हरियाणा में खुलेंगे सभी मंदिर, सीएम और डिप्टी सीएम ने प्रदेशवासियों को दी जन्माष्टमी की बधाई
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हरियाणा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर सभी मंदिर खुले रहेंगे। केवल कंटेनमेंट जोन में मंदिरों को नहीं खुला जाएगा। गृह विभाग ने मंदिरों को खोलने के आदेश मंगलवार को जारी कर दिए। मंदिर मंगलवार रात 12 बजे से ही खुले रहेंगे। गृह विभाग ने यह आदेश सिर्फ एक दिन के लिए जारी किए हैं। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने सभी डीसी को मंगलवार रात 12 बजे से जन्माष्टमी तक मंदिरों को खोलने को कहा है।
डीसी अपने स्तर पर कुछ नियम और शर्तें भी लागू करेंगे, जिन्हें लोगों को मानना होगा। मंदिर में आने वाले लोग सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें, इसकी जिम्मेदारी मंदिर प्रबंधन की होगी। किसी भी व्यक्ति को बिना मास्क मंदिर में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। मंदिर के गेट पर लोगों को सैनिटाइजर की व्यवस्था करनी होगी।
मंदिर प्रबंधन की तरफ से एक व्यक्ति को गेट पर इन सभी चीजों का ध्यान रखने के लिए बैठाना होगा। मंदिर में आने वाले लोगों को सबसे महत्वपूर्ण बात यह बतानी होगी कि किसी भी मूर्ति को छूने पर पाबंदी है। मंदिर के अंदर किसी भी प्रकार की आरती या प्रसाद का वितरण करने पर पाबंदी रहेगी।
मंदिर में आने वाले भक्तों को भगवान के दर्शन और प्रार्थना दूर से ही करना होगा। मंदिर पुजारी को ही आरती करने की इजाजत होगी। मंदिर प्रबंधन को बुधवार सुबह सबसे पहले पूरे मंदिर परिसर को सैनिटाइज करवाना होगा। इसके साथ-साथ हर 3 घंटे बाद पूरे मंदिर का सैनिटाइजेशन करवाना पड़ेगा।
जीवन जीने की कला सिखाते हैं भगवान श्री कृष्ण: मनोहर
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व गृह मंत्री अनिल विज ने प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में स्वजनों को देखकर विमुख हुए अर्जुन को आत्मा की अमरता का संदेश दिया, जो हिंदुओं का धार्मिक ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ बना। यही ग्रंथ आज दार्शनिक परंपरा की आधारशिला है और समस्त मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।
श्रीकृष्ण का चरित्र हमें लौकिक और आध्यात्मिक शिक्षा देता है। गीता में उन्होंने स्वयं कहा है कि ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ अर्थात व्यक्ति को मात्र कर्म करना चाहिए फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएं और दर्शन आज भी प्रासंगिक हैं और हमें एक सफल जीवन जीने के लिए उनका पालन करना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि श्रद्धा, आस्था और विश्वास से परिपूर्ण श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व का मानव-जीवन में युगों-युगों से विशेष महत्व रहा है। श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से कर्मयोग का जो ज्ञान दिया है, वह आज भी हमारे जीवन में प्रासंगिक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि वे कोरोना के दृष्टिगत सामूहिक आयोजनों से बचें और नियमों का पालन करते हुए जन्माष्टमी पर्व को हर्षोल्लास के साथ अपने घरों में ही मनाएं।