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पंजाब: कैप्टन ने दिया भाजपा से गठबंधन का संकेत, हरीश बोले- लगता अपने अंदर के 'धर्मनिरपेक्ष अमरिंदर' को मार डाला

Wed, 20 Oct 2021 02:43 PM IST
ajay kumar एएनआई, चंडीगढ़
एएनआई, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 20 Oct 2021 02:43 PM IST
सार

अमरिंदर सिंह के नई पार्टी बनाने का एलान करते ही पंजाब में सियासी भूचाल आ गया। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत को भी अपनी प्रतिक्रिया देनी पड़ी। रावत ने कहा कि कैप्टन के फैसले से कांग्रेस को नुकसान नहीं होगा। इससे विपक्षी दलों के मतों का बंटवारा होगा। 

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Harish rawat attack on Punjab former CM Capt Amarinder Singh
हरीश रावत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह नया राजनीतिक दल बनाएंगे। नवंबर में पार्टी का एलान करेंगे। कैप्टन ने भाजपा के साथ भी गठबंधन का संकेत दिया। इस पर कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने बड़ा बयान दिया।

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रावत ने कहा कि कैप्टन के पार्टी बनाने से कांग्रेस का कोई नुकसान नहीं होगा। वास्तव में हमारे प्रतिद्वंद्वियों के मतों का विभाजन होगा। कांग्रेस प्रभावित नहीं होगी। रावत ने कहा कि कांग्रेस का वोट चन्नी सरकार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। जिस तरह से चन्नी ने शुरुआत की है, उन्होंने पंजाब और पूरे देश के सामने एक अच्छी छाप छोड़ी है।
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भाजपा को कौन माफ करेगा
हरीश रावत ने कहा कि 10 महीने तक किसानों को सरहदों पर रखने वाली भाजपा को कौन माफ कर सकता है? जिस तरह से किसानों के आंदोलन से निपटा गया है, क्या पंजाब उन्हें माफ कर सकता है? भाजपा को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह का बयान चौंकाने वाला है। ऐसा लगता है कि उन्होंने अपने भीतर के 'धर्मनिरपेक्ष अमरिंदर' को मार डाला है। अगर वह धर्मनिरपेक्षता के प्रति अपनी पुरानी प्रतिबद्धता पर कायम नहीं रह सकते तो उन्हें (अमरिंदर सिंह) कौन रोक सकता है? उन्हें 'सर्वधर्म संभव' का प्रतीक माना जाता था और लंबे समय तक कांग्रेस की परंपराओं से जुड़े रहे। अगर वह जाना चाहते हैं तो उन्हें जाना चाहिए।

कैप्टन ने ट्वीट कर इरादा किया स्पष्ट
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अगले माह अपनी नई सियासी पार्टी के गठन की बात ट्वीट कर इरादा भी स्पष्ट कर दिया। कैप्टन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि जब तक मैं अपने लोगों और अपने राज्य का भविष्य सुरक्षित नहीं कर लेता, तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा। पंजाब को राजनीतिक स्थिरता और आंतरिक और बाहरी खतरों से सुरक्षा की जरूरत है। मैं अपने लोगों से वादा करता हूं कि इसकी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मैं वह करूंगा जो आज दांव पर है।


सिद्धू को एकांतवास से निकाला था रावत ने
हरीश रावत को कांग्रेस हाईकमान ने उस समय पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया था, जब नवजोत सिद्धू और कैप्टन के बीच खींचतान चरम पर थी। कैप्टन द्वारा मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान सिद्धू से स्थानीय निकाय विभाग वापस लेने पर दोनों नेताओं के बीच विवाद गहरा गया था। सिद्धू ने कैप्टन का फैसला बदलवाने के लिए दिल्ली के कई चक्कर लगाए, लेकिन हाईकमान का साथ न मिलता देख सिद्धू एकांतवास में चले गए थे। हरीश रावत ने पंजाब की कमान संभालते ही लंबे एकांतवास से सिद्धू को बाहर निकाला और पंजाब कांग्रेस में सक्रिय किया था।  

न सिद्धू-कैप्टन विवाद सुलझा सके और न सिद्धू-चन्नी विवाद
हरीश रावत ने सिद्धू को सूबे की सक्रिय राजनीति में लौटाकर हाईकमान की शाबाशी लेने की कोशिश की थी, लेकिन सिद्धू को आगे लाने का उनका प्रयास उस समय पार्टी को भारी पड़ गया जब सिद्धू के साथ विवाद के चलते ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और पार्टी को अलविदा कहने का एलान कर दिया। इसके बाद भी रावत सिद्धू की पैरवी और बचाव में जुटे रहे, लेकिन रावत की मुश्किल उस समय बढ़ गईं जब सिद्धू का नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से भी विवाद हो गया। अब रावत जहां सिद्धू का बचाव कर रहे थे, वहीं चन्नी का भी पक्ष ले रहे थे। बावजूद इसके वह सिद्धू-चन्नी विवाद सुलझा पाने की नाकामी से खुद को बचा नहीं पाए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाईकमान रावत को पंजाब के प्रभार से अलग करने का पहले ही मन बना चुका है क्योंकि हाईकमान का मानना है कि रावत न तो सिद्धू-कैप्टन विवाद को सही तरीके से हल कर सके और न ही सिद्धू-चन्नी विवाद को उभरने से रोक पाए हैं।
 

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