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हरियाणा विस चुनावः कांग्रेस ने लगातार तीन बार सरकार बनाकर लगाई 'हैट्रिक', चौथे में करारी शिकस्त
Mon, 16 Sep 2019 11:49 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 16 Sep 2019 11:49 AM IST
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हरियाणा में कांग्रेस का इतिहास
- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा गठन के बाद पहले तीन चुनाव में कांग्रेस ने लगातार अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई थी, लेकिन चौथी बार पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। 1967, 1968 व 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश में सरकार बनाने में कामयाब रही। सरकार बनाने की हैट्रिक लगाने के बाद चौथे चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कारण, आपातकाल रहा।
देश के साथ प्रदेश के लोगों में भी इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल को लेकर कांग्रेस के प्रति गुस्सा था। 1977 के चुनाव में कांग्रेस को इस गुस्से का शिकार होना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस ने 83 सीटों पर चुनाव लड़ा और मात्र तीन पर ही जीत मिली। 38 उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। जनता पार्टी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़कर 75 सीटें जीती और सत्ता पर काबिज हुई।
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देश के साथ प्रदेश के लोगों में भी इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल को लेकर कांग्रेस के प्रति गुस्सा था। 1977 के चुनाव में कांग्रेस को इस गुस्से का शिकार होना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस ने 83 सीटों पर चुनाव लड़ा और मात्र तीन पर ही जीत मिली। 38 उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। जनता पार्टी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़कर 75 सीटें जीती और सत्ता पर काबिज हुई।
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1977 में ही हरियाणा में विधानसभा सीटों की सं या बढ़कर 81 से 90 हुई थी। 1967 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 81 सीटों में से 48 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। 1968 में फिर विधानसभा चुनाव हुए और कांग्रेस ने 1967 का ही इतिहास दोहराया। 1972 में कांग्रेस ने 81 सीटों पर चुनाव लड़ा और 52 सीटें जीती थीं।
इस बार भी कांग्रेस अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही। इसके बाद कांग्रेस आपातकाल की आंधी में उड़ गई। 1982 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 90 सीटें पर ताल ठोकी, लेकिन 36 सीटें ही जीत पाई। भाजपा का अस्तित्व में आने के बाद यह पहला चुनाव था। जिसे उसने लोकदल के साथ मिलकर लड़ा था। इसमें भाजपा को छह और लोकदल को 31 सीटें मिली थीं।
इस बार भी कांग्रेस अपनी सरकार बनाने में कामयाब रही। इसके बाद कांग्रेस आपातकाल की आंधी में उड़ गई। 1982 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 90 सीटें पर ताल ठोकी, लेकिन 36 सीटें ही जीत पाई। भाजपा का अस्तित्व में आने के बाद यह पहला चुनाव था। जिसे उसने लोकदल के साथ मिलकर लड़ा था। इसमें भाजपा को छह और लोकदल को 31 सीटें मिली थीं।