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जींदः एएसआई का 17 साल का बेटा फंदे पर झूला, मां-बाप बोले- एक साल से पबजी गेम खेल रहा था
Mon, 08 Jul 2019 03:32 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जींद(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 08 Jul 2019 03:32 PM IST
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एएसआई के 17 साल के बेटे ने फंदे पर लटकर जीवनलीला समाप्त कर ली। मां-बाप का कहना है कि वह एक साल से पबजी गेम खेल रहा था। घटना हरियाणा के जींद जिले की है। शिवपुरी कालोनी निवासी एएसआई का बेटा घर में ही फंदे पर लटका मिला। शनिवार रात 9:00 बजे जब परिजनों ने कमरे में किशोर को फंदे पर लटके देखा, तो उस समय उसके मोबाइल पर पबजी गेम ऑन था।
परिजनों का कहना है कि बेटा एक साल से मोबाइल पर पबजी गेम खेल रहा था और इस गेम ने ही उसकी जान ले ली। शिवपुरी कॉलोनी निवासी एएसआई सत्यवान कैथल में तैनात हैं। उनको दो बेटे और दो बेटियां हैं। सबसे छोटा बेटे तरसेम (17) ने 2017 में 10वीं की पढ़ाई पूरी कर ली थी और उसके बाद से घर पर ही था। तरसेम कभी-कभी कपड़े की एक दुकान पर काम करने जाता था।
परिजनों के मुताबिक, एक साल से अपना ज्यादातर समय वह मोबाइल पर ही बिता रहा था। एक महीने पहले पता चला कि वह मोबाइल पर पबजी गेम खेलता है तो उन्होंने उसे ऐसा करने से रोका, लेकिन वह नहीं माना। शनिवार रात खाना खाने के बाद तरसेम नौ बजे अपने कमरे में चला गया। परिजनों ने सोचा कि वह सो गया है।
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जब उसकी मां किसी काम से उसके कमरे में गई तो तरसेम फंदे पर लटका मिला। उसने अपने पति एएसआई सत्यवान को इसकी सूचना दी। एएसआई ने मौके पर पहुंच फंदे से उतारकर बेटे को नागरिक अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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परिजनों का कहना है कि बेटा एक साल से मोबाइल पर पबजी गेम खेल रहा था और इस गेम ने ही उसकी जान ले ली। शिवपुरी कॉलोनी निवासी एएसआई सत्यवान कैथल में तैनात हैं। उनको दो बेटे और दो बेटियां हैं। सबसे छोटा बेटे तरसेम (17) ने 2017 में 10वीं की पढ़ाई पूरी कर ली थी और उसके बाद से घर पर ही था। तरसेम कभी-कभी कपड़े की एक दुकान पर काम करने जाता था।
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परिजनों के मुताबिक, एक साल से अपना ज्यादातर समय वह मोबाइल पर ही बिता रहा था। एक महीने पहले पता चला कि वह मोबाइल पर पबजी गेम खेलता है तो उन्होंने उसे ऐसा करने से रोका, लेकिन वह नहीं माना। शनिवार रात खाना खाने के बाद तरसेम नौ बजे अपने कमरे में चला गया। परिजनों ने सोचा कि वह सो गया है।
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जब उसकी मां किसी काम से उसके कमरे में गई तो तरसेम फंदे पर लटका मिला। उसने अपने पति एएसआई सत्यवान को इसकी सूचना दी। एएसआई ने मौके पर पहुंच फंदे से उतारकर बेटे को नागरिक अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बच्चों को जबरदस्ती नहीं, प्यार से समझाएं
बच्चों के लिए किसी भी चीज की लत बहुत बुरी होती है। किसी एक चीज में बच्चों का ध्यान न लगे, इसके लिए परिजनों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। आजकल मोबाइल बहुत अहम चीज है। बच्चे से लेकर बड़े तक सबके पास मोबाइल है, इसलिए परिजन बच्चों का ध्यान रखें कि कहीं उनका बच्चा मोबाइल पर ज्यादा समय तो नहीं बिता रहा है। समय-समय पर बच्चों को एक दोस्त की तरह समझाते रहें और उनका दूसरी चीजों में भी ध्यान लगवाते रहें। किसी भी चीज की लत बहुत बुरी होती है।
- डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल, जींद
बच्चे खतरनाक गेम खेलें तो परिजन तुरंत रोकें
यदि कोई बच्चा ऐसा गेम खेलता है, जिसकी उसको लत लग जाती है तो माता-पिता को तुरंत उसे रोकना चाहिए। परिजनों को बच्चों को मोबाइल केवल निर्धारित समय के लिए ही देना चाहिए और वह भी अपनी निगरानी में। जो बच्चे ऐसे गेम खेलते हैं, वह झूठी सफलता पाने के लिए अपनी जिंदगी भी दांव पर लगा देते हैं। वह मानसिक रूप से ऐसे हो जाते हैं, जिनको केवल गेम में ही सफलता दिखाई देती है और वास्तविक जीवन भी छोटा पड़ जाता है। यदि आपका बच्चा केवल फोन में ही व्यस्त रहता है तो सबसे पहले यह पता करें कि उसके दोस्त कौन-कौन हैं? इसके बाद उसे अपने दोस्तों के साथ अन्य घरेलू खेल खेलने के लिए प्रेरित करें। बच्चे को कभी भी मारे-पीटे नहीं उसे प्यार से समझाएं। ऐसे बच्चे अकेलेपन, घृणा की भावना, बदला लेने की भावना, सम्मान नहीं करने की भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को अन्य खेलों के माध्यम से, किताबों में ध्यान लगवाना चाहिए।
- डॉ. नरेश जागलान, मनोवैज्ञानिक
- डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल, जींद
बच्चे खतरनाक गेम खेलें तो परिजन तुरंत रोकें
यदि कोई बच्चा ऐसा गेम खेलता है, जिसकी उसको लत लग जाती है तो माता-पिता को तुरंत उसे रोकना चाहिए। परिजनों को बच्चों को मोबाइल केवल निर्धारित समय के लिए ही देना चाहिए और वह भी अपनी निगरानी में। जो बच्चे ऐसे गेम खेलते हैं, वह झूठी सफलता पाने के लिए अपनी जिंदगी भी दांव पर लगा देते हैं। वह मानसिक रूप से ऐसे हो जाते हैं, जिनको केवल गेम में ही सफलता दिखाई देती है और वास्तविक जीवन भी छोटा पड़ जाता है। यदि आपका बच्चा केवल फोन में ही व्यस्त रहता है तो सबसे पहले यह पता करें कि उसके दोस्त कौन-कौन हैं? इसके बाद उसे अपने दोस्तों के साथ अन्य घरेलू खेल खेलने के लिए प्रेरित करें। बच्चे को कभी भी मारे-पीटे नहीं उसे प्यार से समझाएं। ऐसे बच्चे अकेलेपन, घृणा की भावना, बदला लेने की भावना, सम्मान नहीं करने की भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे बच्चों को अन्य खेलों के माध्यम से, किताबों में ध्यान लगवाना चाहिए।
- डॉ. नरेश जागलान, मनोवैज्ञानिक