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Haryana: विधायकों के फोन और संदेशों की अनदेखी नहीं कर सकेंगे अधिकारी, स्पीकर ने गठित की प्रोटोकॉल समिति

Fri, 24 Jun 2022 03:41 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 24 Jun 2022 03:41 PM IST
सार

विधायकों के विशेषाधिकार की रक्षा के लिए विधानसभा में पहले से विशेषाधिकार समिति गठित है। गत कुछ वर्षों से विधायकों ने ऐसी शिकायतें कीं, जिनमें उनकी अवमानना तो हुई, लेकिन ये मामले विशेषाधिकार के दायरे में नहीं आए।

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Haryana Assembly Speaker constituted special committee to take action against officers who ignore MLAs
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में विधायकों की अवमानना करना सरकारी अधिकारियों के लिए अब संभव नहीं होगा। उनके फोन और संदेशों की अधिकारी अनदेखी नहीं कर सकेंगे। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने विधायकों की अनदेखी करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकसभा की तर्ज पर विशेष कमेटी गठित कर दी है। विधान सभा के प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम-204 के तहत गठित कमेटी प्रोटोकॉल मानदंडों के उल्लंघन और सदस्यों के साथ सरकारी अधिकारियों के अवमानना व्यवहार की जांच के बाद कार्रवाई की अनुशंसा देगी। 

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अंबाला शहर से विधायक असीम गोयल कमेटी की अध्यक्षता करेंगे, जबकि रोहतक से कांग्रेस विधायक भारत भूषण बतरा, पानीपत शहर से प्रमोद विज, राई से विधायक मोहन लाल बडोली, बरवाला से जोगीराम सिहाग, फरीदाबाद से नरेंद्र गुप्ता, पृथला से नयन पाल रावत और सढौरा से रेणु बाला को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।
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विधायकों के विशेषाधिकार की रक्षा के लिए विधानसभा में पहले से विशेषाधिकार समिति गठित है। गत कुछ वर्षों से विधायकों ने ऐसी शिकायतें कीं, जिनमें उनकी अवमानना तो हुई, लेकिन ये मामले विशेषाधिकार के दायरे में नहीं आए। इसके चलते अनेक अफसर बच जाते हैं। ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने प्रोटोकॉल संबंधी विशेष कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी हरियाणा विधानसभा सदस्यों के साथ आधिकारिक व्यवहार के संबंध में केंद्र व राज्य सरकार के समय-समय पर निर्धारित प्रोटोकॉल मानदंडों के उल्लंघन संबंधी मामलों पर संज्ञान लेगी।

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सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किए अधिकार

विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि विधानसभा सदस्यों से प्राप्त फोन कॉल या अन्य माध्यम से किए गए संचार को अनदेखा नही कर सकते। ऐसे संचार पर तुरंत ध्यान देकर बिना विलंब के जवाब देना होगा। आधा-अधूरा जवाब देना भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जाएगा। विधायकों को उनके हलकों में होने वाले सार्वजनिक समारोहों में आमंत्रित न करना भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन होगा। निमंत्रण पत्र में विधायकों के नाम का उल्लेख जरूरी है।


सदस्यों के पास निमंत्रण पत्र पहुंचने में देरी होने पर अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। इतना ही नहीं सार्वजनिक समारोह में उनके लिए बैठने की समुचित व्यवस्था करनी होगी। विधायकों के जनहित के मुद्दों पर संबंधित विभागों को की टेलीफोन कॉल पर तत्काल ध्यान देना होगा। निर्देशों का न उल्लंघन हो, इस संबंध में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की ओर से 1 दिसंबर, 2011 को जारी दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा। सरकारी कामकाज के दौरान हरियाणा विधानसभा के सदस्यों के
साथ सरकारी कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार भी इसके दायरे में आएगा। कमेटी के संज्ञान में आने वाली शिकायतों की जांच के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया विशेषाधिकार समिति के समान होगी।

सचिव के नाम लिखित शिकायत देनी होगी

प्रशासनिक अधिकारियों के दुर्व्यवहार या प्रोटोकॉल के उल्लंघन की किसी भी घटना के संबंध में विधायकों को विधानसभा सचिव के नाम लिखित रूप में शिकायत देनी होगी। शिकायत के साथ सहायक दस्तावेजी साक्ष्य भी लगाने होंगे। शिकायत पर प्रथम दृष्ट्या अगर ऐसा लगता है कि प्रोटोकॉल मानदंडों के उल्लंघन का मामला बनता है, तो अध्यक्ष मामले को जांच और रिपोर्ट के लिए समिति को भेज सकते हैं। अध्यक्ष को इस पर निर्णय लेने के लिए मामले को सदन के समक्ष लाने की आवश्यकता नहीं है।

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