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जाली जे फार्म काटकर ज्यादा दिखाई जाती थी खरीद, सरकार की सख्ती से रुक गई गड़बड़ी
Thu, 19 Nov 2020 03:34 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 19 Nov 2020 03:34 PM IST
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धान खरीद
- फोटो : Amar Ujala
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हरियाणा में जाली जे फार्म काटकर धान की ज्यादा खरीद दिखाई जा रही थी, जो सरकार की सख्ती के बाद इस साल नहीं हो पाई। चावल मिलों पर सरकार की सख्त कार्रवाई से धान का फर्जीवाड़ा काफी हद तक रुका है। गड़बड़ी रुकने से इस बार मंडियों में दस लाख टन कम धान खरीद दर्ज की गई है। बीते साल तक जाली जे फार्म काटकर धान की ज्यादा खरीद दिखाई जाती थी।
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राइस मिल मालिक और आढ़तियों के गठजोड़ से यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चला आ रहा था, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगती थी। वास्तव में उतना धान खरीदा ही नहीं जाता था, जितनी खरीद कागजों में दिखाकर सरकार से पेमेंट ले ली जाती थी।
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चावल मिलों के तीन बार करवाए गए भौतिक सत्यापन में गड़बड़ी पकड़ी गई। इसके बाद सरकार की तरफ से मिल मालिकों से रिकवरी की गई। इसके अलावा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अनेक ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगी है।
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खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने कहा कि इस बार धान की फसल पिछले साल के मुकाबले 10 लाख टन कम आई है। इस साल 54 लाख टन धान की खरीद हुई है, जबकि पिछले सीजन में 64 लाख टन धान की फसल खरीदी गई थी। सरकार ने चावल मिलों पर जो कार्रवाई की है, उसके चलते गड़बड़ी रुकी है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने बाजरा खरीद की समय सीमा 27 नवंबर तक बढ़ा दी है। इस बार बाजरे की फसल पिछले साल के मुकाबले बड़ी मात्रा में आई। एमएसपी पर बाजरे की खरीद के चलते मंडियों में ज्यादा बाजरा आया। पिछले सीजन में पौने चार लाख टन बाजरे की फसल आई थी, इस बार करीब 6 लाख टन फसल अब तक आ चुकी है।