मुरथल गैंगरेपः खामोशी में छिपे सवालों के बवंडर, लोगों में सिहरन
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जाट हिंसा के दौरान मुरथल रोड पर महिलाओं से हुई दरिंदगी का मामला देश भर के मीडिया में छा गया है। वहीं, लोगों में दहशत छाई हुई है। चंडीगढ़ को देश की राजधानी दिल्ली से जोड़ने वाला एनएच-1, कभी न रुकने वाले इस नेशनल हाइवे पर आजकल बहुत खामोशी है। इसके किनारे स्थित ढाबे उदास हैं, इन पर चौबीस घंटे दिखने वाली ग्राहकों की भीड़ छितराई हुई है।
ये माहौल 21 फरवरी की काली रात के बाद से है। अपने खास स्वाद के चलते लोगों की जुबान पर चढ़ा रहने वाला सुखदेव ढाबा आज देशभर का मीडिया सेंटर बन गया है। इस ढाबे पर ही नहीं, इलाके में भी इलेक्ट्रॉनिक चैनल और प्रिंट मीडिया की इतनी चहल-पहल के लोग आदी नहीं हैं। जब यह संवाददाता शनिवार दिन में करीब 10.45 पर सुखदेव ढाबे पर पहुंचा तो आधा दर्जन ओवी वैन खड़ी मिलीं।
झुंड बनाकर खड़े संवाददाता खुसर-फुसर करते नजर आए। हर कोई कथित दरिंदगी की हकीकत जानने को तथ्यों की तलाश में। ...लेकिन यहां के बाशिंदों की खामोशी, पुलिस के दावे, मीडिया में अब तक सामने आए चेहरे कई सवालों को जन्म दे रहे हैं। सवाल पत्रकारों के ही जहन में नहीं हैं बल्कि यहां के बाशिंदे भी खुद से सवाल कर रहे हैं कि आखिर क्यों वे शक की नजर से देखे जा रहे हैं?
महिलाओं से अभद्रता और दुराचार के दावे में सड़क पर बिखरे मिले कुछ अंत:वस्त्र, सामने आए चश्मदीदों का उदाहरण दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ घटनास्थल के आसपास के दो दर्जन से अधिक ढाबों पर काम करने वाले लोग, फुटकर दुकानदार और आसपास के कामगार कोई भी फिलहाल इसकी तस्दीक नहीं कर रहा है।
महिलाओं के साथ हुई दरिंदगी बड़ी चर्चा का विषय
सोनीपत से करीब आठ किलोमीटर दूर एनएच वन पर है मुरथल। ढाबों के नाम से ख्यात यह जगह अब महिलाओं से हुई कथित दरिंदगी के लिए सुर्खियों में है। 12 फरवरी से लोग आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। सब शांतिपूर्ण था, जाम लगाकर वाहनों को रोका जा रहा था। 21 फरवरी को सरकार ने आरक्षण देने की घोषणा की तो रात करीब 12 बजे जाम खोल दिया गया।
हसनपुर गांव के राजेंद्र ने इस संवाददाता को बताया, ‘लोग जाम खोलकर लोग घर जा चुके थे। उस समेत इक्का-दुक्का लोग ही वहां रह गए थे। 40-50 बाइक पर आए थे वो..हाथ में फरसे और तलवारें थीं। दर्जन भर गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए, लोगों को मारा-पीटा और दो ट्रक फूंक दिए। कुछ लोगों ने भागकर ढाबे पर शरण ली...ढाबे वालों ने पानी पिलाया और रहने का प्रबंध किया।
उपद्रवियों का तांडव करीब दो घंटे चला। रात के दो बज चुके थे...दंगाइयों का काफिला जा चुका था...। सड़क पर चारों ओर बिखरे कांच और जले हुए ट्रकों से उठते धुएं ने राहगीरों से गुलजार रहने वाले इस हाइवे पर कालिख पोत दी थी।’.. यह कहते-कहते राजेंद्र के माथे पर पसीना छलकने लगा। ...यह दुपहरी में सूरज की तपिश के कारण हो सकता है या उस मंजर की गर्माहट के कारण जो गांव वालों के जाम खोलकर घर आने के बाद उसे हाईवे पर नजर आया था।
लोग कहते हैं, दरिंदगी हुई थी तो पीड़ित सामने आए
एनएच 1 के बाएं और दायें बसे कुराड़ व हसनपुर गांव के बाशिंदे कतई मानने को तैयार नहीं हैं कि उस रात उनके गांव के लड़कों ने किसी महिला के साथ दरिंदगी की। कुराड़ वासी राजेंद्र कहता है...साहब! पूरी 36 बिरादरी एक जाजम पर बैठती है, सबकी भाण-बेट्यां एक सी हैं...इसी ओछी बात ना हुई और ना सुणी। मीडिया आले ही फैला राखी है। पीड़ित होता तो अब तक सामणे न आता।
ढाबों पर छितराई भीड़
आंदोलन की आड़ में हुए उपद्रव ने ढाबों की रौनक छीन ली है। ग्राहकों की आधी तादाद भी नहीं रही। ढाबों के आसपास के फुटकर दुकानदार भी काम कम होने से निराश हैं। एक दुकानदार बताता है कि ग्राहकी बहुत कम हो गई है। क्या हुआ था? इस सवाल का जवाब देने के लिए एक बार ठिठकता है...लेकिन कुछ हिम्मत जुटाकर कहता है मेरे सामने ही आई थी वो भीड़। एक बार तो फोर्स ने खदेड़ दिया था, लेकिन बाद में फिर आए गए। घबराए हुए कुछ लोग दौड़ते हुए यहां आए थे। महिलाओं को उठा ले जाने की भी चर्चा है? इस सवाल पर उसने चुप्पी साध ली, कहा बाद में क्या हुआ था मुझे तो पता नहीं है। पास के अन्य दुकानदारों ने तो कह दिया वे उस रात यहां थे ही नहीं।
चैनल वाले ही बतावे हैं
पशुओं को पानी पिलाने आया हसनपुर का वजीर कहता है ‘साहब...सब चैनल वाले ही बतावे हैं...कुछ सच ना है।’ कपड़्ये मिलण की बात झूठी सै। इतणा तो सही सै कि मार कुटाई हुई थी, पर महिलाओं से जोर जबरदस्ती ना सुणी जी...। उसके कई सवाल कथित घटना की पोल खोल रहे थे और पूरे विश्वास के साथ वो कह रहा था कि म्हारे गाम के छोरे ऐसे ना जी...। सब बिरादरी के लोग आज भी मिल-बैठकर खावें हैं...।