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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Corona update: Special talk with the director of PGIMS Rohtak regarding Covid-19

इंटरव्यू : सावधान! सर्दी में बढ़ी कोरोना वायरस की ताकत, लापरवाही बरती तो तेजी से फैल सकता है संक्रमण

Mon, 30 Nov 2020 10:06 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 30 Nov 2020 10:06 PM IST
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Haryana Corona update: Special talk with the director of PGIMS Rohtak regarding Covid-19
निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव। - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा में कोरोना संक्रमण की दूसरी पीक चल रही है और यह पहली पीक की तुलना में अधिक घातक साबित हो रही है। पीजीआईएमएस रोहतक संक्रमण की शुरुआत से ही प्रदेश के लोगों को महामारी से बचा रहा है। कोविड अस्पताल के रूप में ट्रॉमा सेंटर रोजाना सैकड़ों मरीजों को उपचार दे रहा है। कोरोना संक्रमण की चल रही स्थिति और उससे निपटने को लेकर अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार ने पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव से बातचीत की। उसके अंश:-


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हरियाणा में कोरोना संक्रमण की दूसरी पीक चल रही है और यह पहली पीक की तुलना में अधिक घातक साबित हो रही है। पीजीआईएमएस रोहतक संक्रमण की शुरुआत से ही प्रदेश के लोगों को महामारी से बचा रहा है। कोविड अस्पताल के रूप में ट्रॉमा सेंटर रोजाना सैकड़ों मरीजों को उपचार दे रहा है। कोरोना संक्रमण की चल रही स्थिति और उससे निपटने को लेकर अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार ने पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव से बातचीत की। उसके अंश:-

1. वैक्सीन का ट्रायल किस स्तर पर है? आम लोगों के लिए कब तक आने की उम्मीद है?
जवाब : को-वैक्सीन का ट्रायल तीसरे स्तर पर है। पहले स्तर पर 375 वालंटियर में 80 हमारे थे और दूसरे स्तर पर 380 वालंटियर में 60 हमारे थे। अब तीसरे स्तर पर 25800 को वैक्सीन दी जानी है, इसमें एक हजार को पीजीआईएमएस रोहतक वैक्सीन लगाएगा। सभी वालंटियर 18 से अधिक आयु वाले हैं। 

भारत बायोटेक, आईसीएमआर, नेशनल इंस्टीट्यूट वायरोलॉजी इस प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं। तीसरे स्तर के ट्रायल में बीपी, शुगर, हार्ट व अस्थमा वाले वह मरीज, जिनकी बीमारी नियंत्रण में है, उनको वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके अलावा हेल्थ केयर वर्कर को भी रिसर्च में शामिल कर लिया गया है। 1000 वालंटियर में पहले 200 सैंपल पूरे हो गए हैं। 42 दिन बाद एंटीबॉडी जांच के लिए सैंपल लिया जाएगा। एक साल में सात से आठ बार वालंटियरों को बुलाया जाएगा। सभी की एंटी बॉडी व कोरोना जांच की जाएगी। वैक्सीन मार्च 2021 तक आने की उम्मीद है।

2. पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर क्यों घातक साबित हो रही है?

जवाब :  अनलॉक पीरियड, सामाजिक कार्यक्रम, त्योहारी सीजन, लापरवाही का बढ़ना, संक्रमित का आइसोलेशन में सही से न रहना, 90 प्रतिशत बगैर लक्षण वालों का जांच न करवाना, नॉन कोविड के चक्कर में डॉक्टरों का संक्रमित होना, कांटेक्ट ट्रेसिंग कम होना, सर्दी में वायरस की ताकत बढ़ना और व्यक्ति की इम्युनिटी घटना, वायु प्रदूषण का बढ़ना।

3. संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ने के क्या कारण हैं। क्या सर्द मौसम यह वायरस तेजी से फैलता है?
जवाब : संक्रमितों की संख्या का तेजी से बढ़ने के कई कारण हैं। इसमें सर्द मौसम अहम है, क्योंकि सर्दियों में वायरस की ताकत बढ़ जाती है और व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में यदि लापरवाही होती है तो संक्रमण का तेजी से बढ़ना निश्चित है। 

4. यदि हालात बिगड़े तो कोरोना मरीजों के उपचार के लिए क्या व्यवस्था रहेगी, संस्थान के पास कितने वेंटिलेटर हैं? संस्थान में डॉक्टरों की संख्या कितनी है और कुल कितने बेड रिजर्व किए गए हैं?
जवाब : कोरोना से बचाव जरूरी है, क्योंकि अभी इसका सही उपचार नहीं है और न ही अभी वैक्सीन आई है। इसलिए जरूरी है कि इससे बचा जाए। पीजीआईएमएस के पास 200 से अधिक वेंटिलेटर हैं, इसमें से अभी 79 प्रयोग में हैं। इसके अलावा 520 बेड रिजर्व हैं। इसमें 200 से अधिक प्रयोग हो रहे हैं। पीजीआईएमएस में 400 के करीब सीनियर डॉक्टर हैं। इसके अलावा 100 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर, 850 रेजिडेंट डॉक्टर है। 

5. बिना लक्षण वाले विद्यार्थियों समेत अन्य मरीजों को क्या सावधानी बरतने की जरूरत है ? 

जवाब : कोरोना से बचाव के तीन मंत्र हैं। इसमें मास्क, सैनिटाइज व सोशल डिस्टेंसिंग का प्रयोग जरूरी है। इसके अलावा शारीरिक व्यायाम, पौष्टिक आहार व विटामिन शरीर के लिए जरूरी है। 

6. जिन्हें एक बार कोरोना हो गया, उन्हें अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव करने चाहिए। उनके परिवार के लोगों को बचाव के लिए क्या करना चाहिए? 
जवाब : पोस्ट कोविड मरीज को पौष्टिक आहार लेने के अलावा व्यायाम करना जरूरी है। इसके अलावा खाने में विटामिन और मानसिक मजबूती के लिए मेडिटेशन करें व पर्याप्त नींद लें। यदि कोई समस्या आ रही है तो मनोरोग एक्सपर्ट या अपने फिजिशियन से बात करें, क्योंकि कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों को समस्या आ सकती है। परिवार को भी चाहिए कि वह कोरोना से ठीक होने के बाद मरीज का सहयोग करें और उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाएं।

7. संस्थान में कोरोना का सैंपल लेने की क्या व्यवस्था है? 
जवाब : ट्रॉमा सेंटर में आमजन व अन्य, स्टाफ के परिवार के लिए सभागार में, सी-ब्लाक में, हर वार्ड में वहां दाखिल मरीजों के लिए व महिला रोग विभाग में रैपिड किट जांच की व्यवस्था है। 

8. होम आइसोलेट कोरोना मरीजों को क्या-क्या सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है?

जवाब : एंबुलेंस व डॉक्टरों की टीम 24 घंटे के लिए उपलब्ध हैं। मरीजों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर है, जिस पर मरीज किसी भी समय मदद मांग सकता है। हमारी टीम 24 घंटे में एक बार होम आइसोलेशन में चल रहे मरीज से बात जरूर करती है। मरीज के ठीक होने के बाद उसे प्लाज्मा डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है। 

9. उपचार के दौरान अब तक कितने मरीजों की मौत हो चुकी है। कोरोना के अलावा और क्या कारण रहे?
जवाब : 350 के करीब, 129 का ऑडिट हो चुका है। इसमें सामने आया कि 27 प्रतिशत मरने वालों को कोई बीमारी नहीं थी। 18 प्रतिशत को एक ही बीमारी थी, इसमें बीपी और डायबिटीज शामिल है। इसके अलावा सबसे अधिक 55 प्रतिशत मरीजों की मौत का कारण वे कई बीमारियों से ग्रस्त थे। 

10. कोरोना संक्रमण काल में संस्थान में सामान्य मरीजों के उपचार की क्या व्यवस्था है? 
जवाब : संस्थान में कोरोना के अलावा नॉन कोरोना मरीजों के उपचार की पूरी व्यवस्था है। प्रदेश में कोरोना उपचार शुरू होने के बाद कोविड-नॉन कोविड दोनों मरीजों का उपचार चल रहा है। दूसरी पीक में जब मरीजों की संख्या बढ़ी तो कुछ समय नॉन कोविड का उपचार बंद हुआ लेकिन इसे फिर शुरू कर लिमिटेड मरीज देखे जा रहे हैं। इलेक्टिव सर्जरी अभी बंद है लेकिन जैसे ही कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी आएगी इसे फिर चालू कर दिया जाएगा।
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