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जाट आंदोलन केस में चौंकाने वाला मोड़, हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार

Sat, 03 Dec 2016 01:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 03 Dec 2016 01:49 PM IST
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haryana jat voilence case hearing in highcourt, witness changed their statement
धरने पर बैठे जाट समाज के लोग - फोटो : amar ujala
जाट आरक्षण आंदोलन के मामले में चौंकाने वाला मोड़ देखने को मिला है, जिस पर सख्त टिप्पणी करते हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई। ‘यह शानदार संगीत है, विभाग गा रहा है। आपने सिस्टम को मजाक बना दिया है। 2000 केस दर्ज किए गए हैं। लोगों की हत्या की गई है। संपत्ति जलाई गई है। गवाह मुकर रहे हैं। गवाहों की हिफाजत का कान्सेप्ट क्या है?’
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यह सवाल शुक्रवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एबी चौधरी ने हरियाणा पुलिस से पूछ लिया। हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा व आगजनी को लेकर पुलिस ने जो मामले दर्ज किए हैं, उनमें अब गवाहों के मुकरने को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी से जवाब मांग लिया है।
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जस्टिस एबी चौधरी ने डीजीपी को अगली सुनवाई पर विस्तृत एफिडेविट दाखिल कर यह बताने को कहा है कि गवाहों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? जस्टिस चौधरी ने यह आदेश जारी करते हुए यह भी साफ कर दिया कि अब आगे कोई और मौका नहीं दिया जाएगा। पुलिस को यह स्वतंत्रता है कि वह मामलों की अच्छी तरह जांच करे और स्टेटस रिपोर्ट फाइल करे।
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आईजी की ओर से दायर एफिडेविट रद्द किए गए

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कोर्ट
मामले की अगली सुनवाई अब 12 दिसंबर को होगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा के अभियोजन निदेशक नरशेर सिंह और आईजी (कानून व्यवस्था) अरशिंदर सिंह चावला की ओर से दायर एफिडेविट रद कर दिए, जिनमें कहा गया था कि फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 2000 से ज्यादा केस रजिस्टर नहीं किए गए है और इस दौरान गवाहों की ओर से एक भी शिकायत या आवदेन सुरक्षा दिए जाने के मांग करते हुए नहीं दिया गया।

एफिडेविट में यह भी कहा गया कि इस तरह की शिकायत या आवदेन मिलने पर संबंधित गवाहों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएंगे। सरकार के इन जवाब से नाराज जस्टिस एबी चौधरी ने कहा, ‘वेतन लेने और कागज खराब करने के अलावा, कुछ नहीं किया जा रहा।

अगर सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती है तो कोई सुरक्षा की मांग नहीं करेगा। यह एक दिनचर्या है जो हम पिछले कई वर्षों से सुन रहे हैं। कैसे मुकरना है, सरकारी कर्मचारियों को डिफेंस काउंसिल अच्छी तरह प्रशिक्षित कर देते हैं।’

जानिए, आखिर क्या है यह पूरा मामला

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जाट आंदोलन - फोटो : amar ujala
बीते फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भिवानी जिले के बामला रेलवे स्टेशन को नुकसान पहुंचाने और जलाने के आरोपी जोगिंदर सिंह ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है।

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस एबी चौधरी ने इस बात को गंभीरता से लिया कि तीन सरकारी कर्मचारी- उमेद सिंह (स्टेशन मास्टर), कृष्ण कुमार और सतबीर सिंह (दोनों प्वाइंट्समैन) ने ही जोगिंदर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए उसकी शिनाख्त भी की थी, लेकिन अदालत में जोगिंदर सिंह के खिलाफ गवाही के दौरान तीनों अपने बयान से मुकर गए।

हालांकि शुक्रवार को हरियाणा सरकार की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि तीनों कर्मचारी केंद्र सरकार के हैं और उनके इस तरह गवाही के दौरान मुकर जाने के बारे में संबंधित केंद्रीय विभाग को सूचना दे दी गई है ताकि उनका विभाग उन पर कार्रवाई कर सके।
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