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रोडवेज हड़तालः सरकार और कर्मियों में बड़ी रार, आदेश जारी- हड़तालियों का काटा जाएगा वेतन

Wed, 31 Oct 2018 10:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 31 Oct 2018 10:23 AM IST
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Haryana Roadways Strike, Government Released Order to Cut Salary of Employees
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल
हरियाणा सरकार और रोडवेज के हड़ताली कर्मचारियों के बीच गतिरोध कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच सरकार ने कर्मियों के खिलाफ बड़ा फैसला ले लिया है। रोडवेज कर्मचारी किलोमीटर स्कीम पर टस से मस होने को तैयार नहीं हैं, तो सरकार भी अपने फैसले पर कायम रहते हुए हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा एक्शन ले रही है। सरकार ने अक्टूबर 2018 में हड़ताल पर रहे या अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित कर्मचारियों को उतने दिन का वेतन न देने का निर्णय लिया है, जितने दिन चक्काजाम हुआ है।
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परिवहन विभाग के एसीएस धनपत सिंह ने सभी डिपो महाप्रबंधकों को वेतन जारी न करने के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने को कहा है। इसके साथ ही सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों से अक्टूबर महीने के दौरान 26 अक्टूबर, 30-31 अक्टूबर को हड़ताल पर रहे कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। बुधवार को रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय को मुहैया करानी होगी। धनपत सिंह ने मंगलवार को सड़कों पर रोडवेज की 2450 बसें चलने का दावा किया है। कोऑपरेटिव सोसायटी की 1059 बसें भी पूर्व की तरह ही चलीं।
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धनपत सिंह ने बताया कि आउटसोर्सिंग पॉलिसी पार्ट-2 के अंतर्गत कंडक्टरों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आपत्तियां मांगी गई हैं। तीन दिन तक आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। 31 अक्टूबर को सभी आवेदकों की मेरिट लिस्ट जारी होगी। 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मेरिट लिस्ट पर आपत्ति दे सकते हैं। उन्होंने जनहित में एवं त्यौहारों का समय देखते हुए सभी यूनियनों, तालमेल कमेटी के प्रतिनिधियों व हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। धनपत सिंह ने कहा कि सरकार सभी जायज मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार-विमर्श के लिए तैयार है।
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दो लाख से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर रहे

हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को सभी विभागों के दो लाख से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बुधवार को भी हड़ताल जारी रहेगी। इस कारण दर्जनों विभागों में कामकाज ठप हो गया है। अनेक विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों, पालिकाओं, परिषदों, विश्वविद्यालयों, सहकारी समितियों, केंद्र एवं राज्य सरकार की संचालित परियोजनाओं में हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बिजली वितरण निगमों में रहा।

बिजली निगमों में कार्यरत जूनियर इंजीनियर व कर्मचारियों की दोनों प्रमुख यूनियनों के हड़ताल में शामिल होने के कारण करीब सभी सब डिवीजन व शिकायत केंद्र बंद रहे। बिजली की शिकायतों, बिलों को ठीक करने व बिल भरने सहित उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के काम नही हुए। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकतर कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। कई शिक्षक संगठनों के हड़ताल में शामिल होने से बड़ी संख्या में टीचर स्कूल नहीं गए। जनस्वास्थ्य, सिंचाई व बीएंडआर में तकनीकी व लिपिकीय स्टाफ के हड़ताल पर जाने से कामकाज नहीं हो पाया।

हरियाणा टूरिज्म के  90 प्रतिशत से अधिक पर्यटन केंद्र बंद रहे। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, महिला एवं बाल विकास विभाग, आईटीआई, पंचायत, स्वास्थ्य, पशुपालन, तकनीकी शिक्षा, हायर एजुकेशन, हरियाणा बीज विकास निगम, राजस्व, सामान्य प्रशासन, बीपीएस खानपुर, मेडिकल विश्वविद्यालय रोहतक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भी हड़ताल का असर दिखाई दिया। प्रदेश सरकार ने हड़ताल बेअसर रहने का दावा किया है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि एक लाख 22 हजार कर्मचारी कार्यालयों में उपस्थित रहे। उन्होंने बायोमीट्रिक से अपनी हाजिरी दर्ज कराई है। कार्यालयों में कामकाज सामान्य रहा है।

निजीकरण सहन नहीं, उत्पीड़न से नहीं खत्म होगा आंदोलन

कर्मचारियों के प्रमुख संगठन सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी संघ, चंडीगढ़-पंचकूला निदेशालय कर्मचारी तालमेल कमेटी, हरियाणा कर्मचारी संयुक्त मंच, शिक्षा विभाग कर्मचारी तालमेल कमेटी के नेता धर्मबीर फोगाट, सुभाष लांबा, बीरेंद्र सिंह डंगवाल, शिव कुमार पराशर, नरेश कुमार शास्त्री, विजय जौली, सीएन भारती, जगरोशन ने हड़ताल की सफलता का दावा किया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी रोडवेज का निजीकरण सहन नहीं करेंगे। उत्पीड़न की कार्रवाई से आंदोलन खत्म होने वाला नहीं है। सीएम मनोहर लाल वार्ता के लिए आगे आएं। चूंकि, निर्णय उनके स्तर पर ही होना है।
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