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हरियाणाः रोडवेज विभाग को 144 करोड़ का नुकसान, ग्रीन जोन में शुरू हो सकती है बस सेवा

Sun, 03 May 2020 12:50 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 03 May 2020 12:50 PM IST
सार

  • 24 मार्च से हरियाणा में पूरी तरह ठप पड़ी है बस सेवा
  • पहले ही विभाग 600 करोड़ से अधिक के घाटे तले दबा है, और खराब हुए हालात
  • बस किराया बढ़ाने के बाद अब संक्रमण मुक्त जिलों में बस सेवा शुरू करने पर विचार

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Haryana Roadways has suffered a major financial loss in the lockdown
हरियाणा रोडवेज बस - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा के बिजली निगमों के बाद लॉकडाउन ने अब रोडवेज को भी करारा आर्थिक झटका दे दिया है। पहले से ही करीब 600 करोड़ से अधिक घाटे में दबे रोडवेज विभाग को इस लॉकडाउन में अभी तक 144 करोड़ का और फटका लग गया है। यह घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे लेकर प्रदेश सरकार भी चिंतित है।

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हरियाणा का रोडवेज विभाग देश में इसी तरह के कुछ चुनिंदा विभागों में गिना जाता है, क्योंकि अधिकतर राज्यों ने अपनी बस सेवा को कारपोरेशन के अधीनस्थ कर दिया है। लेकिन हरियाणा में अभी ऐसा नहीं है। यहां परिवहन विभाग के अंतर्गत ही रोडवेज विभाग एक अलग इकाई के रूप में कार्यरत है। 
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यह विभाग मौजूदा परिस्थितियों में लगभग 600 करोड़ से अधिक वित्तीय घाटे में चल रहा है। बावजूद इसके हरियाणा सरकार अपनी बस सेवा को और विस्तार करने में जुटी है। मगर लॉकडाउन की वजह से प्रस्ताव लंबित हैं। दूसरी ओर, इन दिनों रोडवेज विभाग का वित्तीय घाटा लगातार बढ़ने लगा है। 

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इसी के चलते यात्रियों के लिए एक कड़वा फैसला लेते हुए हरियाणा मंत्रिमंडल समूह ने दो दिन पहले बसों के किराए में 15 से 20 पैसे तक प्रति किलोमीटर के हिसाब से इजाफे का एलान कर दिया है। ताकि किसी तरह इस विभाग को घाटे की गर्त में पूरी तरह डूबने से बचाया जा सके। 

तर्क यह भी है कि किराया बढ़ाने के बावजूद अभी भी हरियाणा रोडवेज का किराया दूसरे राज्यों से अपेक्षाकृत कम है। बहरहाल, बढ़े किराये के संदर्भ में प्रस्ताव एलआर के पास भेज दिया गया है। ताकि इसके तमाम कानूनी पहलुओं पर गौर करने के बाद इसकी अधिसूचना जारी की जा सके।

इस तरह समझिए घाटे का गणित
हरियाणा रोडवेज के अधीनस्थ सूबे के सभी जिलों में रोडवेज के 23 डिपो और 13 सब डिपो मौजूद हैं। इनके अंतर्गत इस वक्त बेड़े में कुल 3853 (3200 सरकारी, 150 सरकारी गुलाबी मिनी बसें, 18 लगजरी बसें और 485 किलोमीटर स्किम वाली हायर की प्राइवेट बसें) बसें शामिल हैं। ये बसें हरियाणा के विभिन्न जिलों के साथ-साथ कुछ अन्य राज्यों में भी यात्रियों को लेकर जाती हैं। 

रोजाना सरकारी बसों से कुल 3.69 करोड़ की किराए के रूप में आमदनी होती है। इसके अलावा विभिन्न छोटे-बड़े बस अड्डों पर किराए पर दी गई दुकानों और बूथों से भी आमदन होती है। रोडवेज विभाग को सालाना करीब 1350 करोड़ राजस्व प्राप्त होता है।

लेकिन 24 मार्च से हरियाणा रोडवेज की बस सेवा पूरी तरह स्थगित चल रही है। जिसके चलते अब तक रोडवेज विभाग को 144 करोड़ का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा काफी संख्या में सरकारी बसें जिला प्रशासन के अंतर्गत कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न टास्क में लगी हुई हैं। जबकि कई बसों में तो मोबाइल टेली मेडिसन की सुविधा भी दी जा रही है। हालांकि ये अच्छी बात है, मगर वित्तीय लिहाज से देखा जाए तो इनके डीजल व मेंटेनेंस का खर्च अभी तक रोडवेज विभाग ही झेल रहा है। यदि स्वास्थ्य महकमा रोडवेज विभाग को इसका भुगतान नहीं करता तो डीजल व मेंटेनेंस का वित्तीय बोझ भी रोडवेज विभाग पर ही आने वाला है। जिससे निसंदेह विभाग का घाटा और बढ़ेगा।

घाटे के एक और पहलू को देखें तो विभाग के अफसरों को इस बात की भी आशंका है कि 24 मार्च से बस अड्डों पर बंद पड़ी दुकानों और बूथों का किराया भी शायद विभाग को संकट के इस दौर में न मिले। चूंकि दुकानें बंद हैं, काम ठप है तो ऐसी स्थिति में विभाग अपने किरायेदारों पर किराया देने का दबाव भी नहीं बना पाएगा।

बस सेवा शुरू करने पर चल रहा मंथन
विभागीय सूत्रों ने बताया कि बस किराए में बढ़ोतरी के बाद हरियाणा सरकार अब ग्रीन जोन वाले जिलों में सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल के साथ बस सेवा शुरू कर सकती है। आला स्तर पर इस संदर्भ में विचार-विमर्श भी चल रहा है। बसें ग्रीन जोन के किस रूट पर चलाई जाएं, बसों में न्यूनतम कितने यात्री बिठाए जाएं, बस चालक और परिचालकों की सेहत का ध्यान रखते हुए इस सेवा को कैसे बहाल किया जाए, ग्रीन जोन इलाकों में भी कौन से ऐसे रूट हैं जो महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं, इत्यादि बिंदुओं पर अभी विचार विमर्श किया जा रहा है।

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