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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana United Kisan Morcha Announced that Kisan Andolan will not end till all demands are met

अभी खत्म नहीं होगा किसान आंदोलन: एसकेएम हरियाणा ने अपनाया कड़ा रुख, सरकार के सामने दो और मांगें रखीं

Wed, 01 Dec 2021 09:41 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 01 Dec 2021 09:41 PM IST
सार

कृषि कानूनों की वापसी के बाद से लगने लगा था कि किसानों का आंदोलन खत्म हो जाएगा लेकिन किसानों के रुख में कोई नरमी नहीं आई है। विवादित कानूनों के रद्द होने के बाद अब वे अपनी अन्य मांगों पर अड़ गए हैं। 

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Haryana United Kisan Morcha Announced that Kisan Andolan will not end till all demands are met
कुंडली बॉर्डर पर पत्रकारों से बात करते हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मांगें पूरी होने तक किसान आंदोलन खत्म नहीं होगा। यह एलान बुधवार को कुंडली सीमा पर हुई 26 संगठनों की बैठक में हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने किया। साथ ही मुख्य मांगों में दो और जोड़ दी गई हैं। हरियाणा के किसान भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल-2013 और संपत्ति क्षतिपूर्ति कानून वापस लेने की मांग पर भी अड़ गए हैं।

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किसान नेता मनदीप सिंह नाथवान, इंद्रजीत सिंह, सुरेश गोयत, लखविंद्र, प्रहलाद, संतोख सिंह, सेवा सिंह ने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून पर लीपापोती मंजूर नहीं होगी। सरकार को यह घोषणा करनी होगी कि जो समिति बनाई जा रही है वह एमएसपी गारंटी कानून जरूर बनाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में स्थिति अलग-अलग है। हरियाणा में भाजपा की सरकार है, इसीलिए किसानों पर दर्ज मुकदमों को फिलहाल वापस नहीं लिया गया है, जबकि पंजाब में यह घोषणा कर दी गई है। 
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हरियाणा एसकेएम के नेताओं ने कहा कि प्रदेश में किसानों पर दर्ज सभी 48 हजार मुकदमे वापस लेने होंगे। शहीद किसानों के आश्रितों को नौकरी व सरकार से टकराव में घायलों को मुआवजा देना होगा। साथ ही कुंडली बॉर्डर पर शहीद किसानों की याद में एक स्मारक भी बनाना होगा। थानों में बंद किसानों के ट्रैक्टर व अन्य वाहन भी छोड़ने होंगे। लखीमपुर के दोषियों को सजा देनी होगी। कसार गांव की घटना में जेल में बंद जींद के दो ग्रामीणों को छोड़ना होगा।
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बैठक में नहीं पहुंचे गुरनाम चढूनी
एक बार फिर हरियाणा के आंदोलनकारी किसान दो गुटों में नजर आए। हरियाणा किसान मोर्चा की बैठक में गुरनाम सिंह चढूनी नहीं पहुंचे। इस पर मोर्चा के नेताओं ने सवाल को टालने का प्रयास किया और कहा कि यह उनका अपना मत है। चुनाव लड़ने के मुद्दे पर कहा कि कोई भी साथी चुनाव लड़ सकता है, लेकिन मोर्चा चुनाव नहीं लड़ रहा। इससे पहले गुरनाम चढूनी हरियाणा किसान मोर्चा पर सवाल उठा चुके हैं।

पंजाब की 32 जत्थेबंदियों का एलान-हरियाणा समेत अन्य राज्यों के किसानों के साथ डटे रहेंगे
कुंडली बॉर्डर पर बुधवार को पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने भी बैठक की और कहा कि सभी किसान एकजुट हैं और संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मजबूती से डटे हैं। पंजाब के किसान हरियाणा व अन्य राज्यों के किसानों के साथ यहां आखिरी समय तक डटे रहेंगे। सभी मांगें पूरी होने तक कोई वापस नहीं जाएगा। सरकार के रवैये को देखते हुए चार दिसंबर को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन को लेकर अहम फैसला लिया जाएगा। 


किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने सोशल मीडिया पर आकर भी कहा कि 26 नवंबर को किसानों के परिवार यहां खुशी बांटने आए थे, परिवार के सदस्य वापस गए हैं। किसान यहीं पर डटे हुए है। वहीं हरियाणा किसान मोर्चा ने कहा कि कोई दो मत नहीं है। सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं।  

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