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ओपी धनखड़ और कैप्टन की गुगली पर करन दलाल हुए क्लीन बोल्ड, नेता प्रतिपक्ष भी फंसे
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 12 Sep 2018 09:53 AM IST
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अभय चौटाला
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हरियाणा विधानसभा के छोटे मगर हंगामेदार मानसून सत्र में सियायत के अनेक रंग देखने को मिले। सत्ता पक्ष और विपक्षी की ओर से जहां जमकर अमर्यादित टिप्पणियां हुईं, वहीं पागल, टट्टू, मुर्गीखाना जैसी शब्दावली का भी इस्तेमाल किया गया। विधानसभा प्रदेश हित में नए कानून बनाने और फैसले लेने के लिए जानी जाती है, उसमें अशोभनीय आचरण विधायिका पर भी सवाल खड़े करता है।
सत्र के अंतिम दिन जो सदन में हुआ उसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी। सत्र हंगामेदार रहेगा, यह पहले से तय था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष में चुनाव से पहले इतनी गहरी खाई पनपेगी, ये आभास तक नहीं था। कांग्रेस विधायक करण दलाल को सदन से निलंबित कराने में अहम भूमिका कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने निभाई। उनकी लगाई फील्डिंग के हिसाब से ही सत्ता पक्ष ने अटैक किया और धनखड़ के साथ कैप्टन की ओर से फेंकी गुगली पर करण दलाल बोल्ड हो गए। सत्ता पक्ष ने विपक्षी दल इनेलो को भी अपने चक्रव्यूह में फंसाया।
सत्ता पक्ष जब दलाल को निलंबित करने की पुरजोर मांग कर रहा था, तो मुख्य विपक्षी दल इनेलो शांत बैठा था। कार्यवाहक संसदीय कार्यमंत्री ने इस दौरान गेंद नेता प्रतिपक्ष चौटाला के पाले में फेंकी और निलंबन पर उनकी राय मांगी। चौटाला पहले ही दलाल से खुन्नस खाए हुए थे, चूंकि दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। चौटाला ने निलंबन का समर्थन किया और सरकार की मांग सिरे चढ़ गई।
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जिससे भाजपा और इनेलो का बड़ा कांटा विधानसभा से निकल गया। क्योंकि, पांचवीं बार विधायक बने दलाल मुखरता के साथ मुद्दे उठाकर सरकार और इनेलो को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। सदन में जब नौबत मारपीट तक पहुंची, उस समय सीएम मनोहर लाल सदन में मौजूद नहीं थे। जिससे उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था। अब सदन से बाहर इस मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के रुख पर निगाह रहेगी।
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सत्र के अंतिम दिन जो सदन में हुआ उसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी। सत्र हंगामेदार रहेगा, यह पहले से तय था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष में चुनाव से पहले इतनी गहरी खाई पनपेगी, ये आभास तक नहीं था। कांग्रेस विधायक करण दलाल को सदन से निलंबित कराने में अहम भूमिका कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने निभाई। उनकी लगाई फील्डिंग के हिसाब से ही सत्ता पक्ष ने अटैक किया और धनखड़ के साथ कैप्टन की ओर से फेंकी गुगली पर करण दलाल बोल्ड हो गए। सत्ता पक्ष ने विपक्षी दल इनेलो को भी अपने चक्रव्यूह में फंसाया।
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सत्ता पक्ष जब दलाल को निलंबित करने की पुरजोर मांग कर रहा था, तो मुख्य विपक्षी दल इनेलो शांत बैठा था। कार्यवाहक संसदीय कार्यमंत्री ने इस दौरान गेंद नेता प्रतिपक्ष चौटाला के पाले में फेंकी और निलंबन पर उनकी राय मांगी। चौटाला पहले ही दलाल से खुन्नस खाए हुए थे, चूंकि दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। चौटाला ने निलंबन का समर्थन किया और सरकार की मांग सिरे चढ़ गई।
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जिससे भाजपा और इनेलो का बड़ा कांटा विधानसभा से निकल गया। क्योंकि, पांचवीं बार विधायक बने दलाल मुखरता के साथ मुद्दे उठाकर सरकार और इनेलो को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। सदन में जब नौबत मारपीट तक पहुंची, उस समय सीएम मनोहर लाल सदन में मौजूद नहीं थे। जिससे उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था। अब सदन से बाहर इस मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के रुख पर निगाह रहेगी।
सदन की मर्यादा तोड़ना अच्छी बात नहीं : सीएम
कांग्रेस विधायक करण दलाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सदन की मर्यादा का उल्लंघन करने की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व होता है। सदन की जो मर्यादाएं तोड़ी गई हैं वह अच्छी बात नहीं है।
दलाल की टिप्पणी से पूरे प्रदेश को पहुंचा आघात : चौटाला
नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने कहा कि कांग्रेस विधायक करण दलाल की टिप्पणी से सत्ता पक्ष ही नहीं, पूरे प्रदेश को आघात पहुंचा। उनकी भाषा माफी लायक नहीं है। उन्हें निलंबित करने के प्रस्ताव का वह समर्थन करते हैं। चौटाला ने कहा कि दलाल ने अपनी सीट पर बैठे-बैठे उनकी तरफ आपत्तिजनक इशारा किया और अपशब्द कहे, जिससे वह बेहद आहत हुए और उनके सब्र का बांध टूटा।
सदन का व्यवहार गरिमापूर्ण नहीं, दलाल को स्पष्टीकरण का नहीं मिला मौका : हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सदन में सरकार और मुख्य विपक्षी दल का व्यवहार भी गरिमापूर्ण नहीं है। वह किसी को दोषी और निर्दोष साबित नहीं कर रहे, लेकिन करण दलाल को स्पष्टीकरण देने का मौका नहीं मिला। अगर दलाल ने प्रदेश को कलंकित कहा तो उनकी व पार्टी की तरफ से वह माफी मांगते हैं। बिना मौका दिए निलंबित करना सदस्य के अधिकारों का हनन है।
मातृभूमि को गाली सहन नहीं करेंगे : धनखड़
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा कि ये लोग सदन में रोजाना गालियां देते हैं, इन्होंने हमारी पार्टी को गाली तक दी। हम शांत रहे, लेकिन कोई मातृभूमि को गाली देगा तो सहन नहीं करेंगे। कैप्टन ने भी करण दलाल को आड़े हाथों लिया व उनकी भाषा को अमर्यादित बताया।
आचरण सुधारो, नहीं तो सदन में बैठना होगा मुश्किल : कंवर पाल
स्पीकर कंवर पाल सदन में हुए घटनाक्रम से बेहद आहत दिखे। उन्होंने कहा कि अगर इज्जत चाहिए तो सभी को संयमित व अच्छी भाषा का इस्तेमाल करना होगा। अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मत मारो। सदन में आचरण सुधारो वरना विधानसभा में बैठना मुश्किल हो जाएगा।
दलाल की टिप्पणी से पूरे प्रदेश को पहुंचा आघात : चौटाला
नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने कहा कि कांग्रेस विधायक करण दलाल की टिप्पणी से सत्ता पक्ष ही नहीं, पूरे प्रदेश को आघात पहुंचा। उनकी भाषा माफी लायक नहीं है। उन्हें निलंबित करने के प्रस्ताव का वह समर्थन करते हैं। चौटाला ने कहा कि दलाल ने अपनी सीट पर बैठे-बैठे उनकी तरफ आपत्तिजनक इशारा किया और अपशब्द कहे, जिससे वह बेहद आहत हुए और उनके सब्र का बांध टूटा।
सदन का व्यवहार गरिमापूर्ण नहीं, दलाल को स्पष्टीकरण का नहीं मिला मौका : हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सदन में सरकार और मुख्य विपक्षी दल का व्यवहार भी गरिमापूर्ण नहीं है। वह किसी को दोषी और निर्दोष साबित नहीं कर रहे, लेकिन करण दलाल को स्पष्टीकरण देने का मौका नहीं मिला। अगर दलाल ने प्रदेश को कलंकित कहा तो उनकी व पार्टी की तरफ से वह माफी मांगते हैं। बिना मौका दिए निलंबित करना सदस्य के अधिकारों का हनन है।
मातृभूमि को गाली सहन नहीं करेंगे : धनखड़
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा कि ये लोग सदन में रोजाना गालियां देते हैं, इन्होंने हमारी पार्टी को गाली तक दी। हम शांत रहे, लेकिन कोई मातृभूमि को गाली देगा तो सहन नहीं करेंगे। कैप्टन ने भी करण दलाल को आड़े हाथों लिया व उनकी भाषा को अमर्यादित बताया।
आचरण सुधारो, नहीं तो सदन में बैठना होगा मुश्किल : कंवर पाल
स्पीकर कंवर पाल सदन में हुए घटनाक्रम से बेहद आहत दिखे। उन्होंने कहा कि अगर इज्जत चाहिए तो सभी को संयमित व अच्छी भाषा का इस्तेमाल करना होगा। अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मत मारो। सदन में आचरण सुधारो वरना विधानसभा में बैठना मुश्किल हो जाएगा।