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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Government Gazatte Notification Regarding Swine Flu

हरियाणाः स्वाइन फ्लू की जांच से लेकर उपचार के नियम तय, जारी हुआ गजट नोटिफिकेशन

Fri, 06 Dec 2019 03:24 PM IST
खुशबू गोयल संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
संजय कुमार, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 06 Dec 2019 03:24 PM IST
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Haryana Government Gazatte Notification Regarding Swine Flu
फाइल फोटो
हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य की ओर से स्वाइन फ्लू को लेकर कड़ा संज्ञान लेते हुए 29 नवंबर को गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसमें संदेह जताया गया है कि प्रदेश में स्वाइन फ्लू का वायरस इन्फल्यूंजा ए, एचवन व एनवन फैल सकता है। एहतियात के तौर पर हरियाणा अपेडेमिक डिजिज इन्फ्ल्यूंजा ए, एचवन एनवन रैगुलेशन 2019 प्रस्ताव 2022 तक के लिए पारित कर दिया गया है।
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इस नोटिफिकेशन में स्पष्ट निर्देश हैं कि मरीजों का उपचार निजी व सरकारी अस्पताल राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र नई दिल्ली की गाइड लाइन के अनुसार ही करेंगे। यदि कोई नियम तोड़ता है तो उस पर आईपीसी के सेक्शन 188 के तहत कार्रवाई होना तय है।
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राज्यपाल की ओर से जारी नोटिफिकेशन को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि स्वाइन फ्लू का उपचार करने वाले सरकारी व निजी अस्पताल पर भारत सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की गाइड लाइन को मानना होगा।
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कहां मरीज का उपचार होगा, कहां मरीज के लिए आइसोलेशन की सुविधा होगी, इसे हर जिले में सिविल सर्जन की ओर से तय किया जाएगा। मरीज पॉजिटिव हो या संदेह में हो, उसे अस्पताल में रखा जाएगा और सैंपल जांच के लिए भरा जाएगा।

सभी अस्पताल सिविल सर्जन के माध्यम से इन मरीजों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देंगे। हर मरीज को उपचार बगैर किसी देरी के करना अनिवार्य होगा। यदि मरीज निजी अस्पताल में है तो संचालक को हर हाल में इसकी जानकारी सिविल सर्जन को देनी अनिवार्य होगी। इसके लिए प्रदेश स्तर पर व जिला स्तर पर नोडल अधिकारी तय कर दिए गए हैं।

इनके मरीजों को अलग से रखना अनिवार्य होगा। सभी अस्पतालों में स्क्रीनिंग सेंटर अनिवार्य होगा ताकि रोगियों की समय पर पहचान हो सकें। मरीजों की पुष्टि अनुशंसित परीक्षण आरटी पीसीआर से ही होगी। इसमें अहम यह होगा कि कोई व्यक्ति या संस्थान इससे संबंधित या उपचार संबंधी जानकारी सीधा नहीं दे सकेगा।

कोई भी जानकारी बगैर विभाग की अनुमति के सार्वजनिक नहीं होगी। नियम तोड़ने वाले के खिलाफ सिविल सर्जन की ओर से गठित कमेटी जांच करेगी। इसमें मेडिसन, बाल रोग, एनेस्थिसिया व जिला महामारी विशेषज्ञ की टीम जांच करेगी। जांच के बाद नियम तोड़ने वाले को नोटिस जारी होगा। यदि आरोपी समय पर जवाब नहीं देता तो उसे दोषी माना जाएगा और उस पर कार्रवाई होगी।
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