{"_id":"5d81cbf28ebc3e939e46fbec","slug":"haryana-assembly-elections-2019-employees-protestion-against-government","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा विस चुनावः सड़कों पर यूं ही नहीं बरपा हंगामा, कर्मचारियों में मची है मांगें मनवाने की होड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा विस चुनावः सड़कों पर यूं ही नहीं बरपा हंगामा, कर्मचारियों में मची है मांगें मनवाने की होड़
Wed, 18 Sep 2019 11:47 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 18 Sep 2019 11:47 AM IST
विज्ञापन
विरोध प्रदर्शन करते कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा सरकार और कर्मचारियों के बीच चला आ रहा टकराव एकाएक बढ़ गया है। कर्मचारी प्रदेश में अलग-अलग जगह आंदोलनरत हैं। प्रदेश में कर्मचारियों के आंदोलन तो बीते पांच साल में समय-समय पर होते रहे, मगर चुनाव नजदीक आते ही आंदोलनों ने र तार पकड़ ली है। बीते दो महीनों से कर्मचारियों में मांगें मनवाने की होड़ मची हुई है। हर वर्ग चुनावी बेला में सरकार पर दबाव बनाकर अपना स्वार्थ सिद्घ करने में लगा हुआ है। ऐसे कर्मचारी भी सड़कों पर आंदोलनरत हैं, जिनकी नियुक्ति ही पूरी तरह से अनुबंध आधार पर हुई थी।
सरकार उनका अनुबंध तो सालाना बढ़ा सकती है, लेकिन नियमित नहीं कर सकती। ऐसे कर्मचारी ही वर्तमान में सरकार के गले की फांस ज्यादा बने हुए हैं। बीते विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने भी अपने घोषणा पत्र में कुछ वादे कर्मचारियों से ऐसे कर लिए थे, जिन्हें पांच साल के कार्यकाल में सरकार पूरा नहीं कर पाई। अब उन वादों को लेकर भी सरकार, कर्मचारी संगठनों के निशाने पर है। सरकार की दिक्कतें बढ़ाने में बड़ा रोल अफसरशाही का भी है। मु यमंत्री मनोहर लाल के साथ हुई वार्ता में मानी गई मांगों तक की अधिसूचना संबंधित विभाग नहीं कर रहे।
ऐसे में कर्मचारी संगठनों के पास भी आंदोलन का ही रास्ता बचता है। बीते 20 जुलाई को सीएम ने खुद कर्मचारी संगठनों के नेताओं के साथ मैराथन बैठकें की थी, उनमें हुए समझौतों पर भी अफसरों ने अब तक अमल नहीं किया। अब चुनाव आचार संहिता किसी भी समय लागू हो सकती है, इसलिए कर्मचारी सरकार ने मांगें पूरी करवाने के लिए सड़कों पर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार उनका अनुबंध तो सालाना बढ़ा सकती है, लेकिन नियमित नहीं कर सकती। ऐसे कर्मचारी ही वर्तमान में सरकार के गले की फांस ज्यादा बने हुए हैं। बीते विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने भी अपने घोषणा पत्र में कुछ वादे कर्मचारियों से ऐसे कर लिए थे, जिन्हें पांच साल के कार्यकाल में सरकार पूरा नहीं कर पाई। अब उन वादों को लेकर भी सरकार, कर्मचारी संगठनों के निशाने पर है। सरकार की दिक्कतें बढ़ाने में बड़ा रोल अफसरशाही का भी है। मु यमंत्री मनोहर लाल के साथ हुई वार्ता में मानी गई मांगों तक की अधिसूचना संबंधित विभाग नहीं कर रहे।
विज्ञापन
ऐसे में कर्मचारी संगठनों के पास भी आंदोलन का ही रास्ता बचता है। बीते 20 जुलाई को सीएम ने खुद कर्मचारी संगठनों के नेताओं के साथ मैराथन बैठकें की थी, उनमें हुए समझौतों पर भी अफसरों ने अब तक अमल नहीं किया। अब चुनाव आचार संहिता किसी भी समय लागू हो सकती है, इसलिए कर्मचारी सरकार ने मांगें पूरी करवाने के लिए सड़कों पर हैं।
विज्ञापन
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
. पंजाब समान वेतनमान
. कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना
. पुरानी पेंशन नीति बहाल की जाए
. कच्चे कर्मियों के लिए समान काम-समान वेतन
. अनुबंध कर्मियों के लिए सेवा सुरक्षा
. रोडवेज की किलोमीटर स्कीम रद्द की जाए
. जनसेवा के विभागों में ठेका प्रथा खत्म करना
सीएम के साथ बैठक में इन मांगों पर बनी थी सहमति
. सहकारी ग्रामीण बैंकों के कर्मियों को सातवे वेतन आयोग का लाभ।
. पॉलीक्लीनिक व डिस्पेंसरी कर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी।
. कैशलेस मेडिकल सुविधा कर्मचारियों के आश्रितों व पेंशनर्ज पर भी लागू होगी।
. मेस वर्कर व खेल स्टेडियम के कर्मियों को न्यूनतम वेतन देने पर विचार होगा।
. बिजली विभाग के डीसी रेट पर लगे कर्मियों को समान काम समान वेतन
. पंचायती ट्यूबवेल ऑपरेटर को न्यूनतम वेतन। चार घंटे का वेतन सरकार और 4 घंटे का वेतन पंचायतें देंगी।
. कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना
. पुरानी पेंशन नीति बहाल की जाए
. कच्चे कर्मियों के लिए समान काम-समान वेतन
. अनुबंध कर्मियों के लिए सेवा सुरक्षा
. रोडवेज की किलोमीटर स्कीम रद्द की जाए
. जनसेवा के विभागों में ठेका प्रथा खत्म करना
सीएम के साथ बैठक में इन मांगों पर बनी थी सहमति
. सहकारी ग्रामीण बैंकों के कर्मियों को सातवे वेतन आयोग का लाभ।
. पॉलीक्लीनिक व डिस्पेंसरी कर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी।
. कैशलेस मेडिकल सुविधा कर्मचारियों के आश्रितों व पेंशनर्ज पर भी लागू होगी।
. मेस वर्कर व खेल स्टेडियम के कर्मियों को न्यूनतम वेतन देने पर विचार होगा।
. बिजली विभाग के डीसी रेट पर लगे कर्मियों को समान काम समान वेतन
. पंचायती ट्यूबवेल ऑपरेटर को न्यूनतम वेतन। चार घंटे का वेतन सरकार और 4 घंटे का वेतन पंचायतें देंगी।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने आंदोलनरत कर्मचारियों को 20 जुलाई की बैठक में मानी गई मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी आंदोलन की राह छोड़ें, जायज मांगों को पूरा किया जाएगा।
ये संगठन कर रहे आंदोलन
कंप्यूटर शिक्षक संघ, शिक्षा प्रेरक, होलस्टिक यूनिवर्सिटीज अनुबंधित टीचर्स एसोसिएशन, रोडवेज कर्मचारी, गेस्ट टीचर्स
मांगें मानी होती तो न आती आंदोलन की नौबत: लांबा
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान सुभाष लांबा व कर्मचारी महासंघ के प्रधान विरेंद्र धनखड़ ने कहा कि सरकार ने समय रहते कर्मचारियों की मांगें मानी होती तो आंदोलनों की स्थिति ही उत्पन्न नहीं होती। अफसरों के वादाखिलाफी का खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के साथ हुए समझौते को सरकार जल्दी लागू करे। कंप्यूटर शिक्षकों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मी सस्पेंड किए जाएं।
ये संगठन कर रहे आंदोलन
कंप्यूटर शिक्षक संघ, शिक्षा प्रेरक, होलस्टिक यूनिवर्सिटीज अनुबंधित टीचर्स एसोसिएशन, रोडवेज कर्मचारी, गेस्ट टीचर्स
मांगें मानी होती तो न आती आंदोलन की नौबत: लांबा
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान सुभाष लांबा व कर्मचारी महासंघ के प्रधान विरेंद्र धनखड़ ने कहा कि सरकार ने समय रहते कर्मचारियों की मांगें मानी होती तो आंदोलनों की स्थिति ही उत्पन्न नहीं होती। अफसरों के वादाखिलाफी का खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के साथ हुए समझौते को सरकार जल्दी लागू करे। कंप्यूटर शिक्षकों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मी सस्पेंड किए जाएं।