कनीना बस हादसे से सबक: हरियाणा में अब स्कूल बस ड्राइवरों को साल में दो बार करना होगा रिफ्रेशिंग कोर्स
महेंद्रगढ़ के कनीना के गांव उन्हानी के पास ईद के दिन स्कूल बस पलटने से भीषण सड़क हादसा हो गया था। इस दुर्घटना में छह बच्चों की मौत हो गई थी।
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महेंद्रगढ़ के कनीना स्कूल बस हादसे से सबक लेते हुए हरियाणा सरकार अब सुरक्षित स्कूल वाहन नीति -2024 लेकर आ रही है। इस नीति का मकसद बस से जाने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना है।
इस नीति में स्कूल प्रबंधन, स्कूल वाहन मालिक, ड्राइवरों व कंडक्टर की जिम्मेदारियां विद्यार्थियों के प्रति बढ़ जाएगी। इसके तहत अब स्कूल बस की स्टेयरिंग उसी ड्राइवर के पास होगी, जिसके पास कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव होगा। इन पांच सालों में न तो उसका तीन बार से ज्यादा चालान कटा और न ही लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज हुआ है। इसके साथ ही साल में कम से कम दो बार अधिकृत ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से रिफ्रेशिंग कोर्स करना अनिवार्य होगा। इसकी जिम्मेदारी वाहन मालिकों की होगी।
साथ ही ड्राइवरों के शराब सेवन की जांच भी करवानी होगी और उसका रिकॉर्ड भी रखना होगा। हरियाणा सरकार ने इस नीति का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर संबंधित लोगों से सुझाव मांग लिए हैं।
हरियाणा सरकार के परिवहन विभाग की ओर से यह नीति बनाई गई है। इस नीति के कार्यान्वयन के लिए राज्य, जिला और उपमंडल स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा। राज्य स्तर की समिति का गठन परिवहन विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में होगा। इसमें परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ पुलिस महानिदेशक, उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षा के महानिदेशक के साथ स्कूल एसोसिएशन के दो प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
स्कूल प्रतिनिधियों का कार्यकाल दो साल से ज्यादा नहीं होगा और दस साल के बाद दोबारा नियुक्ति हो सकेगी। इसी तरह जिला स्तर और उपमंडल स्तर पर कमेटी गठित की जाएगी। जिला स्तर कमेटी के अध्यक्ष उपायुक्त और उपमंडल स्तर के अध्यक्ष एसडीएम होंगे। नीति में तीनों समितियों के कार्यों को विस्तार से समझाया गया है।
स्कूल परिसर को ट्रैफिक अपने खर्चे पर नियंत्रित करना होगा
सरकार ने नीति में प्रावधान किया है कि स्कूल खुलने या बंद होने पर प्रबंधन को अपने खर्चें व कर्मचारियों के माध्यम से स्कूल परिसर का ट्रैफिक नियंत्रित करेगा। इसके साथ वन वे ट्रैफिक को भी नियंत्रित करेगा, ताकि बच्चे सुरक्षित सड़क पार कर सकेंगे। यदि जरूरी हो तो प्रारंभिक योजना व सलाह के लिए यातायात पुलिस की मदद ली जा सकती है। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन स्कूल परिवहन सुविधा का उपयोग करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों से ड्राइवर-कंडक्टर परिचालक के आचरण के संबंध में समय-समय पर फीडबैक लेगी और उनका रिकॉर्ड भी रखेगी। यदि कोई ड्राइवर नशे में पाया जाता है तो उसे तुरंत बर्खास्त करना होगा। स्कूल प्रबंधन अपने संकाय या कर्मचारियों में से एक को परिवहन प्रबंधक के रूप में नियुक्त करेगा, ताकि नीतियों को सही तरह से लागू किया जा सके।
साल में दो बार जमा कराना हो स्व प्रमाणित शपथ पत्र
हर स्कूल प्रबंधन को प्रत्येक साल एक जुलाई और एक जनवरी को निर्धारित प्रारूप के अनुसार नोटरी द्वारा विधिवत सत्यापित शपथ पत्र के माध्यम से नीति के अनुपालन का स्व-प्रमाणन प्रस्तुत करना होगा। इसमें बताना होगा कि स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी लागू की या नहीं। इसके साथ यह भी जानकारी देनी होगी कि स्कूल ड्राइवरों की कितने बार शराब व ड्रग्स की जांच करवाई। यदि कोई ड्राइवर नशे में मिला तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। शिक्षा विभाग को स्व-प्रमाणन को अनिवार्य अनुलग्नलों में शामिल करेगा।
जिला व सब कमेटी को हर महीने जांचने होंगे स्कूल व वाहन
नीति के मुताबिक जिला कमेटी व सब कमेटी को हर महीने स्कूलों और वाहनों की जांच करनी होगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि चालान जारी किए और कितने वाहनों को इंपाउड किया गया। यह जानकारी एक निश्चित प्रारूप में हर महीने परिवहन आयुक्त को भेजनी होगी। इसके साथ ही इन कमेटियों को हर महीने जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ बैठक करनी होगी।