{"_id":"5d4a77e88ebc3e6cf90fbcb7","slug":"haryana-tribunal-controversy-high-court-advocate-beats-judge-secretary","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ट्रिब्यूनल विवादः आईडी कार्ड न होने पर वकील ने जज के सचिव को पीटा, कर्मचारियों की हड़ताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रिब्यूनल विवादः आईडी कार्ड न होने पर वकील ने जज के सचिव को पीटा, कर्मचारियों की हड़ताल
Wed, 07 Aug 2019 12:34 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 07 Aug 2019 12:34 PM IST
विज्ञापन
वकील ने जज के सचिव को पीटा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के विरोध के चलते हाईकोर्ट में वकीलों के वर्क सस्पेंड के बीच मंगलवार को एक वकील ने जज के सचिव की पिटाई कर दी। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी और वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़ गए। बार के प्रधान और सीनियर एडवोकेट के माफी मांगने पर भी मामला शांत नहीं हुआ, फिर मारपीट करने वाले वकील ने आकर माफी मांगी तब जाकर विवाद निपटा। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के सभी वकील हरियाणा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ( हैट) के विरोध में वर्क सस्पेंड कर कोर्ट के सभी प्रवेश द्वारों पर धरना जमाए हुए हैं।
वर्क सस्पेंड रखने के साथ ही हाईकोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान को नाकाफी बताया जा रहा है और सरकार की निंदा की जा रही है। वकील हाईकोर्ट में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों के आईडी कार्ड की जांच भी खुद करवा रहे हैं। यहीं से शुरू हुआ विवाद और हाईकोर्ट के एक जज के सचिव जब पहुंचे तो उनसे आईडी कार्ड मांगा गया। इस दौरान दोनों के बीच बहस हुई और फिर वकील ने सचिव को लात मार दी। इस घटना के बाद कर्मचारियों में गुस्से की लहर दौैड़ पड़ी और वे हड़ताल पर चले गए।
इसके साथ ही चीफ जस्टिस से मिलकर वकील विकास मलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर दी। चीफ जस्टिस से मिलने के बाद जैसे ही कर्मचारी नेता बाहर निकले बार एसोसिएशन के प्रधान डीपीएस रंधावा कर्मचारियों से मिलने पहुंचे और माफी मांगी। कर्मचारी नेता नहीं माने तो सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने माफी मांगी, जिस पर वकीलों ने कहा कि जिसने मारपीट की है, उसने तो अभी तक माफी नहीं मांगी। इस पर विकास मलिक को सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने समझाया जिसके चलते मलिक ने जाकर माफी मांगी। तब कर्मचारियों का गुस्सा शांत हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्क सस्पेंड रखने के साथ ही हाईकोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान को नाकाफी बताया जा रहा है और सरकार की निंदा की जा रही है। वकील हाईकोर्ट में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों के आईडी कार्ड की जांच भी खुद करवा रहे हैं। यहीं से शुरू हुआ विवाद और हाईकोर्ट के एक जज के सचिव जब पहुंचे तो उनसे आईडी कार्ड मांगा गया। इस दौरान दोनों के बीच बहस हुई और फिर वकील ने सचिव को लात मार दी। इस घटना के बाद कर्मचारियों में गुस्से की लहर दौैड़ पड़ी और वे हड़ताल पर चले गए।
विज्ञापन
इसके साथ ही चीफ जस्टिस से मिलकर वकील विकास मलिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर दी। चीफ जस्टिस से मिलने के बाद जैसे ही कर्मचारी नेता बाहर निकले बार एसोसिएशन के प्रधान डीपीएस रंधावा कर्मचारियों से मिलने पहुंचे और माफी मांगी। कर्मचारी नेता नहीं माने तो सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने माफी मांगी, जिस पर वकीलों ने कहा कि जिसने मारपीट की है, उसने तो अभी तक माफी नहीं मांगी। इस पर विकास मलिक को सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने समझाया जिसके चलते मलिक ने जाकर माफी मांगी। तब कर्मचारियों का गुस्सा शांत हुआ।
विज्ञापन
नहीं होगी आईडी कार्ड की जांच: चीफ जस्टिस
आईडी कार्ड विवाद के बीच कर्मचारियों ने चीफ जस्टिस को बताया कि आईडी कार्ड के नाम पर रोजाना कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है। चीफ जस्टिस ने इस पर कर्मचारियों से कहा कि वह आईडी कार्ड पहनें और अपने पास रखें। कोई भी वकील उनके आईडी कार्ड की जांच के नाम पर उन्हें परेशान नहीं करेगा।
न्याय दिलाने वाले बने न्याय के मार्ग में रोड़ा
अदालतों में जो वकील न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते हैं, वही पिछले 10 दिन से न्याय के मार्ग में रोड़ा बने हैं। वकीलों ने खुद को तो न्यायालय से दूर रखा ही है लेकिन द्वारों पर धरना लगाकर किसी को भी हाईकोर्ट में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। रोजाना न्याय की आस लिए हाईकोर्ट में आए लोग वकीलों के सामने गिड़गिड़ाते नजर आ रहे हैं कि उन्हें अंदर जाकर अपनी पैरवी खुद करने का मौका दिया जाए लेकिन किसी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि इस मामले में अभी तक हाईकोर्ट मौन है।
मुख्यमंत्री ने कहा ट्रिब्यूनल रहेगा, हड़ताल में साथ दे सकती है कांग्रेस
विधानसभा के सत्र की कार्रवाई के दौरान जब हाईकोर्ट के वकीलों के वर्क सस्पेंड होने का मुद्दा उठा तो सीएम मनोहर लाल ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि ट्रिब्यूनल तो रहेगा। वकीलों ने एड़ी -चोटी का जोर लगा लिया लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम है। इस दौरान कांग्रेसी विधायक गीता भुक्कल ने मांग की कि ट्रिब्यूनल को वापस लिया जाए। साथ ही टीम बनाकर वकीलों को समझाया व मनाया जाए। इस पर सीएम ने कहा कि कांग्रेस खुद यह जिम्मेदारी ले सकती है लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम है।
न्याय दिलाने वाले बने न्याय के मार्ग में रोड़ा
अदालतों में जो वकील न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते हैं, वही पिछले 10 दिन से न्याय के मार्ग में रोड़ा बने हैं। वकीलों ने खुद को तो न्यायालय से दूर रखा ही है लेकिन द्वारों पर धरना लगाकर किसी को भी हाईकोर्ट में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं। रोजाना न्याय की आस लिए हाईकोर्ट में आए लोग वकीलों के सामने गिड़गिड़ाते नजर आ रहे हैं कि उन्हें अंदर जाकर अपनी पैरवी खुद करने का मौका दिया जाए लेकिन किसी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि इस मामले में अभी तक हाईकोर्ट मौन है।
मुख्यमंत्री ने कहा ट्रिब्यूनल रहेगा, हड़ताल में साथ दे सकती है कांग्रेस
विधानसभा के सत्र की कार्रवाई के दौरान जब हाईकोर्ट के वकीलों के वर्क सस्पेंड होने का मुद्दा उठा तो सीएम मनोहर लाल ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि ट्रिब्यूनल तो रहेगा। वकीलों ने एड़ी -चोटी का जोर लगा लिया लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम है। इस दौरान कांग्रेसी विधायक गीता भुक्कल ने मांग की कि ट्रिब्यूनल को वापस लिया जाए। साथ ही टीम बनाकर वकीलों को समझाया व मनाया जाए। इस पर सीएम ने कहा कि कांग्रेस खुद यह जिम्मेदारी ले सकती है लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम है।