Haryana: सहकारिता विभाग में 100 करोड़ के घोटाले में 10 अधिकारियों समेत 14 आरोपी गिरफ्तार, ACB ने की कार्रवाई
सहकारिता विभाग हरियाणा द्वारा एकीकृत सहकारी विकास परियोजना संचालित की जा रही है। इस परियोजना के तहत ग्रामीण तथा कृषि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करते हुए विकास कार्य करवाए जाते हैं और सहकारी समितियों को विकसित किया जाता है। इसी में घोटाला हुआ है।
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हरियाणा सहकारिता विभाग की ओर से संचालित एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) में 100 करोड़ रुपये का घोटाले का खुलासा हुआ है। घोटाले में शामिल सहकारिता विभाग के सहायक रजिस्ट्रार, सहकारी समिति के जिला रजिस्ट्रार और ऑडिटर ने मिलीभगत कर गोदाम व भवन का निर्माण कराए बिना ही फर्जी बिलों से राशि का भुगतान करा लिया। उसके बाद इस राशि से आरोपियों ने फ्लैट और जमीन भी खरीद ली।
हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में 10 अधिकारियों समेत 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से चार लोगों को 31 जनवरी से एक फरवरी के बीच गिरफ्तार किया गया है। एसीबी मामले की जांच कर रही है। जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वहीं, इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी नजरें गढ़ा ली है। ईडी भी इस मामले की जांच शुरू कर सकती है। अमर उजाला ने 17 मई 2023 के अंक में सबसे पहले इस घोटाले की परतों को खोला था।
सहकारिता विभाग ने 2018 में प्रदेश के पांच जिलों (रेवाड़ी, करनाल, पानीपत, कैथल व अंबाला) में आईसीडीपी के तहत निर्माण कार्य शुरू कराए थे। इसके तहत सहकारी समितियों की सहायता और सुविधा के लिए भवन निर्माण, फर्नीचर, गोदाम का निर्माण होना था। इसके लिए नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एनसीडीसी) और हरियाणा सरकार की ओर से 50-50 फीसदी राशि दी गई थी।
अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत कर काम किए बिना ही फर्जी बिलों से भुगतान ले लिया। खास बात ये है कि विभाग के ऑडिटर तक इस भ्रष्टाचार में शामिल थे। 2021 में एक शिकायत के बाद एसीबी ने जांच शुरू की थी। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ करनाल और अंबाला रेंज में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
बीते दो दिन में गिरफ्तार किए गए चार आरोपी
इस घोटाले में संलिप्त छह राजपत्रित अधिकारियों, आईसीडीपी रेवाड़ी के चार अन्य अधिकारियों और चार निजी व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई है। इन आरोपियों में ऑडिट ऑफिसर बलविंदर, डिप्टी चीफ ऑडिटर योगेंद्र अग्रवाल, कृष्ण बेनीवाल को गिरफ्तार किया है। इसी प्रकार इसी विभाग के आईडीपी रेवाड़ी के लेखाकार सुमित अग्रवाल, विकास अधिकारी नितिन शर्मा और विजय सिंह की गिरफ्तारी की गई है। चार निजी व्यक्तियों स्तालिन जीत, नताशा कौशिक, सुभाष और रेखा को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में करनाल और कैथल एसीबी ने चार आरोपितों को 31 जनवरी से एक फरवरी के बीच गिरफ्तार किया। इनमें करनाल की सहकारी समिति के जिला रजिस्टर रोहित गुप्ता, पानीपत की सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समिति (एआरसीएस) अनु कोशिश, रामकुमार और कैथल के अतिरिक्त रजिस्ट्रार जितेंद्र कौशिक शामिल हैं।
रोहित गुप्ता को 31 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। एक दिन की रिमांड के बाद अब उसे जेल भेजा जा चुका है। अनु कोशिश, राम कुमार और जितेंद्र कौशिक को गुरुवार रात गिरफ्तार किया गया। इन तीनों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से अनु कोशिश को एक दिन और राम कुमार व जितेंद्र कौशिक को दो दिन के रिमांड पर भेज दिया गया।
पांच साल से महाप्रबंधक की जिम्मेदारी संभाल रहा था जितेंद्र कौशिक
जितेंद्र कौशिक को कैथल एसीबी की टीम ने गुरुवार रात यमुनानगर के एक ढाबे से गिरफ्तार किया। एकीकृत सहकारी विकास परियोजना के तहत केंद्र सरकार ने 2021-2022 में जिले के लिए 4 करोड़ 40 लाख रुपये की ग्रांट दी थी। जितेंद्र कौशिक 2019 से बतौर अतिरिक्त रजिस्ट्रार कार्यरत था और करीब पांच साल से समिति के महाप्रबंधक की भी जिम्मेदारी संभाल रहा था।
जितेंद्र कौशिक ने कितनी राशि का घोटाला किया है, अभी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस मामले में जिले में एक और आरोपी है, जो फरार है। उसकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार दबिश दी जा रही है। एसीबी के इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि अंबाला थाने में वर्ष 2021 में दर्ज मामले में जितेंद्र कौशिक की गिरफ्तारी हुई है।
भ्रष्टाचारी चाहे कोई भी, किसी भी विभाग का क्यों ना हो, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होना तय है। एंटी करप्शन ब्यूरो पूरी पारदर्शिता व निष्पक्षता के साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए वचनबद्ध है और आगे भी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। सहकारिता विभाग वाले मामले में सभी सबूत जुटाते हुए गहनता से जांच की जा रही है। शत्रुजीत कपूर, महानिदेशक, हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो।