Chandigarh: नए विधानसभा भवन पर बोले हरियाणा विस अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता-भीख नहीं मांग रहे, ये हमारा हक
नया विधानसभा क्षेत्र बनाने के सवाल पर विस अध्यक्ष ने कहा कि ये एरिया के हिसाब से नहीं बल्कि मतदाताओं की संख्या के आधार पर होता है। फिलहाल डेढ़ से पौने दो लाख तक मतदाताओं की संख्या पर एक विधानसभा क्षेत्र बनाया जाता है। क्योंकि लगातार मतदाता बढ़ रहे हैं तो नए क्षेत्र भी बनाए जाएंगे।
विस्तार
हरियाणा के नए विधानसभा भवन के लिए जमीन की तलाश में जुटे विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता का कहना है कि वह किसी से भीख नहीं मांग रहे, ये हरियाणा का हक है। पहले भी हरियाणा और पंजाब ने चंडीगढ़ में अपने कार्यालयों के लिए जमीन ली है। इस बार भी वह कुछ नया नहीं कर रहे बस पुरानी प्रक्रिया दोहरा रहे हैं। जहां तक पंजाब के विरोध की बात है तो वे बिना आधार के ही इस मुद्दे को राजनीतिक बनाना चाहते हैं। जबकि यह मामला चंडीगढ़ यूटी, हरियाणा और केंद्र सरकार से जुड़ा है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए हरियाणा पहले से इसकी तैयारी कर रहा है, पंजाब को भी ऐसी तैयारी करनी चाहिए। अगर पंजाब चंडीगढ़ में नई विधानसभा के लिए जमीन लेता है तो हमें आपत्ति के बजाय खुशी होगी। वहीं, 2026 में नया परिसीमन प्रस्तावित है, तो उसके तहत प्रदेश में 126 विधानसभा और 14 लोकसभा क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता से विशेष बातचीत के प्रमुख अंश...
हरियाणा विधानसभा के लिए अलग भवन बनाने को जमीन लेने की बात कहां तक सिरे चढ़ी?
इसको लेकर यूटी प्रशासन और केंद्रीय मंत्रालय से लगातार बातचीत जारी है। कई स्थानों पर जमीन देख ली है, उम्मीद है कि जल्द ही खुशखबरी मिलेगी। जैसे ही जमीन मिलेगी तो काम शुरू कना दिया जाएगा।
पंजाब के बाद अब यूटी प्रशासन ने भी इस पर आपत्ति जताई है, फिर जमीन कैसे मिलेगी?
जहां तक पंजाब की बात है तो वह केवल राजनीति के लिए इसका विरोध कर रहे हैं। हरियाणा चंडीगढ़ में पहली बार जमीन नहीं ले रहा है। पहले भी न्यू सचिवालय के लिए जमीन ली गई गई। जमीन केंद्र सरकार को देनी है और हमें लेनी है।
आपने वित्तीय शक्तियां लेने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, उसके पीछे क्या मंशा है?
मंशा साफ है, पूरे प्रदेश का बजट विधानसभा में पास होता है, लेकिन विधानसभा के पास अपनी कोई वित्तीय शक्तियां नहीं है। छोटे से लेकर बड़े खर्च तक पास कराने के लिए विधानसभा की ओर से सरकार को फाइल भेजी जाती है। यह काफी लंबी प्रक्रिया है। दूसरे प्रदेशों में विधानसभा के पास वित्तीय शक्तियां हैं। मुख्यमंत्री ने इस बारे में आशवस्त किया है। उम्मीद है बजट में इसका प्रावधान होगा।
सेक्टरों में चार मंजिला भवन बनाने को लेकर आप कितना सहमत हैं?
यह बिलकुल गलत है। एचएसवीपी की इंजीनियरिंग विंग ने भी इसे सही करार नहीं दिया था। बावजूद इसके क्यों लागू किया गया, यह समझ से परे है। मैंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात की है। साथ ही यह भी मांग की है कि आखिर यह नीति कैसे लागू हो गई, इसकी भी जांच की जाए।
2026 परिसीमन के अनुसार, हरियाणा में कितने लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र संभावित हैं?
2026 में नया परिसीमन प्रस्तावित है। हालांकि, 2024 के चुनाव के बाद 2029 में नया परिसीमन लागू होगा। नए परिसीमन के अनुसार 2029 में 126 विधानसभा क्षेत्र और 14 लोकसभा क्षेत्र संभावित हैं।
..तो क्या हरियाणा में नए जिले भी बन सकते हैं?
यकीनन, जब नया परिसीमन लागू होगा तो नए जिले भी बन सकते हैं। सरकार के पास पहले से ही कई शहरों को जिले बनाने की मांग लंबित है। इस समय प्रदेश में 22 जिले, 90 विधानसभा क्षेत्र और 10 लोकसभा क्षेत्र हैं।
नया विधानसभा क्षेत्र बनाने को लेकर क्या मापदंड हैं?
नया विधानसभा क्षेत्र एरिया के हिसाब से नहीं बल्कि मतदाताओं की संख्या के आधार पर होता है। फिलहाल डेढ़ से पौने दो लाख तक मतदाताओं की संख्या पर एक विधानसभा क्षेत्र बनाया जाता है। क्योंकि लगातार मतदाता बढ़ रहे हैं तो नए क्षेत्र भी बनाए जाएंगे।
मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर हर बार आपके नाम की चर्चा की होती है?
यह सब मीडिया की देन है। मैं स्पीकर के नाते बहुत खुश हूं और अपने कर्तव्य का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।
2024 के विधानसभा चुनावों को लेकर आपकी क्या योजना है?
यह सब संगठन तय करता है। जैसा संगठन आदेश करेगा, वही मान्य होगा। मैंने एक पार्षद से अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत की है। संगठन ने जब आदेश दिया तो मैं चंडीगढ़ छोड़कर पंचकूला पहुंच गया।
आपकी उम्र भी अधिक हो चुकी है, क्या आप 75 साल के वर्ग में नहीं आएंगे
यह सब भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व तय करता है। पहले भी कई लोगों को इसमें रियायत मिली है। इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।
आज भी कई विधायकों के आरोप हैं कि अधिकारी उनके फोन नहीं सुनते हैं?
यह पहले हुआ करता था, विधानसभा की तरफ से सख्त निदेश हैं कि अधिकारी विधायकों के कामों और फोन को गंभीरता से लें। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ विधानसभा ने कार्रवाई भी की है।
विधानसभा को पूर्णतया पेपर लैस कब तक बनाया जाएगा?
पिछली बार विधानसभा में 95 प्रतिशत तक काम ऑनलाइन हुआ। इस बार हमारा लक्ष्य है कि 100 फीसदी पेपरलैस काम हो। कुछ दस्तावेजों को केवल रिकार्ड के तौर पर
रखा जाता है, इसलिए उनकी छपाई करानी पड़ती है।
आपने फैसला लिया है कि विधानसभा का पूरा काम हिंदी में होगा, क्या इसके लिए पहले से तैयारियां की गई हैं?
जहां तक इसे लागू करने की बात है तो इसके लिए पहले पूरा ढांचा तैयार किया गया है। उसी आधार पर अब तमाम कार्यवाही हिंदी में होगी। हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है? दूसरा इससे काम करने में अधिक लोगों को विधानसभा की कार्यवाही समझने में आसानी रहेगी।
आपने विधानसभा में कोई ड्रेस कोड लागू किया है?
ड्रेस कोड पहले से लागू है, लेकिन इसे इस बजट सत्र से सख्ती से लागू किया जाएगा। ग्रुप डी के सभी कर्मचारियों समेत सहायकों को ड्रेस पहने के आदेश दिए गए हैं।
विधानसभा की कमेटियां जो रिपोर्ट देती हैं, उन पर अमल कम हो पाता है?
विधानसभा की सभी कमेटियां काफी अहम होती हैं। इनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही की जाती है। किसी भी कर्मचारी व अधिकारी की खामी है तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है। समय पर जवाब नहीं देने पर छह विभागों के आला अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए थे।