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GST की नई दरों के 6 ऐसे सच आए सामने, शायद लोगों को बताए नहीं गए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 09 Oct 2017 09:11 AM IST
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Chandigarh GST
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100 दिन के बाद मोदी सरकार ने जीएसटी की दरों में अहम बदलाव किए, अब इस फैसले का असली सच सामने आया है। वो भी ऐसा, जिसके बारे में किसी ने भी सोचा न होगा। कारोबारी केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी की नई दरों पर टैक्स वसूली को देरी से उठाया कदम बता रहे हैं।
फेस्टिवल सीजन है और इसे सोने की खरीद का समय भी माना जाता है। यहां सरकार द्वारा बरती उदारता से सुस्त हो चले सेक्टर को तेजी मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा कपड़ों से लेकर विभिन्न खाद्य पदार्थों और निर्यात सेक्टर में भी सुधार आने की बात चंडीगढ़ के विशेषज्ञ बता रहे हैं।
अमर उजाला ने प्रमुख सेक्टर्स का विश्लेषण अपने पैनल से करवाया है। इसमें जिस तरह के आकलन सामने आए, उन पर यह विशेष रिपोर्ट।
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फेस्टिवल सीजन है और इसे सोने की खरीद का समय भी माना जाता है। यहां सरकार द्वारा बरती उदारता से सुस्त हो चले सेक्टर को तेजी मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा कपड़ों से लेकर विभिन्न खाद्य पदार्थों और निर्यात सेक्टर में भी सुधार आने की बात चंडीगढ़ के विशेषज्ञ बता रहे हैं।
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अमर उजाला ने प्रमुख सेक्टर्स का विश्लेषण अपने पैनल से करवाया है। इसमें जिस तरह के आकलन सामने आए, उन पर यह विशेष रिपोर्ट।
Chandigarh GST
पैन नहीं, सिर्फ पहचान पत्र लेने की प्रक्रिया हुई है समाप्त
बदलाव : 2 लाख रुपये तक के मूल्यवान धातु और रत्नों के आभूषण खरीदने पर ग्राहकों को पैन नंबर नहीं बताना होगा, मनी लॉड्रिंग एक्ट में 23 अगस्त से यह सीमा 50 हजार रुपये कर दी गई थी।
असर : 123.5 टन सोना भारत ने जनवरी से मार्च 2017 के दौरान आयात किया। यह हर साल 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। वहीं चंडीगढ़ में में त्योहारों के इस समय में 560 करोड़ रुपये का सोना बिक जाता था। बताया जाता है कि नियम के इंट्रोड्यूस होने के बाद से इसमें करीब 50 फीसदी की गिरावट है। अब इस नियम के बाद यह कम होगी। उधर, पैन नंबर लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आया है।
आभूषण विक्रेताओं का कहना है कि पहले भी दो लाख से ऊपर तक के सोने के आभूषण की खरीददारी करने वालों से पैन नंबर मांगा जाता था और अब भी वैसा ही है जबकि 50 हजार से दो लाख की खरीददारी करने वालों को सिर्फ कोई भी पहचान पत्र(आधार कार्ड, लाइसेंस एवं अन्य) की फोटो कापी देनी होती है। अब केंद्र सरकार ने नए फैसले में अब सिर्फ यह पहचान पत्र लेने की प्रक्रिया पर छूट दी गई है।
चंडीगढ़ ज्वैलर्स एसोसिएशन के महासचिव संजय सहगल का कहना है कि पैन नंबर की फोटो कापी लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आया है। सिर्फ 50 हजार से दो लाख तक के सोने के आभूषण खरीदने वालों को पहचान पत्र की प्रति नहीं देनी होगी। सहगल का कहना है कि दो लाख से नीचे वालों से पैन नंबर लेने का पहले भी कोई प्रावधान नहीं था।
बदलाव : 2 लाख रुपये तक के मूल्यवान धातु और रत्नों के आभूषण खरीदने पर ग्राहकों को पैन नंबर नहीं बताना होगा, मनी लॉड्रिंग एक्ट में 23 अगस्त से यह सीमा 50 हजार रुपये कर दी गई थी।
असर : 123.5 टन सोना भारत ने जनवरी से मार्च 2017 के दौरान आयात किया। यह हर साल 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। वहीं चंडीगढ़ में में त्योहारों के इस समय में 560 करोड़ रुपये का सोना बिक जाता था। बताया जाता है कि नियम के इंट्रोड्यूस होने के बाद से इसमें करीब 50 फीसदी की गिरावट है। अब इस नियम के बाद यह कम होगी। उधर, पैन नंबर लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आया है।
आभूषण विक्रेताओं का कहना है कि पहले भी दो लाख से ऊपर तक के सोने के आभूषण की खरीददारी करने वालों से पैन नंबर मांगा जाता था और अब भी वैसा ही है जबकि 50 हजार से दो लाख की खरीददारी करने वालों को सिर्फ कोई भी पहचान पत्र(आधार कार्ड, लाइसेंस एवं अन्य) की फोटो कापी देनी होती है। अब केंद्र सरकार ने नए फैसले में अब सिर्फ यह पहचान पत्र लेने की प्रक्रिया पर छूट दी गई है।
चंडीगढ़ ज्वैलर्स एसोसिएशन के महासचिव संजय सहगल का कहना है कि पैन नंबर की फोटो कापी लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आया है। सिर्फ 50 हजार से दो लाख तक के सोने के आभूषण खरीदने वालों को पहचान पत्र की प्रति नहीं देनी होगी। सहगल का कहना है कि दो लाख से नीचे वालों से पैन नंबर लेने का पहले भी कोई प्रावधान नहीं था।
gst
प्लास्टिक से रिसाइकिल करने वालों को लाभ नहीं
बदलाव : प्लास्टिक और वेस्ट पर 18 प्रतिशत जीएसटी था, इसे पांच प्रतिशत किया है। हार्ड रबर पर 28 से और कागज की रद्दी पर 12 प्रतिशत से पांच प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट पर भी जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है।
असर : चंडीगढ़ में औसतन 71 लाख टन मीट्रिक टन सालिड वेस्ट निकलता है। इसमें बड़ा हिस्सा प्लास्टिक, रबर और कागज की रद्दी है। इसमें से यहां प्लास्टिक को रिसाइकिल किया जाता है।
प्लास्टिक के कारोबार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि वेस्ट कोरिसाइकिल करने वाली इंडस्ट्री का कोई फायदा नहीं है क्योंकि रिसाइकिल करने वाले कारोबारी प्लास्टिक वेस्ट स्क्रैप (कबाड़ी) का कारोबार वालों से 5 प्रतिशत जीएसटी पर खरीदेगा मगर रिसाइकिल करने के बाद जो दाना (प्लास्टिक का निर्माण करने की सामग्री) बनाकर आगे फैक्ट्री मालिक को बेचेगा उस पर 18 प्रतिशत ही जीसएसटी चार्ज करेगा
ऐसे में इसका फायदा ग्राहक को नहीं मिलेगा। इसका फायदा स्क्रैप का कारोबार करने वालों को है, जो पहले 18 प्रतिशत जीएसटी पर वेस्ट खरीदते थे अब वह 5 प्रतिशत पर खरीदेंगे। प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जरनैल सिंह का कहना है कि प्लास्टिक से अलग अलग सामान निर्माण कर बेचने वालों को कोई फायदा नहीं है। निर्माण करने केलिए जो प्लास्टिक का दाना खरीदा जाएगा उस पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा।
बदलाव : प्लास्टिक और वेस्ट पर 18 प्रतिशत जीएसटी था, इसे पांच प्रतिशत किया है। हार्ड रबर पर 28 से और कागज की रद्दी पर 12 प्रतिशत से पांच प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट पर भी जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है।
असर : चंडीगढ़ में औसतन 71 लाख टन मीट्रिक टन सालिड वेस्ट निकलता है। इसमें बड़ा हिस्सा प्लास्टिक, रबर और कागज की रद्दी है। इसमें से यहां प्लास्टिक को रिसाइकिल किया जाता है।
प्लास्टिक के कारोबार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि वेस्ट कोरिसाइकिल करने वाली इंडस्ट्री का कोई फायदा नहीं है क्योंकि रिसाइकिल करने वाले कारोबारी प्लास्टिक वेस्ट स्क्रैप (कबाड़ी) का कारोबार वालों से 5 प्रतिशत जीएसटी पर खरीदेगा मगर रिसाइकिल करने के बाद जो दाना (प्लास्टिक का निर्माण करने की सामग्री) बनाकर आगे फैक्ट्री मालिक को बेचेगा उस पर 18 प्रतिशत ही जीसएसटी चार्ज करेगा
ऐसे में इसका फायदा ग्राहक को नहीं मिलेगा। इसका फायदा स्क्रैप का कारोबार करने वालों को है, जो पहले 18 प्रतिशत जीएसटी पर वेस्ट खरीदते थे अब वह 5 प्रतिशत पर खरीदेंगे। प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जरनैल सिंह का कहना है कि प्लास्टिक से अलग अलग सामान निर्माण कर बेचने वालों को कोई फायदा नहीं है। निर्माण करने केलिए जो प्लास्टिक का दाना खरीदा जाएगा उस पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा।
जीएसटी
- फोटो : SOCIAL MEDIA
ई-वे बिल खत्म
बदलाव : चंडीगढ़ देश के उन कुछ राज्यों में था जहां ट्रांसपोर्टर्स के लिए ई वे बिल की व्यवस्था की गई थी। अब इसकी आवश्यकता नहीं होगी।
असर : चंडीगढ़ में ज्यादातर व्यापारी बाहर से आते हैं। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव बीएल शर्मा ई वे बिल के कारण अब गाड़ियां चल पड़ेंगी। ई वे बिल के बारे में स्पष्टता नहीं थी इसी वजह से ज्यादा समस्या थी। अभी हमारे लिए परेशानी खत्म नहीं हुईं है। वास्तव में थोड़ा अंतर जरूर आएगा लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं दिखेगा।
बदलाव : चंडीगढ़ देश के उन कुछ राज्यों में था जहां ट्रांसपोर्टर्स के लिए ई वे बिल की व्यवस्था की गई थी। अब इसकी आवश्यकता नहीं होगी।
असर : चंडीगढ़ में ज्यादातर व्यापारी बाहर से आते हैं। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव बीएल शर्मा ई वे बिल के कारण अब गाड़ियां चल पड़ेंगी। ई वे बिल के बारे में स्पष्टता नहीं थी इसी वजह से ज्यादा समस्या थी। अभी हमारे लिए परेशानी खत्म नहीं हुईं है। वास्तव में थोड़ा अंतर जरूर आएगा लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं दिखेगा।
जीएसटी
- फोटो : Amar Ujala
नई कंपोजिशन स्कीम से ज्यादातर कारोबारी फायदे में
बदलाव : इस स्कीम के तहत छोटे व्यापारियों को अपने सालाना टर्न ओवर का कुछ प्रतिशत देना होता है, जिससे वे जीएसटी की जटिलताओं बच जाते थे। सालाना 75 लाख का कारोबार करने वालों कारोबारियों को इसका लाभ मिलता था, अब एक करोड़ तक का कारोबार करने वालों को मिलेगा।
असर : चंडीगढ़ के तीस फीसदी कपड़ा व्यापारी कंपोजिशन स्कीम का लाभ पा रहे थे, अब यह संख्या बढ़ जाएगी। इससे वे कारोबार बेहतर ढंग से चला पाएंगे। चंडीगढ़ व्यापार मंडल के चेयरमैन चरंजीव सिंह ने बताया कि यह स्कीम ठीक है, इसका लाभ ज्यादातर व्यापारियों को मिलेगा। क्योंकि चंडीगढ़ में छोटे व्यापारी ज्यादा हैं और बड़े व्यापारी कम। ऐसी स्थिति में ज्यादातर व्यापारी इसी स्कीम के अंतर्गत आ जाएंगे।
बदलाव : इस स्कीम के तहत छोटे व्यापारियों को अपने सालाना टर्न ओवर का कुछ प्रतिशत देना होता है, जिससे वे जीएसटी की जटिलताओं बच जाते थे। सालाना 75 लाख का कारोबार करने वालों कारोबारियों को इसका लाभ मिलता था, अब एक करोड़ तक का कारोबार करने वालों को मिलेगा।
असर : चंडीगढ़ के तीस फीसदी कपड़ा व्यापारी कंपोजिशन स्कीम का लाभ पा रहे थे, अब यह संख्या बढ़ जाएगी। इससे वे कारोबार बेहतर ढंग से चला पाएंगे। चंडीगढ़ व्यापार मंडल के चेयरमैन चरंजीव सिंह ने बताया कि यह स्कीम ठीक है, इसका लाभ ज्यादातर व्यापारियों को मिलेगा। क्योंकि चंडीगढ़ में छोटे व्यापारी ज्यादा हैं और बड़े व्यापारी कम। ऐसी स्थिति में ज्यादातर व्यापारी इसी स्कीम के अंतर्गत आ जाएंगे।
GST impact
रिटर्न दाखिल करने से छूट का मतलब कारोबार पर दे पाएंगे ध्यान
बदलाव : जीएसटी में हर महीने की 10 तारीख तक बिल लगाकर आयकर विभाग को रिटर्न दाखिल करने, 20 तारीख तक खरीद की घोषणा करने और 30 तारीख तक बचे हुए स्टॉक की जानकारी देनी होती थी। यहां भी 1.5 करोड़ का सालाना कारोबार करनेवाले कारोबारियों को हर महीने के बजाय हर तीन महीने में जानकारी देने की छूट दी गई है।
असर : चार्टर्ड अकाउंटेंट एके चड्ढा ने बताया कि 1.5 करोड़ का सालाना टर्न ओवर करने वाले कारोबारियों को भी आयकर विभाग के साथ कागजी कार्रवाई से राहत मिलने की वजह से वे बेहतर ढंग से अपना काम कर सकेंगे। ये सभी कारोबारी आयकर विभाग के चक्कर लगाते हुए अपने कारोबार पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे।
बदलाव : जीएसटी में हर महीने की 10 तारीख तक बिल लगाकर आयकर विभाग को रिटर्न दाखिल करने, 20 तारीख तक खरीद की घोषणा करने और 30 तारीख तक बचे हुए स्टॉक की जानकारी देनी होती थी। यहां भी 1.5 करोड़ का सालाना कारोबार करनेवाले कारोबारियों को हर महीने के बजाय हर तीन महीने में जानकारी देने की छूट दी गई है।
असर : चार्टर्ड अकाउंटेंट एके चड्ढा ने बताया कि 1.5 करोड़ का सालाना टर्न ओवर करने वाले कारोबारियों को भी आयकर विभाग के साथ कागजी कार्रवाई से राहत मिलने की वजह से वे बेहतर ढंग से अपना काम कर सकेंगे। ये सभी कारोबारी आयकर विभाग के चक्कर लगाते हुए अपने कारोबार पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे।
gst
- फोटो : सोशल मीडिया
ट्रांसपोर्ट में भी छोटे व्यापारियों को राहत
बदलाव : ऐसे कारोबारी जो बिना पंजीकरण काम कर रहे हैं, उन्हें अपने माल की ढुलाई के लिए रिवर्स चार्ज चुकाना पड़ा रहा था। यानी जो माल लेगा, उसी को टैक्स चुकाना होगा, सप्लायर को नहीं। बाहर से मंगवाए माल पर भी वे टैक्स चुका रहे थे। उन्हें सरकार ने राहत दी है।
असर : चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष केके अबरोल ने कहा कि पंजीकृत कारोबारियों की संख्या का अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन वे बहुत बड़ी संख्या में हैं। सरकार इन सभी को टैक्स के दायरे में लाने का प्रयास कर रही है। लेकिन माल ढुलाई पर उन्हें रिवर्स टैक्स से छूट मिलने पर वे बड़ी राहत होगी।
बदलाव : ऐसे कारोबारी जो बिना पंजीकरण काम कर रहे हैं, उन्हें अपने माल की ढुलाई के लिए रिवर्स चार्ज चुकाना पड़ा रहा था। यानी जो माल लेगा, उसी को टैक्स चुकाना होगा, सप्लायर को नहीं। बाहर से मंगवाए माल पर भी वे टैक्स चुका रहे थे। उन्हें सरकार ने राहत दी है।
असर : चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष केके अबरोल ने कहा कि पंजीकृत कारोबारियों की संख्या का अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन वे बहुत बड़ी संख्या में हैं। सरकार इन सभी को टैक्स के दायरे में लाने का प्रयास कर रही है। लेकिन माल ढुलाई पर उन्हें रिवर्स टैक्स से छूट मिलने पर वे बड़ी राहत होगी।