाली नहीं है। अगर गाड़ी चलती छोड़कर जाएं तो यह डर बना रहता है कि कहीं बच्चे गाड़ी से छेड़छाड़ न कर दें और कोई हादसा हो जाए। वहीं अगर गाड़ी को लॉक करके जाएं तो बच्चों को सांस लेने में भी दिक्कत आ सकती है। अगर गाड़ी लॉक न हो तो वह भी खतरनाक है क्योंकि इससे आपराधिक वारदात का खतरा बना रहता है। हालांकि इस मामले में बच्चा थोड़ा बड़ा है, लेकिन 12 साल की उम्र भी शरारतों वाली होती है।
बच्चे के साथ ड्राइव करें, तो इस्तेमाल होना चाहिए साइन बोर्ड का
अगर बच्चे के साथ गाड़ी ड्राइव कर रहे हों तो इसके लिए कई तरह की हिदायतें बरतनी होती हैं। मार्केट में इस तरह के कई साइन बोर्ड आते हैं, जिनसे दूसरे वाहन चालकों को संकेत मिलता है। जैसे मार्केट में एक टैग मिलता है, जिस पर बेबी ऑन बोर्ड लिखा होता है। यह टैग गाड़ी के पिछले शीशे पर लगा होता है। इसका मतलब यह चेतावनी देना है कि गाड़ी में बच्चा भी है।
उच्च अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। टोइिंग टीम ने जल्दबाजी में यह लापरवाही की है।
- राजीव अंबस्ता, डीएसपी ट्रैफिक