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हरियाणा: 14वीं विधानसभा का पहला सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, दो विधेयक हुए पारित
Thu, 07 Nov 2019 09:51 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 07 Nov 2019 09:51 AM IST
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विधानसभा सत्र में बैठे हरियाणा के विधायक
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा की 14वीं विधानसभा के पहले सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने सत्र के तीसरे दिन आवश्यक विधायी कार्य संपन्न होने के बाद इसकी घोषणा की। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की ओर से विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव पेश किया गया था। तीसरे दिन सत्र लगभग आधा घंटा ही चला।
इस दौरान दो संशोधन विधेयक भी सरकार ने पास कराए। कांग्रेस के मुख्य सचेतक बीबी बत्रा ने जल्दबाजी में विधेयक पारित कराने पर प्वाइंट ऑफ आर्डर के जरिए सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विधेयकों को चर्चा केबाद पास कराना चाहिए था। इस पर स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि मंगलवार रात को संशोधन विधेयकों विधायकों के पास पहुंच गए थे, उनका अध्ययन कर विधायक अपनी आपत्तियां जता सकते थे।
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इस दौरान दो संशोधन विधेयक भी सरकार ने पास कराए। कांग्रेस के मुख्य सचेतक बीबी बत्रा ने जल्दबाजी में विधेयक पारित कराने पर प्वाइंट ऑफ आर्डर के जरिए सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विधेयकों को चर्चा केबाद पास कराना चाहिए था। इस पर स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि मंगलवार रात को संशोधन विधेयकों विधायकों के पास पहुंच गए थे, उनका अध्ययन कर विधायक अपनी आपत्तियां जता सकते थे।
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सामान्य कैडर से होगी प्रमुख अभियंता पद पर पदोन्नति
लोक निर्माण विभाग भवन एवं सड़कें में प्रमुख अभियंता के पद पर पदोन्नति के लिए अब सामान्य कैडर होगा। इलेक्ट्रिकल कैडर के लिए मुख्य अभियंता (इलेक्ट्रिकल) का अलग पद रहेगा, धारा-8 के अधीन गठित कमेटी वरिष्ठता-सह-योग्यता के आधार पर पद भरेगी। वरिष्ठता उनके अपने-अपने कैडर में अधीक्षण अभियंता के पद पर सेवाकाल से तय की जाएगी। प्रदेश सरकार ने विधानसभा में इसके लिए हरियाणा अभियंता सेवा, ग्रुप क, लोक निर्माण (भवन व सड़कें) विभाग (संशोधन) विधेयक, 2019 को पारित करा लिया है।
हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, अधिनियम 30, 2010 को कुछ विद्युत अभियंताओं ने रोहताश सिंह सहरावत व अन्य बनाम हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित याचिकाओं के जरिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायालय ने 12 जनवरी 2018 को कुछ निर्देशों के साथ मामले का निपटारा कर दिया था।
विभाग ने उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जो 28 सितंबर 2018 को निरस्त हो गई। कुछ अधिकारियों ने न्यायालय के 12 जनवरी 2018 के निर्देशों पर तुरंत क्रियान्वन न करने पर अवमानना याचिका भी दायर की है। इसलिए सरकार ने अधिनियम में संशोधन कर दिया है। अधिनियम में संशोधन 4 नवंबर, 2010 से लागू हुआ समझा जाएगा।
करदाताओं की जीएसटी रिफंड से जुड़ी दिक्कतें होंगी दूर
हरियाणा में जीएसटी से जुड़े करदाताओं, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों को माल और सेवा कर प्रणाली में होने वाली प्रमुख असुविधाएं दूर करने के लिए सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। अब रिटर्न भरने और कर का भुगतान करने की प्रक्रिया में पेश आनी वाली दिक्कतें काफी हद तक दूर हो जाएंगी। करदाताओं को रिफंड के संवितरण के लिए केंद्र और राज्य दोनों के अधिकारियों से संपर्क नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने नई रिटर्न फाइलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को संशोधित कर दिया है।
हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, अधिनियम 30, 2010 को कुछ विद्युत अभियंताओं ने रोहताश सिंह सहरावत व अन्य बनाम हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित याचिकाओं के जरिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। न्यायालय ने 12 जनवरी 2018 को कुछ निर्देशों के साथ मामले का निपटारा कर दिया था।
विभाग ने उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जो 28 सितंबर 2018 को निरस्त हो गई। कुछ अधिकारियों ने न्यायालय के 12 जनवरी 2018 के निर्देशों पर तुरंत क्रियान्वन न करने पर अवमानना याचिका भी दायर की है। इसलिए सरकार ने अधिनियम में संशोधन कर दिया है। अधिनियम में संशोधन 4 नवंबर, 2010 से लागू हुआ समझा जाएगा।
करदाताओं की जीएसटी रिफंड से जुड़ी दिक्कतें होंगी दूर
हरियाणा में जीएसटी से जुड़े करदाताओं, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों को माल और सेवा कर प्रणाली में होने वाली प्रमुख असुविधाएं दूर करने के लिए सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। अब रिटर्न भरने और कर का भुगतान करने की प्रक्रिया में पेश आनी वाली दिक्कतें काफी हद तक दूर हो जाएंगी। करदाताओं को रिफंड के संवितरण के लिए केंद्र और राज्य दोनों के अधिकारियों से संपर्क नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने नई रिटर्न फाइलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को संशोधित कर दिया है।
6 माह के प्रसूति अवकाश की तीसरी बार घोषणा, पत्र जारी नहीं
हरियाणा में ठेकेदारों के अधीन कार्यरत महिला कर्मचारियों को 6 महीने का प्रसूति अवकाश देने की घोषणा तीन बार करने के बावजूद अधिकारिक पत्र जारी न होने पर सर्व कर्मचारी संघ ने नाराजगी जाहिर की है। बुधवार को तीसरी बार विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आउटसोर्सिंग नीति पार्ट-1 में लगी महिला कर्मचारियों को 6 महीने का प्रसूति अवकाश देने का ऐलान किया है।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी व उप महासचिव सबिता मलिक ने बताया कि इससे पहले भी बीस जुलाई को सर्व कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के साथ हुई मीटिंग में इस मांग को जोरदार ढंग से उठाया था। जिस पर मुख्यमंत्री ने वेतन सहित 6 महीने का अवकाश देने की घोषणा की थी। लेकिन, पत्र जारी नही हुआ।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जारी घोषणा पत्र में दूसरी बार फिर महिला कर्मचारियों को यह तोहफा देने का वादा किया और अब तीसरी बार फिर घोषणा की है। उन्होंने सवाल उठाया कि पत्र कब जारी होगा, यह अब भी सुनिश्चित नहीं किया गया है। उन्होंने अतिशीघ्र इसका पत्र जारी करने की मांग की है।
लांबा ने बताया कि संघ प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के ध्यान में लाना चाहता है कि जजपा के घोषणा पत्र में कच्चे कर्मियों को पक्का करने, पंजाब के समान वेतनमान व पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण व ठेका प्रथा पर रोक लगाने की मुख्य मांगें शामिल हैं। इसलिए वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए गठबंधन सरकार के बनने वाले न्यूनतम सांझा कार्यक्रम में इन मांगों को शामिल करवाएं और जल्द लागू कराकर हुए अपने वादे को निभाएं।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी व उप महासचिव सबिता मलिक ने बताया कि इससे पहले भी बीस जुलाई को सर्व कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के साथ हुई मीटिंग में इस मांग को जोरदार ढंग से उठाया था। जिस पर मुख्यमंत्री ने वेतन सहित 6 महीने का अवकाश देने की घोषणा की थी। लेकिन, पत्र जारी नही हुआ।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जारी घोषणा पत्र में दूसरी बार फिर महिला कर्मचारियों को यह तोहफा देने का वादा किया और अब तीसरी बार फिर घोषणा की है। उन्होंने सवाल उठाया कि पत्र कब जारी होगा, यह अब भी सुनिश्चित नहीं किया गया है। उन्होंने अतिशीघ्र इसका पत्र जारी करने की मांग की है।
लांबा ने बताया कि संघ प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के ध्यान में लाना चाहता है कि जजपा के घोषणा पत्र में कच्चे कर्मियों को पक्का करने, पंजाब के समान वेतनमान व पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण व ठेका प्रथा पर रोक लगाने की मुख्य मांगें शामिल हैं। इसलिए वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए गठबंधन सरकार के बनने वाले न्यूनतम सांझा कार्यक्रम में इन मांगों को शामिल करवाएं और जल्द लागू कराकर हुए अपने वादे को निभाएं।
किसानों की आंखों में आंसू ही आएंगे, खेत में पानी नहीं
हरियाणा के तोशाम से कांग्रेस विधायक व पूर्व सीएलपी लीडर किरण चौधरी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। किरण ने कहा कि प्रदेश के किसानों की आंखों में आंसू ही आएंगे, खेत में पानी नहीं। भाजपा-जजपा सरकार किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्घ नहीं हैं। पूर्व भाजपा सरकार ने पांच साल गुजार दिए, एसवाईएल का पानी नहीं ला सके।
केंद्र में भी भाजपा सरकार थी और पंजाब में भी अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार, बावजूद उसके कोई नतीजा नहीं निकला। केंद्र सरकार दोनों राज्य सरकारों को साथ बिठाकर मामले का हल निकाल सकती थी। पानी पर्याप्त मात्रा में न होने पर प्रदेश के किसानों को खून के आंसू रोने पड़ते हैं। किरण चौधरी प्रेस गैलरी में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि एसवाईएल का पानी लाने के लिए प्रदेश सरकार को और गंभीरता से प्रयास करने चाहिए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके। विधानसभा सत्र के तीसरे दिन उन्होंने कर्ज माफी, किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य और पराली प्रबंधन पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान चर्चा मांगी थी, लेकिन उनके तीनों प्रस्ताव स्पीकर ने अस्वीकार कर दिए।
किरण ने प्रस्ताव खारिज होने पर विरोध जताया। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने सदन में कहा कि प्रस्ताव मंगलवार को ही रद्द हो गए थे। किरण चौधरी ने कहा उनके ध्यानाकर्षण प्रस्ताव अहम थे, जिनपर चर्चा होनी चाहिए थी। स्पीकर ने कहा कि आपके मुद्दों पर राज्यपाल अभिभाषणा पर चर्चा के दौरान विस्तार से सबने अपने विचार रखे हैं।
केंद्र में भी भाजपा सरकार थी और पंजाब में भी अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार, बावजूद उसके कोई नतीजा नहीं निकला। केंद्र सरकार दोनों राज्य सरकारों को साथ बिठाकर मामले का हल निकाल सकती थी। पानी पर्याप्त मात्रा में न होने पर प्रदेश के किसानों को खून के आंसू रोने पड़ते हैं। किरण चौधरी प्रेस गैलरी में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि एसवाईएल का पानी लाने के लिए प्रदेश सरकार को और गंभीरता से प्रयास करने चाहिए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके। विधानसभा सत्र के तीसरे दिन उन्होंने कर्ज माफी, किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य और पराली प्रबंधन पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान चर्चा मांगी थी, लेकिन उनके तीनों प्रस्ताव स्पीकर ने अस्वीकार कर दिए।
किरण ने प्रस्ताव खारिज होने पर विरोध जताया। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने सदन में कहा कि प्रस्ताव मंगलवार को ही रद्द हो गए थे। किरण चौधरी ने कहा उनके ध्यानाकर्षण प्रस्ताव अहम थे, जिनपर चर्चा होनी चाहिए थी। स्पीकर ने कहा कि आपके मुद्दों पर राज्यपाल अभिभाषणा पर चर्चा के दौरान विस्तार से सबने अपने विचार रखे हैं।