Haryana News: एचसीएस अनिल नागर व सह आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत, भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में मिली जमानत
याची ने बताया कि उसकी पत्नी का केवल एक फेफड़ा काम कर रहा है और जल्द ही उसकी गंभीर सर्जरी होनी है। ऐसे में याची को जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। इस मामले में हरियाणा सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद लंबी हिरासत की अवधि के चलते नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
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डेंटल सर्जन और एचसीएस प्रारंभिक परीक्षा फर्जीवाड़े के आरोपी अनिल नागर, नवीन, अश्विनी और पवन गुप्ता को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी। हाईकोर्ट ने उन्हे जमानत दे दी है। याचिका में नागर ने कहा कि इस मामले में सह-आरोपियों से याची का संबंध साबित करने में पुलिस पूरी तरह नाकाम रही है। इस फर्जीवाड़े से याची का कोई लेना-देना नहीं है और पुलिस उसे फंसा रही है। इसके साथ ही यह भी बताया कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चालान पेश कर चुकी है। इन सब के बाद अब याची को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बचता है।
याची ने बताया कि उसकी पत्नी का केवल एक फेफड़ा काम कर रहा है और जल्द ही उसकी गंभीर सर्जरी होनी है। ऐसे में याची को जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। इस मामले में हरियाणा सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद लंबी हिरासत की अवधि के चलते नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
यह है मामला
राज्य सतर्कता ब्यूरो ने 19 नवंबर को हरियाणा लोक सेवा आयोग के उप सचिव अनिल नागर व अन्य को गिरफ्तार किया था। याचिकाकर्ता पर आरोप था कि डेंटल सर्जन भर्ती की परीक्षा के आवेदकों के अंकों में याची ने हेरफेर किया था। 17 नवंबर को इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई और इसके बाद कई ठिकानों पर छापा मारा गया। इस दौरान नवीन कुमार को 20 लाख रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ा गया।
इसके बाद अश्वनी शर्मा को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद जब उसके घर की तलाशी ली गई तो 1 करोड़ 7 लाख 97 हजार रुपये की नकदी विजिलेंस के हाथ लगी। आगे की जांच के बाद स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने एचसीएस अनिल नागर को गिरफ्तार किया था। नागर के साथ ही सह आरोपी नवीन, अश्विनी व पवन गुप्ता को भी हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है।