हरियाणा : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित होगा पंचकूला, पिंजौर में इतनी भूमि पर बनेगी फिल्म सिटी
- खाका तैयार, एचएमटी पिंजौर में 50-60 एकड़ में बनेगी फिल्म सिटी
- नगर एवं ग्राम आयोजना विकास के प्रधान सचिव ने ली समीक्षा बैठक
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हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के विजन के अनुरूप पंचकूला जिले के समग्र और समेकित विकास का खाका तैयार कर लिया है। जिले का विकास विभिन्न क्षेत्रों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस‘ के तौर पर किया जाएगा। यह पूरी तरह से यहां की पारिस्थितिकी और पर्यावरण के अनुकूल होगा। एचएमटी पिंजौर में लगभग 50-60 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी विकसित की जाएगी। इसमें मॉडल स्टूडियो बनाए जा सकेंगे।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के प्रधान सचिव एके सिंह ने बुधवार को इस संबंध में समीक्षा बैठक की। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को जिले के एकीकृत विकास के लिए क्रियान्वित की जा रही विभिन्न परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। एके सिंह ने बताया कि पंचकूला जिला नियोजित क्षेत्रीय विकास का एक ऐसा केंद्र होगा, जहां पर्यटन, मनोरंजन, चिकित्सा, औद्योगिक विकास, खेल और आयुर्वेद समेत सांस्कृतिक गतिविधियों पर पूरा फोकस रहेगा। इसके लिए वन, पर्यटन और खेल विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
बेहतर कनेक्टिविटी के लिए ये परियोजनाएं
उन्होंने बताया कि कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ‘पीआर-7’ के तहत पंजाब द्वारा प्रस्तावित सड़क के माध्यम से चंडीगढ़ एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी के काम में तेजी लाई जाएगी। इसी कड़ी में सेक्टर-20-21 और सेक्टर-24-26 को जोड़ने के लिए घग्गर नदी पर पुल का निर्माण कार्य जारी है।
एनएच-73 पर रामगढ़ से कनेक्टिविटी के लिए रामगढ़-मुबारकपुर-डेराबस्सी रोड को अपग्रेड करने की दिशा में काम किया जाएगा। मोरनी-रायपुररानी रोड और एनएच-73 पर चंडी मंदिर टी-जंक्शन से मोरनी रोड तक सड़क को चौड़ा किया जाएगा। सेक्टर-32, पंचकूला को पिंजौर में डीएलएफ टाउनशिप से परवाणु के निकट नेशनल हाइवे से जोड़कर रामगढ़ की हिमाचल प्रदेश से कनेक्टिविटी की भी योजना है।
थापल में पैराग्लाइडिंग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी
एके सिंह ने बताया कि पर्यटन के लिहाज से यहां कंक्रीट के ढांचों के बजाय अस्थायी और प्रकृति के अनुकूल निर्माण पर बल दिया जाएगा। कैंपिंग और ट्रैकिंग के साथ-साथ थापली वन में पैराग्लाइडिंग की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से माउंटेन क्वेल, मोरनी, यादवेंद्र उद्यान, पिंजौर के साथ-साथ रेड बिशप जैसे मौजूदा पर्यटन ढांचे का उपयोग किया जाएगा।
व्हाइट, ग्रीन और ऑरेंज श्रेणी के फार्मा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के मकसद से अस्पतालों के लिए 7 से 10 स्थान चिन्हित किए जाएंगे। मेदांता, गुरुग्राम की तर्ज पर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए पीजीआई, चंडीगढ़ से सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। एजुकेशन सिटी जैसे संस्थान स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। यहां व्हाइट, ग्रीन और ऑरेंज श्रेणी में आने वाले फार्मा उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी है। सेक्टर-22 स्थित आईटी पार्क को पूरी क्षमता से चलाने के विकल्पों की तलाश की जाएगी। इसके अलावा बरवाला को इंडस्ट्रियल टाउनशिप के तौर पर विकसित किया जाएगा।