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तैयारी: नारनौल की ढोसी हिल्स को पर्यटन स्थल बनाएगी मनोहर सरकार, यहीं की जड़ी-बूटियों से बना था च्यवनप्राश
Mon, 06 Sep 2021 11:40 AM IST
निवेदिता वर्मा
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 06 Sep 2021 11:40 AM IST
सार
मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर्यटन विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। उनके आदेश पर ही अगली प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार विभाग की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री केंद्रीय पर्यटन मंत्री से भी चर्चा करने की तैयारी में है ताकि सांझा उपक्रम के जरिये योजना को सिरे चढ़ाया जाए।
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ढोसी की पहाड़ियां।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
च्यवन ऋषि की तपो भूमि ढोसी हिल्स (नारनौल) को मनोहर सरकार पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना चाहती है। इसके लिए पर्यटन विभाग को जिम्मा सौंपा गया है। विभाग ने प्रारंभिक रिपोर्ट बनाकर मुख्यमंत्री को सौंप दी है। ये पहाड़ियां 1200 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं।
बीते दिनों पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा ने ढोसी हिल्स का पैदल दौरा कर वहां काफी समय गुजारा। उन्होंने पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने के साथ निवेश और आमदन के पहलुओं पर भी शोध किया है। चूंकि, अरावली पर्वत श्रृंखला में शामिल ढोसी को पर्यटन स्थल बनाने के लिए सारा खर्च प्रदेश सरकार को ही उठाना होगा। इसलिए एमडी सिन्हा ने हर पहलु को खंगाला है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर्यटन विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। उनके आदेश पर ही अगली प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार विभाग की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री केंद्रीय पर्यटन मंत्री से भी चर्चा करने की तैयारी में है ताकि सांझा उपक्रम के जरिये योजना को सिरे चढ़ाया जाए। इससे प्रदेश सरकार पर वित्तीय बोझ कम पड़ेगा।
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मुख्यमंत्री को प्रधान सचिव पर्यटन के साथ ही इन पहाड़ियों का एरियल सर्वे करना था, लेकिन मौसम अनुकूल न होने से हेलिकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने इन वादियों को आसमान से निहारा है। वह चाहते हैं कि इतिहास के पन्नों में दर्ज इन पहाड़ियों को पर्यटन स्थल बनाया जाए ताकि प्रदेश और देश के लोग इनके बारे में बारीकी से जान सकें।
जो संभव होगा, वह करेंगे : कंवर पाल
वन एवं पर्यटन मंत्री कंवर पाल का कहना है कि ढोसी हिल्स का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री के जहन में इन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। जिस पर पर्यटन विभाग काम कर रहा है। इन्हें विश्व मानचित्र पर लाने के लिए जो भी संभव होगा, वह करेंगे।
केंद्र को ढोसी हिल्स का ये महत्व बताएंगे मुख्यमंत्री
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बीते दिनों पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव एमडी सिन्हा ने ढोसी हिल्स का पैदल दौरा कर वहां काफी समय गुजारा। उन्होंने पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने के साथ निवेश और आमदन के पहलुओं पर भी शोध किया है। चूंकि, अरावली पर्वत श्रृंखला में शामिल ढोसी को पर्यटन स्थल बनाने के लिए सारा खर्च प्रदेश सरकार को ही उठाना होगा। इसलिए एमडी सिन्हा ने हर पहलु को खंगाला है।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर्यटन विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। उनके आदेश पर ही अगली प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार विभाग की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री केंद्रीय पर्यटन मंत्री से भी चर्चा करने की तैयारी में है ताकि सांझा उपक्रम के जरिये योजना को सिरे चढ़ाया जाए। इससे प्रदेश सरकार पर वित्तीय बोझ कम पड़ेगा।
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मुख्यमंत्री को प्रधान सचिव पर्यटन के साथ ही इन पहाड़ियों का एरियल सर्वे करना था, लेकिन मौसम अनुकूल न होने से हेलिकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने इन वादियों को आसमान से निहारा है। वह चाहते हैं कि इतिहास के पन्नों में दर्ज इन पहाड़ियों को पर्यटन स्थल बनाया जाए ताकि प्रदेश और देश के लोग इनके बारे में बारीकी से जान सकें।
जो संभव होगा, वह करेंगे : कंवर पाल
वन एवं पर्यटन मंत्री कंवर पाल का कहना है कि ढोसी हिल्स का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री के जहन में इन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। जिस पर पर्यटन विभाग काम कर रहा है। इन्हें विश्व मानचित्र पर लाने के लिए जो भी संभव होगा, वह करेंगे।
केंद्र को ढोसी हिल्स का ये महत्व बताएंगे मुख्यमंत्री
- इसी पहाड़ी की जड़ी-बूटियों से पहली बार च्यवनप्राश बना।
- शंखपुष्पी और कायाकल्प नामक औषधि का भी रहस्य छिपा है।
- इसे आग्नेयगिरी भी कहते हैं। ढोसी पर वैदिक काल के प्रसिद्ध ऋषि च्यवन का आश्रम भी है।
- पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां आए थे, महाभारत और पुराणों में भी इस पहाड़ी का जिक्र है।
- मान्यता है, सात हजार साल पहले च्यवन ऋषि ने तप करते हुए यहां उपलब्ध जड़ी-बूटियों से सर्वप्रथम आयुर्वेदिक च्यवनप्राश बनाया।
- ढोसी की उत्पत्ति त्रेता युग में हुई, यहां मौजूद कुंड में स्नान का विशेष महत्व है।