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हरियाणा चुनाव: 18 साल बाद तिकोना मुकाबला

Thu, 14 Aug 2014 12:53 PM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 14 Aug 2014 12:53 PM IST
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Haryana Assembly Election 2014

हरियाणा विधानसभा की सियासी जंग में लंबे समय बाद त्रिकोणीय संघर्ष की सियासी बिसात बिछ चुकी है। इस बार कांग्रेस, इनेलो और भाजपा में सीधे मुकाबले होने के आसार हैं। हरियाणा जनहित कांग्रेस भी दम दिखाएगी। इसके अलावा दर्जन भर छोटे-छोटे दल भी चुनौती देने के लिए तैयार है। हालांकि इनमें से अधिकतर छोटे दल दूसरे का खेल बिगाड़ सकते हैं।

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संभावना जताई जा रही है कि चुनावी ‘महाभारत’ कांग्रेस, भाजपा और इनेलो के बीच होगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस हैट्रिक बनाने के दावे के साथ रणनीति तेज कर दी है। इनेलो को अपने परंपरागत वोट बैंक पर भरोसा है, जबकि लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 10 में से सात सीटें जीतने के बाद भाजपा अब आगामी चुनावी महासमर में भी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है।

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इस बार बिसात पर होगा कड़ा मुकाबला

Haryana Assembly Election 2014

कांग्रेस व इनेलो नेताओं के भाजपा का दामन थामने से साफ है कि इस चुनाव में भी वह कांग्रेस और इनेलो के लिए कड़ी चुनौती बन गई है। बीते विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और इनेलो के बीच हुआ था। हालांकि उस समय भाजपा और हजकां भी मैदान में थी, लेकिन विधायकों के संख्या बल मामले में दोनों ही दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाए थे।

भाजपा-हंजका गठबंधन को लेकर अभी संशय बना है। इसके कायम रहने पर यह गठबंधन त्रिकोणीय संघर्ष को और कड़ा कर देगा, जबकि टूटने पर हजकां की बजाए भाजपा ही मुख्य मुकाबले में रहेगी।

18 साल पहले हुआ था त्रिकोणीय संघर्ष

Haryana Assembly Election 2014

हरियाणा में इससे पहले 1996 के चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष हो चुका है। तब कांग्रेस ही सत्ता में थी। मुख्यमंत्री भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस का सीधा मुकाबला बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी और भाजपा गठबंधन तथा चौधरी देवीलाल -ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में समता पार्टी से हुआ था। इस चुनाव में हविपा और भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी। हालांकि बाद में भाजपा चौटाला के साथ चली गई।

छोटे दल काटेंगे वोट

इस बार दर्जनभर छोटे दल भी मैदान में होंगे। बसपा, एनसीपी सीपीआई, सीपीआईएम और शिअद जैसे प्रमुख दलों के अलावा प्रदेश स्तर के दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगे हैं। हजकां इनमें सबसे प्रमुख है। इनके अलावा विनोद शर्मा की जन चेतना पार्टी, गोपाल कांडा की हरियाणा लोकहित पार्टी, हरियाणा तृणमूल कांग्रेस और समस्त भारतीय पार्टी व आरपीआई (अठावले) भी चुनावी ताल ठोंकने जा रहे हैं।

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अधिकतर चुनाव में सीधा मुकाबला

Haryana Assembly Election 2014

प्रदेश की सियासत में कांग्रेस हमेशा ही प्रमुख पार्टी रही है। एक नवंबर 1966 में पंजाब से अलग होने के बाद अस्तित्व में आए हरियाणा में कांग्रेस के मुकाबले में भारतीय जनसंघ थीं। इसके बाद के चुनाव में कांग्रेस और राव वीरेंद्र सिंह की विशाल हरियाणा पार्टी में ही मुख्य मुकाबला रहा। 1972 में भी टक्कर कांग्रेस व नेशनल कांग्रेस आर्गेनाइजेशन में रही।

इमरजेंसी के बाद कांग्रेस बुरी तरह से हार गई और मुख्य मुकाबला जनता पार्टी और विशाल हरियाणा पार्टी में हुआ। इसके बाद 1982 में कांग्रेस और लोकदल तथा 1991 में कांग्रेस व जनता पार्टी आमने सामने थीं। वर्ष 2000, 2005 व 2009 के चुनाव में कांग्रेस और इनेलो सीधी टक्कर होती रही है। इसबार भाजपा भी मुख्य मुकाबले में आ गई है।

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