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गुडिया मर्डर केस में सूरज सिंह की हिरासत में मौत मामले में दो डॉक्टर्स की हुई गवाही
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चंडीगढ़। हाई प्रोफाइल गुड़िया मर्डर केस में आरोपी सूरज सिंह की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में बुधवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान सूरज सिंह समेत अन्य आरोपियों का मेडिकल करने वाले दो डॉक्टरों अमित चौहान और सुनीश चौहान की गवाही हुई। दोनों डॉक्टर्स ने आरोपी पुलिस अफसरों के खिलाफ अपने बयान दर्ज कराए हैं। डॉक्टरों ने कहा कि पुलिस कस्टडी में लेने से पहले सूरज सिंह समेत अन्य आरोपियों के शरीर पर कोई निशान नहीं थे। डॉ. अमित चौहान ने अपने बयान में कहा कि कस्टडी में सूरज सिंह की मौत के बाद जब दोबारा मेडिकल किया गया तो गुड़िया मर्डर केस के आरोपियों के शरीर पर चोट के निशान थे, जो सात से दस दिन पुराने थे। उन सात से दस दिनों में सभी आरोपी लोकल पुलिस कस्टडी में थे। केस के तीन आरोपियों ने शिमला जेल में रहने के लिए याचिका दायर की थी। सीबीआई ने याचिका पर विरोध जताया है। अब सीबीआई एप्लीकेशन का रिप्लाई मामले की अगली सुनवाई पर फाइल करेगी। मामले की अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी। इस केस का ट्रायल शिमला से चंडीगढ़ की सीबीआई कोर्ट में ट्रांसफर हुआ है। केस में पुलिस अफसरों पर सूरज की पिटाई करने के आरोप हैं। बता दें कि इससे पहले सूरज सिंह के शव का पोस्टमार्टम करने वाले दो डॉक्टरों ने भी यही बयान दिया था कि सूरज सिंह की मौत पुलिस कस्टडी में पिटाई से हुई थी। जो निशान शव पर मिले, वह एक्सिडेंटल नहीं हो सकते।
क्या था मामला
शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक और पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था लेकिन कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को पुलिस कस्टडी में सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजीपी जाहुर एच. जैदी, एसपी डीबडब्ल्यू नेगी, ठियोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
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क्या था मामला
शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की स्टूडेंट 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक और पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था लेकिन कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को पुलिस कस्टडी में सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजीपी जाहुर एच. जैदी, एसपी डीबडब्ल्यू नेगी, ठियोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
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