एसवाईएल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करेगा हरियाणा, पंजाब ने कहा- एक बूंद पानी नहीं देंगे
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट जाना हमारा अधिकार है। हम नहर निर्माण व अपने हक का पानी लेने के लिए हर लड़ाई लड़ेंगे। पंजाब में बनी नई सरकार ने शुरुआत में ही चंडीगढ़ मांगा।
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सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर निर्माण को लेकर पंजाब हरियाणा एक बार फिर से आमने-सामने आ गए हैं। हरियाणा सरकार इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रही है। हरियाणा सरकार के फ्रंट फुट पर आने के बाद पंजाब सरकार भी इस लड़ाई में कूद गई है। पंजाब के बिजली मंत्री हरभजन सिंह ने एक बूंद पानी न देने का एलान किया है।
पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मंगलवार को ट्वीट कर मुख्यमंत्री भगवंत मान से पूछा कि दुश्मन दरवाजे पर खड़ा है। आपकी क्या तैयारियां हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मान को सचेत करते हुए लिखा कि सभी दलों को भरोसे में लेकर कानूनी लड़ाई की तैयारी करें। एसवाईएल निर्माण व अपने हक के पानी के लिए हरियाणा सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए आदेश का पालन न करने पर हरियाणा सरकार की तरफ से पंजाब सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार के दिल्ली में नियुक्त विधि अधिकारी याचिका का मसौदा तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अवमानना याचिका दायर करने से पहले महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन से लंबी चर्चा की है।
इसके बाद विधि अधिकारियों को मसौदा तैयार कर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने का निर्देश दिया। याचिका में एसवाईएल निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ से समय-समय पर दिए गए निर्देशों, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बातचीत के जरिये मामला सुलझाने सहित पूर्व में हुए समझौतों, राष्ट्रपति संदर्भ व आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट जाना हमारा अधिकार अनिल विज
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट जाना हमारा अधिकार है। हम नहर निर्माण व अपने हक का पानी लेने के लिए हर लड़ाई लड़ेंगे। पंजाब में बनी नई सरकार ने शुरुआत में ही चंडीगढ़ मांगा। उन्हें समझ होनी चाहिए कि चंडीगढ़ का मुद्दा एसवाईएल से ही जुड़ा हुआ है। अगर वह चंडीगढ़ लेना चाहते हैं तो एसवाईएल बनाना शुरू कर दें। 108 हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा को सौंपे। उसके बाद चंडीगढ़ को लेकर विचार किया जाएगा।
जल्द दायर होगी याचिका: महाजन
महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करने जा रहे हैं। विधि अधिकारियों ने सरकार के निर्देश पर अपना काम शुरू कर दिया है। मसौदा तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री से चर्चा कर जल्दी याचिका दायर करेंगे।
मनोहर लाल ने विशेष सत्र में ही दे दिए थे संकेत
राजधानी चंडीगढ़, विधानसभा, हिंदी भाषी क्षेत्रों, हांसी बुटाना नहर, अलग हाईकोर्ट इत्यादि मुद्दों को लेकर विधानसभा के विशेष सत्र में ही पांच अप्रैल को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने के संकेत दे दिए थे। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सदन में चर्चा के दौरान यह मांग की थी। मुख्यमंत्री ने उसी समय कहा था कि महाधिवक्ता से राय लेकर इस पर विचार करेंगे। एसवाईएल को लेकर पंजाब विधानसभा में सात बार और हरियाणा में विधानसभा में पांच बार प्रस्ताव पारित हो चुके हैं।
यह है मामला
हरियाणा सरकार ने विधानसभा के हालिया विशेष सत्र के दौरान एसवाईएल नहर के मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित कर पंजाब के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करने का फैसला किया था। हरियाणा सरकार का कहना है कि पंजाब ने 15 जनवरी, 2002 और 4 जून, 2004 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। इसमें पंजाब को एसवाईएल नहर के बाकी हिस्से को पूरा करने का आदेश दिया गया था।
हरियाणा के सांसद को घेरा
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने एसवाईएल के मुद्दे पर आप के राज्यसभा सांसद डॉ. सुशील गुप्ता के बयान को लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने मंगलवार के ट्वीट करते हुए लिखा- आप का असली चेहरा सबके सामने है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को एसवाईएल पर अपना रुख तुरंत स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने आगे लिखा- जहां पंजाब के पास पानी की एक बूंद भी नहीं बची है, वहीं आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य डॉ. सुशील कुमार गुप्ता एसवाईएल के जरिए हरियाणा को पंजाब का पानी देने की गारंटी दे रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल से भी जवाब मांगा
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी एसवाईएल के मुद्दे पर आप सांसद सुशील गुप्ता के बयान पर आपत्ति जताई और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से स्पष्टीकरण मांगा है। खैरा ने ट्वीट किया- यह पंजाब के लिए बहुत ही ज्वलंत और महत्वपूर्ण मुद्दा है। सांसद सुशील गुप्ता के बयान पर अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान चुप्पी नहीं साध सकते।