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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Organized Crime Control Bill passed in Vidhansabha

Haryana: गैंगस्टरों की खैर नहीं, लगेगा हकोका, हंगामे के बीच तीसरी बार हरियाणा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक पास

Wed, 22 Mar 2023 10:03 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 22 Mar 2023 10:03 PM IST
सार

चयन कमेटी को भेजने की मांग को लेकर कांग्रेसी वेल तक पहुंच गया। विधेयक में संशोधन के बाद तीसरी बार विधानसभा ने प्रस्ताव पास किया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद हरियाणा में हकोका लागू होगा। 

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Haryana Organized Crime Control Bill passed in Vidhansabha
हरियाणा मानसून सत्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारी हंगामे के बीच हरियाणा विधानसभा में बुधवार को गैंगस्टरों की कमर तोड़ने के लिए हरियाणा विधानसभा में हरियाणा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक- 2023 पारित हो गया। विधेयक में संशोधन की मांग को लेकर कांग्रेसी विधायकों ने हंगामा किया। विधेयक को चयन कमेटी को भेजने के लिए कांग्रेसी वेल तक पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे तक चले हंगामे के दौरान दो बार विधानसभा को 15-15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। बाद में सदन में प्रस्ताव पारित हो गया। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर लगते ही यह एक्ट हरियाणा में लागू होगा।

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इससे पहले भी हरियाणा विधानसभा 2019 और 2020 में इस विधेयक को पारित कर चुकी है, लेकिन राष्ट्रपति द्वारा आईपीसी और एनडीपीएस एक्ट में पहले से मौजूद प्रावधान को लेकर आपत्ति जताई थी। तकनीकी आपत्तियों को दूर करने लिए बुधवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सदन में यह प्रस्ताव रखा।
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इस पर कांग्रेस विधायक किरण चौधरी, वरुण मुलाना, बीबी बतरा और आफताब अहमद ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जल्दबाजी में प्रस्ताव पास न करें। इस पर विचार के लिए समय चाहिए और इसे चयन कमेटी को भेजा जाए।

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कांग्रेसी विधायकों ने तर्क रखे की कि विधेयक में कुछ ऐसी चीजें हैं, जिससे आम व्यक्ति के अधिकार इससे प्रभावित हो सकते हैं। इसी बीच असंध से विधायक शमशेर गोगी ने कहा कि विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इससे पुलिस प्रदेश बन जाएगा, इससे पुलिस के पास और पावर आ जाएगी। जरूरत पुलिस की जिम्मेदारी तय करने की है।

जवाब में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पूरी तरह से विचार और मंथन के बाद इस प्रस्ताव को लाया गया है और पहले भी यह दो बार पारित हो चुका है। लेकिन कांग्रेसी विधायकों ने हंगामा जारी रखा। इधर, प्रस्ताव के समर्थन में भाजपा विधायकों ने भी मोर्चा संभाला और मुख्यमंत्री का समर्थन किया। तनावपूर्ण हुई स्थिति के बीच दोबारा सदन को स्थगित करना पड़ा। आधे घंटे के बाद दोबारा से सदन में प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने पास कर दिया। कांग्रेसी विधायकों ने कहा कि वह अपराध और गैंगस्टर के खिलाफ हैं, लेकिन इसे पहले चयन कमेटी को भेजना चाहिए था।

डीआईजी की अनुमति के बाद लगेगा एक्ट, डीएसपी करेगा जांच
हकोका से संबंधित मामला डीआईजी स्तर के अधिकारी की अनुमति के बाद ही दर्ज होगा। बिना अनुमति के कोई भी निचले स्तर के अधिकारी एक्ट के तहत केस दर्ज नहीं कर सकेंगे। साथ ही डीएसपी स्तर के अधिकारी ऐसे मामलों की जांच करेंगे और आरोपी के बयान एसपी के सामने वीडियोग्राफी के बीच दर्ज किए। अधिकारियों के सामने बयान दर्ज कराने के बाद दोषियों का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज किया जाएगा।

10 लाख जुर्माने से उम्रकैद तक का प्रावधान
एक्ट के तहत किसी भी अपराधी के खिलाफ तभी मामला दर्ज होगा, जब वह अंतिम दस वर्षों के भीतर कम से कम दो संगठित अपराधों में संलिप्त पाया जाए और इस अपराध में एक से अधिक व्यक्ति शामिल हों। प्रस्तावित हकोका में 2 साल से उम्रकैद तक की सजा और 2 लाख रुपये से दस लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान होगा।

गठित होंगी विशेष अदालतें
अधिनियम के तहत अपराधों के मुकदमे से निपटने के लिए विशेष अदालतें गठित की जाएगी। साथ ही विशेष अभियोजकों की व्यवस्था करने के लिए के लिए प्रावधान होंगे।

संगठित अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा : मनोहर लाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि संगठित अपराधों में शामिल बदमाशों को बख्शा नहीं जाएगा। इस कानून के साथ, राज्य सरकार न केवल गैंगस्टरों, उनके मुखियाओं और संगठित आपराधिक गिरोह के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होगी, बल्कि पुलिस को सशक्त बनाया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार ने अपने यहां 1999 में मकोका बना दिया था, जबकि दिल्ली सरकार 2002 में इस तरह का कानून बना चुकी है। समय की जरूरत के अनुसार उसी तर्ज पर यह कानून बनाया जा रहा है।

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