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देखिए, कैसे GST से बदला आम आदमी का लाइफ स्टाइल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Oct 2017 09:07 AM IST
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- फोटो : File Photo
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जीएसटी ने आम आदमी की लाइफ स्टाइल भी बदल डाली है। मसलन जो पच्चीस हजार रुपये कमा रहा है उसके लिए अब खर्च 27 हजार रुपये तक हो चुका है। खर्च में पेट्रोल, डीजल और घरेलू सामान सभी कुछ आ गया है। हां, आने वाले समय में जरूर आम आदमी को राहत मिल सकेगी।
रिवर्स चार्ज
जीएसटी में समान्यता सप्लायर कंज्यूमर से चार्ज करता है और सरकार को जमा करवाता है। कुछ परिस्थितियों में जीएसटी की जिम्मेदारी सप्लायर पर न होकर वस्तु या सेवा लेने वाले व्यक्ति पर होती हैं। इसे ही रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म कहते हैं। रिवर्स चार्ज में क्रेता टैक्स का भुगतान विक्त्रस्ेता को न करके सीधा सरकार को जमा करवाता है। कुछ परिस्थितियों में आंशिक रिवर्स चार्ज भी होता है जिसमें कुछ भाग की जिम्मेदारी क्रेता और कुछ की विक्रेता पर होती है।
एचएसएन कोड
जीएसटी में हर प्रोडक्ट के लिए एचएसएन कोड निर्धारित है। इस कोड का मतलब है ‘हार्मोनाईस्ड सिस्टम ऑफ़ नॉमेनक्लेचर’। जीएसटी व्यवस्था के तहत बेची जा रही हर वस्तु के सही वर्गीकरण और उन पर लागू होने वाली टैक्स की दर को निश्चित करने के लिए यह कोड बनाए गए हैं। यह कोड 2 अंक, 4 अंक, 6 अंक और 8 अंक के हो सकते हैं। बेची जाने वाली हर वस्तु का एक अलग कोड तय किया गया है। हर वस्तु पर टैक्स की दर अलग है इसी वजह से टैक्स रेट के विवाद से बचने के लिए विभिन्न वस्तुओं के दो हजार कोड बनाए गए हैं।
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रिवर्स चार्ज
जीएसटी में समान्यता सप्लायर कंज्यूमर से चार्ज करता है और सरकार को जमा करवाता है। कुछ परिस्थितियों में जीएसटी की जिम्मेदारी सप्लायर पर न होकर वस्तु या सेवा लेने वाले व्यक्ति पर होती हैं। इसे ही रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म कहते हैं। रिवर्स चार्ज में क्रेता टैक्स का भुगतान विक्त्रस्ेता को न करके सीधा सरकार को जमा करवाता है। कुछ परिस्थितियों में आंशिक रिवर्स चार्ज भी होता है जिसमें कुछ भाग की जिम्मेदारी क्रेता और कुछ की विक्रेता पर होती है।
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एचएसएन कोड
जीएसटी में हर प्रोडक्ट के लिए एचएसएन कोड निर्धारित है। इस कोड का मतलब है ‘हार्मोनाईस्ड सिस्टम ऑफ़ नॉमेनक्लेचर’। जीएसटी व्यवस्था के तहत बेची जा रही हर वस्तु के सही वर्गीकरण और उन पर लागू होने वाली टैक्स की दर को निश्चित करने के लिए यह कोड बनाए गए हैं। यह कोड 2 अंक, 4 अंक, 6 अंक और 8 अंक के हो सकते हैं। बेची जाने वाली हर वस्तु का एक अलग कोड तय किया गया है। हर वस्तु पर टैक्स की दर अलग है इसी वजह से टैक्स रेट के विवाद से बचने के लिए विभिन्न वस्तुओं के दो हजार कोड बनाए गए हैं।
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लंबे समय में होगा ट्रेडर को लाभ
जीएसटी
- फोटो : SOCIAL MEDIA
लंबे समय में होगा ट्रेडर को लाभ
सीए केशव गर्ग के अनुसार अब तक चालीस फीसदी आधार ही पैन कार्ड से लिंक हैं। जब सरकार ने 31 दिसंबर तक का समय दिया तो ज्यादातर लोगों ने इसे लिंक करना शुरू करवाया है। ऐसा नहीं है कि रेट्स को लेकर सरकार सजग नहीं है। जीएसटी काउंसिल ने 66 आइटम के रेट्स को कम किया है।
सर्वर डाउन की समस्या
ज्यादातर व्यापारियों ने कहा कि रिटर्न फाइल करने में सर्वर की समस्या है। ऐसे में सरकार को डेट्स को बढ़ाना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि यदि व्यापारी पर पेनल्टी लगाई जा रही है तो सर्वर डाउन होने पर इसके लिए जिम्मेदार को क्यों छोड़े।
व्यापारी और आम आदमी के लिए बनाएं कमेटी
कुछ व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी की पेचीदगी को देखते हुए एक कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। जिसमें व्यापारिक संगठन, सीए और अन्य आर्थिक विश्लेषक होने चाहिए। इसका एक हेल्पलाइन नंबर होना चाहिए जिसमें कोई भी काल करके जानकारी ले सके।
सीए केशव गर्ग के अनुसार अब तक चालीस फीसदी आधार ही पैन कार्ड से लिंक हैं। जब सरकार ने 31 दिसंबर तक का समय दिया तो ज्यादातर लोगों ने इसे लिंक करना शुरू करवाया है। ऐसा नहीं है कि रेट्स को लेकर सरकार सजग नहीं है। जीएसटी काउंसिल ने 66 आइटम के रेट्स को कम किया है।
सर्वर डाउन की समस्या
ज्यादातर व्यापारियों ने कहा कि रिटर्न फाइल करने में सर्वर की समस्या है। ऐसे में सरकार को डेट्स को बढ़ाना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि यदि व्यापारी पर पेनल्टी लगाई जा रही है तो सर्वर डाउन होने पर इसके लिए जिम्मेदार को क्यों छोड़े।
व्यापारी और आम आदमी के लिए बनाएं कमेटी
कुछ व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी की पेचीदगी को देखते हुए एक कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। जिसमें व्यापारिक संगठन, सीए और अन्य आर्थिक विश्लेषक होने चाहिए। इसका एक हेल्पलाइन नंबर होना चाहिए जिसमें कोई भी काल करके जानकारी ले सके।