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Chandigarh News: हरियाणा व पंजाब की सरकारें घग्गर नदी के दोनों ओर बनाएंगीं 382 किलोमीटर तक बांध
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बाढ़ प्रभावित किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई सरकार की बैठक में मिला आश्वासन
-किसान को रेत की कीमत का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, 30-30 प्रतिशत सरकार व पंचायत को
-बाढ़ के लिए चिह्नित किए गए 149 कारणों को दूर करने के लिए अधिकारियों की समिति का गठन, किसान प्रतिनिधि भी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जुलाई में आई बाढ़ ने हरियाणा व पंजाब के कई गांवों में भारी तबाही मचाई। आगे ऐसा न हो, इसके लिए हरियाणा व पंजाब की सरकार घग्गर नदी के दोनों ओर किनारों पर करीब 382 किलोमीटर लंबाई तक बांध का निर्माण करेंगी। सरकार ने यह आश्वासन बाढ़ प्रभावित किसान प्रतिनिधियों को सचिवालय में आयोजित बैठक में नदियों के किनारे मजबूत किए जाने की मांग पर दिया। अधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में चार दिन बाद पत्र जारी कर दिया जाएगा और अगले मानसून सत्र से पहले इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में चार किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार की ओर से राजस्व विभाग के वित्तायुक्त आरके खुल्लर, आईएएस आरकेरेसिंह, एस नारायणन सहित अन्य अधिकारी बैठक में पहुंचे। बैठक में बताया गया कि बाढ़ के कारण खेतों में जमा रेत की बिक्री से होने वाली आय में से किसानों को अब 40 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। सरकार व पंचायत को 30-30 प्रतिशत का हिस्सा मिलेगा। हालांकि इस पर अभी अंतिम मोहर नहीं लगी है।
सर छाेटू राम (भाकियू) के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगदीप सिंह ओलख ने बताया कि बैठक में अधिकारियों ने बताया कि क्षतिपूर्ति पोर्टल पर किसानों के दावे का जल्द से जल्द सत्यापन कर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि मारकंडा नदी पर मुलाना से हेमूमाजरा में बांध का निर्माण करने के लिए सर्वे करवाया जाएगा। बाढ़ से इस बार हुए नुकसान के अभी तक 149 कारण सरकार ने ढूंढे हैं। इन कारणों को दूर करने के लिए अधिकारियों की समिति का गठन किया गया है। इसमें किसान प्रतिनिधि के तौर पर अमरजीत सिंह मोड़ी को भी शामिल किया है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान अंबाला में टांग गंवा चुके किसान के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।
इन मांगों पर केंद्र सरकार के अधिकारियों से बातचीत करवाने का मिला आश्वासन
जगदीप ओलख ने बताया कि 50 हजार रुपये प्रति एकड़ फसल नुकसान पर मुआवजा, पशु की मौत पर एक लाख रुपये, प्रदेश के किसानों को 50 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज जैसी मांगों पर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के अधिकारियों से किसान प्रतिनिधिमंडल की बैठक करवाने का आश्वासन दिया है, ताकि केंद्र से राहत पैकेज मिल सके। बाढ़ के कारण मृत व्यक्ति के परिजनों को 10 लाख मुआवजा व प्रति एकड़ नुकसान पर मुआवजा राशि पर सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। किसान नेताओं ने बैठक में बातचीत को सकारात्मक बताया। साथ ही कहा कि जब तक मांगों पर काम शुरू नहीं हो जाता, तब तक अंबाला में 24 घंटे किसानों का धरना जारी रहेगा।
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चार सितंबर को चंडीगढ़ प्रशासन के साथ होगी बैठक
किसान नेता जगदीप सिंह ओलख ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने चार सितंबर को हरियाणा व पंजाब के 16 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है। आज की बैठक में किसानों की ओर से शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के प्रधान अमरजीत सिंह मोड़ी, पगड़ी संभाल जट्टा भाकियू से मनदीप सिंह नथवान, आजाद हिंद किसान यूनियन के सुखविंद्र सिंह ओलख, सर छाेटू राम भाकियू के जगदीप सिंह ओलख, बहादुर सिंह मेहला, तेजवीर सिंह अंबाला, रोहतक से अशोक बल्हारा ने भाग लिया।
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-किसान को रेत की कीमत का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, 30-30 प्रतिशत सरकार व पंचायत को
-बाढ़ के लिए चिह्नित किए गए 149 कारणों को दूर करने के लिए अधिकारियों की समिति का गठन, किसान प्रतिनिधि भी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जुलाई में आई बाढ़ ने हरियाणा व पंजाब के कई गांवों में भारी तबाही मचाई। आगे ऐसा न हो, इसके लिए हरियाणा व पंजाब की सरकार घग्गर नदी के दोनों ओर किनारों पर करीब 382 किलोमीटर लंबाई तक बांध का निर्माण करेंगी। सरकार ने यह आश्वासन बाढ़ प्रभावित किसान प्रतिनिधियों को सचिवालय में आयोजित बैठक में नदियों के किनारे मजबूत किए जाने की मांग पर दिया। अधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में चार दिन बाद पत्र जारी कर दिया जाएगा और अगले मानसून सत्र से पहले इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में चार किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार की ओर से राजस्व विभाग के वित्तायुक्त आरके खुल्लर, आईएएस आरकेरेसिंह, एस नारायणन सहित अन्य अधिकारी बैठक में पहुंचे। बैठक में बताया गया कि बाढ़ के कारण खेतों में जमा रेत की बिक्री से होने वाली आय में से किसानों को अब 40 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। सरकार व पंचायत को 30-30 प्रतिशत का हिस्सा मिलेगा। हालांकि इस पर अभी अंतिम मोहर नहीं लगी है।
सर छाेटू राम (भाकियू) के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगदीप सिंह ओलख ने बताया कि बैठक में अधिकारियों ने बताया कि क्षतिपूर्ति पोर्टल पर किसानों के दावे का जल्द से जल्द सत्यापन कर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि मारकंडा नदी पर मुलाना से हेमूमाजरा में बांध का निर्माण करने के लिए सर्वे करवाया जाएगा। बाढ़ से इस बार हुए नुकसान के अभी तक 149 कारण सरकार ने ढूंढे हैं। इन कारणों को दूर करने के लिए अधिकारियों की समिति का गठन किया गया है। इसमें किसान प्रतिनिधि के तौर पर अमरजीत सिंह मोड़ी को भी शामिल किया है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान अंबाला में टांग गंवा चुके किसान के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।
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इन मांगों पर केंद्र सरकार के अधिकारियों से बातचीत करवाने का मिला आश्वासन
जगदीप ओलख ने बताया कि 50 हजार रुपये प्रति एकड़ फसल नुकसान पर मुआवजा, पशु की मौत पर एक लाख रुपये, प्रदेश के किसानों को 50 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज जैसी मांगों पर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के अधिकारियों से किसान प्रतिनिधिमंडल की बैठक करवाने का आश्वासन दिया है, ताकि केंद्र से राहत पैकेज मिल सके। बाढ़ के कारण मृत व्यक्ति के परिजनों को 10 लाख मुआवजा व प्रति एकड़ नुकसान पर मुआवजा राशि पर सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। किसान नेताओं ने बैठक में बातचीत को सकारात्मक बताया। साथ ही कहा कि जब तक मांगों पर काम शुरू नहीं हो जाता, तब तक अंबाला में 24 घंटे किसानों का धरना जारी रहेगा।
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चार सितंबर को चंडीगढ़ प्रशासन के साथ होगी बैठक
किसान नेता जगदीप सिंह ओलख ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने चार सितंबर को हरियाणा व पंजाब के 16 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है। आज की बैठक में किसानों की ओर से शहीद भगत सिंह किसान यूनियन के प्रधान अमरजीत सिंह मोड़ी, पगड़ी संभाल जट्टा भाकियू से मनदीप सिंह नथवान, आजाद हिंद किसान यूनियन के सुखविंद्र सिंह ओलख, सर छाेटू राम भाकियू के जगदीप सिंह ओलख, बहादुर सिंह मेहला, तेजवीर सिंह अंबाला, रोहतक से अशोक बल्हारा ने भाग लिया।