Asian Games 2023: बेटी हरमिलन बैंस ने चीन में दो रजत पदक जीते, पिता ने पंजाब सरकार की कमियां गिना दीं
बेटी हरमिलन बैंस के प्रदर्शन से पिता अमनदीप सिंह बहुत खुश हैं लेकिन उन्हें इस बात का मलाल भी है कि 21 साल पहले हरमिलन की माता माधुरी ने एशियाई खेलों में पदक जीता था। अब हरमिलन के पदक जीतने के बाद होशियारपुर में कुछ भी नहीं बदला है।
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पंजाब के होशियारपुर जिले के माहिलपुर कस्बे की एथलीट हरमिलन बैंस ने बुधवार को चीन में आयोजित एशियाई खेलों में 800 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर 21 साल बाद इतिहास को दोहराया है। इससे पहले उनकी मां माधुरी सिंह ने साल 2002 में बुसान एशियाई खेलों में 800 मीटर में रजत पदक जीता था। वहीं हरमिलन बैंस ने 1500 मीटर की दौड़ में भी रजत पदक जीता है।
काबिले जिक्र है कि उनके पिता अमनदीप सिंह ने 1996 में एसएएफ (साउथ एशियन फेडरेशन) खेलों में 1500 मीटर में रजत पदक जीता था जबकि उनकी माता माधुरी ने भी 2004 में पाकिस्तान में आयोजित एसएएफ खेलों में 1500 मीटर और 800 मीटर में भी स्वर्ण पदक जीता था। हरमिलन पंजाब की एकमात्र महिला एथलीट हैं जिन्होंने भारतीय एशियाई खेलों के दल में अपनी जगह बनाई। साथ ही वह दो स्पर्धाओं के लिए क्वालिफाई करने वाली भारत की एकमात्र महिला एथलीट हैं।
अमनदीप ने बताया कि पदक जीतने के बाद हरमिलन से वीडियो कॉल पर बात हुई और उसने खुशी जताते हुए कहा कि एक रजत पदक घर पर रखा है और दो वह लेकर आ रही हैं। हरमिलन के मुताबिक दौड़ के दौरान सह प्रतिभागियों ने लगातार उसे ब्लाक किए रखा ताकि वह आगे न निकलने पाए लेकिन इसके बावजूद संघर्ष से सफलता पाई हालांकि वह स्वर्ण से चूक गईं।
बेटी हरमिलन बैंस के प्रदर्शन से पिता अमनदीप सिंह बहुत खुश हैं लेकिन उन्हें इस बात का मलाल भी है कि 21 साल पहले हरमिलन की माता माधुरी ने एशियाई खेलों में पदक जीता था। अब हरमिलन के पदक जीतने बाद होशियारपुर में कुछ भी नहीं बदला है। माधुरी के पदक जीतने के बाद से वह प्रयास करते आ रहे हैं कि होशियारपुर में एथलेटिक्स का ट्रैक स्थापित हो लेकिन आज तक यह नहीं हो पाया।
हरमिलन को अपनी प्रैक्टिस में आई दिक्कतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि होशियारपुर में से एथलीट तो बहुत नामी निकले हैं लेकिन यहां आज तक एथलेटिक्स ट्रैक नहीं है। यही नहीं कोरोना के दौरान तो केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश के प्रयासों के बाद ही उन्हें हिमाचल के धर्मशाला के स्टेडियम में प्रैक्टिस करने की इजाजत मिल पाई थी।
अमनदीप जहां इस बात को लेकर खुश थे कि हरमिलन ने कड़ी मेहनत के बाद यह सफलता हासिल की है, वहीं उन्हें इस बात की नाराजगी भी थी कि पंजाब सरकार ने खिलाड़ियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि घटा दी है। पहले यह स्वर्ण पदक विजेता के लिए एक करोड़ रुपये थी लेकिन 30 सितंबर को मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार स्वर्ण पदक विजेता को 70 लाख रुपये देगी।
उन्होंने कहा कि जहां चंडीगढ़ में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वालों को क्रमश: 2, डेढ़ और एक करोड़ देने का प्रावधान है और हरियाणा में भी लगभग इतनी ही प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं यूपी में यह राशि तीन, दो और एक करोड़ है लेकिन सबसे अमीर सूबा कहलाने वाले पंजाब में इसके मुकाबले आधी राशि भी नहीं है।
यही नहीं पंजाब सरकार राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भी स्वर्ण जीतने पर 70 हजार रुपये देती थी लेकिन अब उसे भी घटाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है। यही नहीं अगर खिलाड़ी दो या तीन राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में भी स्वर्ण पदक जीत ले तो उसे पुरस्कार एक ही दिया जाता है। अमनदीप का कहना है कि पंजाब सरकार को खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार राशि बढ़ाने के साथ-साथ सुविधाएं प्रदान करने पर भी ध्यान देना चाहिए।