क्या मोदी, शाह तोड़ पाएंगे 47 साल पुराना रिकॉर्ड?
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1967 में पंजाब से अलग होकर बने हरियाणा राज्य के समय हुए मतदान का रिकॉर्ड अब तक बरकरार है। अभी तक राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए 11 बार चुनाव हो चुके हैं, लेकिन पहली बार 72.65 फीसदी मतदान का रिकॉर्ड चार गुना मतदाताओं के बढ़ने के बावजूद नहीं टूट पाया है।
हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग का मानना है कि जिस तरह से लोकसभा चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर मतदान के औसत को 73 फीसदी के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाया है, उसी तरह विधानसभा चुनाव में भी मतदाता नया रिकॉर्ड बना सकते हैं।
वर्ष 2009 के चुनाव में मतदान रिकॉर्ड से सिर्फ 0.30 फीसदी पीछे रह गया था। तब से अब तक राज्य में मतदाताओं की संख्या 29.81 लाख तक बढ़ चुकी है। इस बार चुनाव में 1.60 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
खास बात यह है कि इन मतदाताओं में करीब आठ लाख ऐसे युवा मतदाता भी शामिल हैं, जो पहली बार विधानसभा चुनाव में वोट डालेंगे। चुनाव आयोग के जागरूकता अभियान और नए मतदाताओं का मतदान के प्रति रुझान वोटों के औसत को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
मोदी जैसी लहर तो मतदान बढ़ने की उम्मीद
हालांकि, चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाताओं की संख्या बढ़ने के आधार पर अधिक मतदान की उम्मीद नहीं की जा सकती। मतदान के प्रति लोगों का रुझान तभी बढ़ता है, जब उम्मीदवारों या उनकी पार्टियों के पास राज्य के समग्र विकास की ठोस नीति हो या फिर हाल के लोकसभा चुनाव में मोदी जैसी लहर हो।
क्योंकि कई बार ऐसा हुआ है कि मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बावजूद मतदान का औसत कम रहा। 1967 के पहले चुनाव के समय राज्य में मतदाताओं की संख्या 43.87 लाख थी, तब राज्य में 72.65 फीसदी रिकॉर्ड मतदान हुए थे, लेकिन एक साल बाद ही जब 1968 में यहां दोबारा विधानसभा चुनाव हुए तब राज्य की आबादी 1.64 लाख बढ़ने के बावजूद मतदान का औसत घटकर 57.26 फीसदी ही रह गया।
कमजोर मतदान का यह आंकड़ा अब तक के न्यूनतम मतदान का भी एक रिकॉर्ड है। वहीं 1972 में 70.46 फीसदी मतदान हुआ, लेकिन 1977 के चुनाव में मतदान का औसत एक बार फिर घटकर 64.46 फीसदी रह गया, जबकि 1982 के चुनाव में मतदान का औसत पांच फीसदी से ज्यादा बढ़कर 69.87 फीसदी तक पहुंच गया।
47 सालों में हो चुके 11 चुनाव
राज्य गठन के बाद से अब तक के 47 वर्षों में हो चुके 11 चुनावों में छह बार मतदान का औसत 70 फीसदी से ऊपर रहा है और दो बार 70 फीसदी से कुछ कम। ऐसा एक ही बार हुआ जब मतदान का औसत 60 फीसदी से नीचे रहा।
वर्ष 2000 के बाद विधानसभा चुनावों में हर बार मतदान का औसत डेढ़ से दो फीसदी बढ़ रहा है। इससे उम्मीद है कि इस बार चुनाव में मतदान का औसत 73 फीसदी तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड कायम कर सकता है क्योंकि वर्ष 2009 के चुनाव में यह औसत 72.35 फीसदी के स्तर तक पहुंच चुका है।
ऐसी उम्मीद इसलिए भी बनी है क्योंकि इससे पहले लोकसभा चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग करके मतदान का औसत 73 फीसदी के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचा दिया था।