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चंडीगढ़ प्रशासन की ‘गलती’ से एक हफ्ते से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं विद्यार्थी, जानिए क्यों हुई समस्या
Wed, 31 Jul 2019 11:35 AM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 31 Jul 2019 11:35 AM IST
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मलोया का स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
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कॉलोनी नंबर-4 स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल में सोमवार को दोनों शिफ्टों में 600 से ज्यादा स्टूडेंट्स गैरहाजिर रहे। मंगलवार को भी यह आंकड़ा 500 के पार रहा। कारण यह है कि कॉलोनी नंबर-4 के 2 हजार परिवार को मलोया में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन वहां स्कूल तैयार नहीं किया गया है। मलोया से पढ़ने के लिए रोजाना एक बच्चे को 80 से 100 रुपए तक किराया देना पड़ रहा है। कई पेरेंट्स सक्षम नहीं है, जिसकी वजह से सैकड़ों स्टूडेंट्स घर बैठे हैं।
सैकड़ों स्टूडेंट्स की पढ़ाई छूट रही है, लेकिन शिक्षा विभाग अभी तक हाथ पर हाथ धरे बैठा है। कॉलोनी शिफ्ट करने से पहले बच्चों की पढ़ाई के बारे में सोचा ही नहीं गया। प्रशासन का रवैया इन लोगों के प्रति कितना उदासीन है, इस बात का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि मलोया में लोगों को शिफ्ट किए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक वहां के लोगों के आने जाने के लिए बस सर्विस भी शुरू नहीं की गई है। कई स्थानीय नेताओं ने इस बारे सांसद किरण खेर से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।
पेरेंट्स को अब बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि प्रशासन कॉलोनी के लोगों के साथ दोहरा व्यवहार कर रहा है। लोगों को शिफ्ट करने से पहले बच्चों की पढ़ाई के बारे में सोचना चाहिए लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, जिसका खामियाजा सैंकड़ों स्टूडेंट्स भुगत रहे हैं।
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सैकड़ों स्टूडेंट्स की पढ़ाई छूट रही है, लेकिन शिक्षा विभाग अभी तक हाथ पर हाथ धरे बैठा है। कॉलोनी शिफ्ट करने से पहले बच्चों की पढ़ाई के बारे में सोचा ही नहीं गया। प्रशासन का रवैया इन लोगों के प्रति कितना उदासीन है, इस बात का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि मलोया में लोगों को शिफ्ट किए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक वहां के लोगों के आने जाने के लिए बस सर्विस भी शुरू नहीं की गई है। कई स्थानीय नेताओं ने इस बारे सांसद किरण खेर से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।
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पेरेंट्स को अब बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि प्रशासन कॉलोनी के लोगों के साथ दोहरा व्यवहार कर रहा है। लोगों को शिफ्ट करने से पहले बच्चों की पढ़ाई के बारे में सोचना चाहिए लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, जिसका खामियाजा सैंकड़ों स्टूडेंट्स भुगत रहे हैं।
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दो शिफ्टों में चलता है स्कूल, संख्या 1500 से ज्यादा
कॉलोनी नंबर-4 में 10वीं तक का एक सरकारी स्कूल है। यह स्कूल दो शिफ्टों में चलता है, मॉर्निंग के शिफ्ट में 1100 स्टूडेंट्स हैं। इवनिंग में भी 400 से ज्यादा स्टूडेंट्स है। 20 जुलाई से कालोनी को मलोया में शिफ्ट करने का काम चल रहा है। मकान मिलने के तीन दिन के अंदर झुग्गी तोड़ कर मलोया में शिफ्ट हो जाने के आदेश जारी किए गए हैं।
अब हजारों लोग मलोया पहुंच चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक स्कूल को शिप्ट नहीं किया है। मलोया में स्कूल तैयार नहीं है और बच्चे मलोया में पहुंच चुके हैं। ऐसे में अब पेरेंट्स समझ नहीं पा रहा कि वह क्या करे। शिक्षा विभाग के पास भी इस सवाल का जवाब नहीं है। मलोया शिफ्ट होने वाले स्टूडेंट्स सिर्फ कॉलोनी नंबर-4 में ही नहीं सेक्टर-29, 28, 27, 30, हल्लोमाजरा, रामदरबार आदि के स्कूलों में भी पढ़ते हैं।
किसी और गलती भुगत रहे सैकड़ों बच्चे
फ्लैट्स की पजेशन देने में हाउसिंग बोर्ड ने देरी कर दी, जिसकी वजह से उन्होंने कालोनी और आसपास के स्कूलों में दाखिला ले लिया। अब सभी को मलोया भेज दिया गया, लेकिन वहां स्कूल तैयार नहीं है। सूत्रों की माने तो मलोया में दोनों स्कूलों को पूरी तरह से तैयार होने में अभी एक महीने का समय लगेगा। दोनों स्कूल में रैंप का काम चल रहा है, वहां पर अभी लगाए गए सपोर्टर्स भी नहीं हटाए गए हैं। क्लासरूम का काफी काम बचा है, स्कूल में न तो बेंच है न कुर्सियां। पीने के पानी की जगह, टॉयलेट से लेकर कोई भी काम पूरा नहीं हुआ है।
अब हजारों लोग मलोया पहुंच चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक स्कूल को शिप्ट नहीं किया है। मलोया में स्कूल तैयार नहीं है और बच्चे मलोया में पहुंच चुके हैं। ऐसे में अब पेरेंट्स समझ नहीं पा रहा कि वह क्या करे। शिक्षा विभाग के पास भी इस सवाल का जवाब नहीं है। मलोया शिफ्ट होने वाले स्टूडेंट्स सिर्फ कॉलोनी नंबर-4 में ही नहीं सेक्टर-29, 28, 27, 30, हल्लोमाजरा, रामदरबार आदि के स्कूलों में भी पढ़ते हैं।
किसी और गलती भुगत रहे सैकड़ों बच्चे
फ्लैट्स की पजेशन देने में हाउसिंग बोर्ड ने देरी कर दी, जिसकी वजह से उन्होंने कालोनी और आसपास के स्कूलों में दाखिला ले लिया। अब सभी को मलोया भेज दिया गया, लेकिन वहां स्कूल तैयार नहीं है। सूत्रों की माने तो मलोया में दोनों स्कूलों को पूरी तरह से तैयार होने में अभी एक महीने का समय लगेगा। दोनों स्कूल में रैंप का काम चल रहा है, वहां पर अभी लगाए गए सपोर्टर्स भी नहीं हटाए गए हैं। क्लासरूम का काफी काम बचा है, स्कूल में न तो बेंच है न कुर्सियां। पीने के पानी की जगह, टॉयलेट से लेकर कोई भी काम पूरा नहीं हुआ है।
कॉलोनी नंबर-4 से मलोया की कोई सीधी बस नहीं
बच्चों को मलोया से कॉलोनी नंबर- 4 आने जाने में रोजाना 30 से 32 किमी का सफर तय करना पड़ रहा है। ऐसे में ज्यादातर बच्चे घर बैठकर स्कूल के शिफ्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। समस्या यहीं खत्म नहीं होती है, क्योंकि कॉलोनी नंबर-4 से मलोया की कोई सीधी बस नहीं है। छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी आ रही है।
मेरे तीन बच्चे हैं जो सेक्टर-29 के स्कूल में पढ़ते हैं। अफसरों ने मकान कैंसिल करने का डर दिखाकर हमें यहां जबरन भेज दिया, लेकिन यहां स्कूल नहीं बना है। तीनों बच्चे 7 दिन से घर पर बैठे हैं। उनकी पढ़ाई छूट रही है, समझ नहीं आ रहा क्या करें।
- मुकेश कुमार, अभिभावक
मेरे बच्चे कॉलोनी के स्कूल में पढ़ते हैं। मलोया में स्कूल बनाया नहीं और हमें जबरदस्ती यहां से भेजा जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई छूट रही है। हम कई बार स्कूल में भी गए लेकिन वहां भी किसी को नहीं पता क्या करना है। सभी काफी परेशान है।
- मितलेश देवी, अभिभावक
स्कूल के सामानों का ऑर्डर दे दिया गया है। विभाग अपनी तरफ से तेजी से काम कर रहा है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
- अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी
मेरे तीन बच्चे हैं जो सेक्टर-29 के स्कूल में पढ़ते हैं। अफसरों ने मकान कैंसिल करने का डर दिखाकर हमें यहां जबरन भेज दिया, लेकिन यहां स्कूल नहीं बना है। तीनों बच्चे 7 दिन से घर पर बैठे हैं। उनकी पढ़ाई छूट रही है, समझ नहीं आ रहा क्या करें।
- मुकेश कुमार, अभिभावक
मेरे बच्चे कॉलोनी के स्कूल में पढ़ते हैं। मलोया में स्कूल बनाया नहीं और हमें जबरदस्ती यहां से भेजा जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई छूट रही है। हम कई बार स्कूल में भी गए लेकिन वहां भी किसी को नहीं पता क्या करना है। सभी काफी परेशान है।
- मितलेश देवी, अभिभावक
स्कूल के सामानों का ऑर्डर दे दिया गया है। विभाग अपनी तरफ से तेजी से काम कर रहा है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
- अनुजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी