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महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में मिलेगी बहुत बड़ी सुविधा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 14 Mar 2016 02:50 PM IST
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हेल्थ, कैंसर
- फोटो : फाइल फोटो
सरकारी अस्पतालों की गायनी ओपीडी में महिलाओं को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। जांच के साथ-साथ जागरूक भी किया जाएगा। दरअसल, सरकारी अस्पतालों की गायनी ओपीडी में आने वाली 40 साल से अधिक की सभी महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर की फिजिकल जांच की जाएगी।
सभी महिलाओं को ब्रेस्ट व सरवाइकल कैंसर के लक्षणों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सेहत विभाग की प्रमुख सचिव विन्नी महाजन ने सिविल सर्जन कांफ्रेंस में इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर इस तरह के कैंसर चालीस साल से अधिक की महिलाओं मिलते हैं। ऐसी जांच से शुरुआती दौर में ही कैंसर की पहचान हो सकेगी। सरकारी अस्पतालों में आने वाली महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर की फिजिकल जांच की जाए। कैंसर का शक होने पर पूरी जांच करवाई जाए।
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सभी महिलाओं को ब्रेस्ट व सरवाइकल कैंसर के लक्षणों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सेहत विभाग की प्रमुख सचिव विन्नी महाजन ने सिविल सर्जन कांफ्रेंस में इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
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उन्होंने कहा कि आमतौर पर इस तरह के कैंसर चालीस साल से अधिक की महिलाओं मिलते हैं। ऐसी जांच से शुरुआती दौर में ही कैंसर की पहचान हो सकेगी। सरकारी अस्पतालों में आने वाली महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर की फिजिकल जांच की जाए। कैंसर का शक होने पर पूरी जांच करवाई जाए।
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महिलाओं में ब्रेस्ट व सरवाइकल कैंसर ज्यादा
हेल्थ, कैंसर
- फोटो : फाइल फोटो
महाजन ने कहा कि हाल ही में पीजीआई की ओर से कराई आबादी आधारित कैंसर रजिस्ट्री में खुलासा हुआ है कि पंजाब में कैंसर की समस्या दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा नहीं है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि महिलाओं में ब्रेस्ट व सरवाइकल कैंसर ज्यादा है। जबकि, पुरुषों में इसोफेगस, ओरल व प्रॉस्टेट कैंसर ज्यादा मिले हैं।
इसी रिपोर्ट पर सेहत विभाग ने महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर फिजिकल जांच करवाने का फैसला किया है। किसी भी महिला में लक्षण मिलने पर कैंसर फैलने से पहले इलाज संभव होगा। यह जांच महिलाओं की सहमति के बाद ही होगी। उन महिलाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा, जिनमें कैंसर की फेमिली हिस्ट्री है। इसके लिए सभी अस्पतालों में जागरूकता सामग्री पहुंचा दी जाएगी।
इसी रिपोर्ट पर सेहत विभाग ने महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर फिजिकल जांच करवाने का फैसला किया है। किसी भी महिला में लक्षण मिलने पर कैंसर फैलने से पहले इलाज संभव होगा। यह जांच महिलाओं की सहमति के बाद ही होगी। उन महिलाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा, जिनमें कैंसर की फेमिली हिस्ट्री है। इसके लिए सभी अस्पतालों में जागरूकता सामग्री पहुंचा दी जाएगी।
जैसे ही लक्षण दिखें, डॉक्टर को जरूर बतायें
हेल्थ, कैंसर
- फोटो : फाइल फोटो
महाजन ने डेंटल सर्जन्स को हिदायत दी कि आने वाले मरीजों को ओरल कैंसर के बारे में जागरूक करें, खतरे के निशान मिलने पर मरीज को आगे की जांच के लिए प्रेरित करें। कांफ्रेंस में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत आए फंड व उनकेइस्तेमाल की समीक्षा की गई। बचे हुए फंड सही ढंग से इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए।
आशा वर्करों का इनसेंटिव समय पर देने की हिदायत दी गई। महाजन ने कहा कि इमरजेंसी केदौरान पहले 24 घंटे मुफ्त इलाज की सुविधा का खास ध्यान रखा जाए। ईएसआई अस्पतालों में इलाज सुविधा की भी जांच की जाए। जिन अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों पर बोझ ज्यादा है। वहां पहले मेडिकल अफसरों से जांच के बाद ही स्पेशलिस्ट के पास मरीज भेजा जाए।
उन्होंने बताया कि 2015 में करीब दो करोड़ लोगों ने ओपीडी सुविधाओं का फायदा उठाया। उन्होंने बताया कि 345 डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, 200 और डॉक्टर नियुक्त करने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। सचिव हुसन लाल ने निर्देश दिए कि डॉक्टर जहां तक संभव हो, मरीजों को वही दवाएं लिखें, जो अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध हों। कांफ्रेंस में हेल्थ डायरेक्टर डॉ. एचएस बाली, परिवार भलाई डायरेक्टर डॉ. ऊषा बांसल भी मौजूद थे।
आशा वर्करों का इनसेंटिव समय पर देने की हिदायत दी गई। महाजन ने कहा कि इमरजेंसी केदौरान पहले 24 घंटे मुफ्त इलाज की सुविधा का खास ध्यान रखा जाए। ईएसआई अस्पतालों में इलाज सुविधा की भी जांच की जाए। जिन अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों पर बोझ ज्यादा है। वहां पहले मेडिकल अफसरों से जांच के बाद ही स्पेशलिस्ट के पास मरीज भेजा जाए।
उन्होंने बताया कि 2015 में करीब दो करोड़ लोगों ने ओपीडी सुविधाओं का फायदा उठाया। उन्होंने बताया कि 345 डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, 200 और डॉक्टर नियुक्त करने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। सचिव हुसन लाल ने निर्देश दिए कि डॉक्टर जहां तक संभव हो, मरीजों को वही दवाएं लिखें, जो अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध हों। कांफ्रेंस में हेल्थ डायरेक्टर डॉ. एचएस बाली, परिवार भलाई डायरेक्टर डॉ. ऊषा बांसल भी मौजूद थे।