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हरियाणा: संपत्ति लेकर दादी को बेसहारा छोड़ना पड़ा भारी, हाईकोर्ट में संपत्ति सहित 25 लाख हारा

Sun, 05 Dec 2021 01:13 AM IST
भूपेंद्र सिंह विवेक शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 05 Dec 2021 01:13 AM IST
सार

पोते ने हाईकोर्ट में कहा कि उसने प्लॉट पर 25 लाख खर्च किया है। इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि तुमने जोखिम लिया। हाईकोर्ट ने सोनीपत के राई में स्थित भूमि को फिर से दादी के नाम करने का आदेश दिया है।

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Grandmother was left destitute by taking property, lost 25 lakhs including property in High Court
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

अपनी दादी से संपत्ति पाने के बाद उससे बदसलूकी करना और बेसहारा छोड़ना पोते को भारी पड़ गया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दादी से मिले प्लॉट को वापस दादी के नाम करने का आदेश दिया है। प्लॉट पर किए गए निर्माण की 25 लाख की राशि की दलील हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दी कि याची ने जोखिम लेकर यह निर्माण किया था।

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याचिका दाखिल करते हुए सोनीपत के राई निवासी नवीन ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी दादी राम रती को ग्राम पंचायत राई से 100 गज का प्लॉट अलॉट हुआ था। 7 दिसंबर 2016 को उसकी दादी ने यह प्लॉट उसके नाम ट्रांसफर किया था। इसके बाद अचानक अपने एक बेटे के बहकावे में आकर दादी ने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के चेयरमैन को शिकायत दी कि उसका पोता उससे दुर्व्यवहार करता है और ऐसे में संपत्ति को पोते के नाम से दोबारा उसके नाम की जाए।
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ट्रिब्यूनल ने दादी के हक में फैसला सुनाते हुए संपत्ति याचिकाकर्ता के हक में हुई रजिस्ट्री को रद्द करने का आदेश दे दिया। याची ने कहा कि वह अपनी दादी का पूरा ध्यान रखता था और उसके सारे खर्च की आपूर्ति भी करता था। याची ने जो प्लॉट मिला था, उस पर 25 लाख खर्च कर मकान बनाया है।
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हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि याची ने जो सबूूत पेश किए हैं, वह साबित नहीं करते कि याची दादी का खर्च उठा रहा था। दादी ने रजिस्ट्री के समय यह शर्त डाली थी कि यदि पोता ध्यान नहीं रखेगा तो संपत्ति की रजिस्ट्री रद्द हो सकती है।

दादी को लगा कि संपत्ति नाम होने के बाद याची का व्यवहार बदल गया है तो उसने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। साथ ही हाईकोर्ट ने 25 लाख खर्च की दलील पर कहा कि याची ने यह निर्माण अपने जोखिम पर किया था। याची को चाहिए था कि वह इस खर्च को करने के बाद दादी का ध्यान भी रखे। ऐसे में हाईकोर्ट ने मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के फैसले पर मोहर लगाते हुए अब निर्माण के साथ ही संपत्ति लौटाने का आदेश दिया है।

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