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जबरन धर्मांतरण: नोटिस के 60 दिन के अंदर पीड़ित को भरण-पोषण राशि देगा दोषी, सजा व जुर्माना का भी प्रावधान

Tue, 20 Dec 2022 12:55 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 20 Dec 2022 12:55 AM IST
सार

धर्मांतरण के लिए दोषी ठहराए गए लड़के या लड़की की मृत्यु हो जाती है तो उस स्थिति में उसकी अचल संपत्ति से भरण-पोषण राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भी यह राशि वसूलने का प्रावधान रहेगा।

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Haryana government made rules against forced conversion
हरियाणा विधानसभा। - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा सरकार ने हरियाणा विधिविरुद्ध धर्म परिवर्तन निवारण नियम, 2022 बना दिए हैं। जबरन धर्मांतरण होने पर पीड़ित न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकेंगे। सक्षम न्यायालय याचिकाकर्ता और आरोपी की आय को ध्यान में रखकर भरण-पोषण और कार्यवाही का खर्चा देने का आदेश जारी करेगा। न्यायालय का फैसला आने के बाद दोषी को नोटिस तामील होने की तारीख से साठ दिन के भीतर पीड़ित को मासिक भरण-पोषण की राशि का भुगतान शुरू करना होगा। पीड़ित लड़का या लड़की में से कोई भी हो सकता है।  

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जबरन धर्मांतरण के बाद बच्चा होने के बावजूद लड़का या लड़की शादी से संतुष्ट नहीं है तो भी न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। न्यायालय के आदेश पर दोषी को विवाह से जन्मे अवयस्क बालक के बेहतर भविष्य के लिए भी भरण पोषण राशि देनी होगी। अधिनियम की धारा 6 के अधीन विवाह को अमान्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है।
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धर्मांतरण के लिए दोषी ठहराए गए लड़के या लड़की की मृत्यु हो जाती है तो उस स्थिति में उसकी अचल संपत्ति से भरण-पोषण राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भी यह राशि वसूलने का प्रावधान रहेगा। बच्चे को कोई गोद ले लेता है या उसे संभाल रहे व्यक्ति की दूसरी शादी हो जाती है तो उस स्थिति में न्यायालय अपने पूर्व के आदेश को रद्द कर सकेगा। हरियाणा में पिछले चार साल में जबरन धर्मांतरण के 127 मामले दर्ज हुए हैं।
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ये भी किए प्रावधान 

  • स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की जानकारी धार्मिक पुरोहित या अन्य व्यक्ति को डीसी को आयोजन स्थल के साथ पूर्व में देनी होगी। नोटिस को डीसी कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा किया जाएगा। अगर किसी व्यक्ति को आपत्ति है तो वह 30 दिनों के भीतर लिखित में अपनी शिकायत दायर कर सकता है।
  • डीसी जांच कर यह तय करेंगे कि धर्म परिवर्तन का आशय धारा-3 का उल्लंघन है या नहीं। अगर इसमें कोई उल्लंघन पाया जाता है तो आग्रह अस्वीकार कर दिया जाएगा। डीसी के आदेश के विरुद्ध 30 दिनों के भीतर मंडल आयुक्त के समक्ष अपील की जा सकती है।


सजा व जुर्माना का प्रावधान

  • किसी प्रलोभन, बल प्रयोग, षड्यंत्र से धर्म परिवर्तन करवाया जाता है तो एक वर्ष से पांच वर्ष तक का कारावास और कम से कम एक लाख रुपये जुर्माना होगा।
  • विवाह के लिए धर्म छिपाया है तो 3 से 10 साल तक कारावास और कम से कम तीन लाख रुपये जुर्माना लगेगा।
  • सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में विधेयक की धारा-3 के उपबंधों का उल्लंघन करने पर 5 से 10 साल तक का कारावास और कम से कम 4 लाख रुपये के जुर्माना
  • एक बार से अधिक जबरन धर्मांतरण में पकड़े जाने पर दस साल की सजा व पांच साल से कम जुर्माना नहीं होगा।
  • कोई संस्था अथवा संगठन कानून का उल्लंघन करता है तो पंजीकरण रदद कर दिया जाएगा। कानून का उल्लंघन संज्ञेय अपराध और गैर जमानती होगा।
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