नर्सों का आंदोलनः राजिंदरा अस्पताल की ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर बंद, मरीज हुए परेशान
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सरकारी राजिंदरा अस्पताल में काम छोड़ो हड़ताल पर बैठी नर्सों ने अपना आंदोलन तेज करते हुए मंगलवार को ओपीडी और सभी ऑपरेशन थियेटर बंद करवा दिए। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं। साथ ही अस्पताल के आगे संगरूर रोड जाम करके कैप्टन सरकार का पुतला फूंका। सरकार से वादे के मुताबिक अस्पताल की सभी कांट्रेक्ट नर्सों, दर्जा चार मुलाजिमों और अनसिलरी स्टाफ को रेगुलर करने की मांग की गई।
नर्सिंग स्टाफ की प्रधान कर्मजीत कौर औलख, बलजीत कौर और एक दर्जा चार मुलाजिम सतपाल सिंह मंगलवार को भी अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के दफ्तर की छत पर चढ़े रहे। प्रधान कर्मजीत कौर का सोमवार से शुरू हुआ मरणव्रत दूसरे दिन भी जारी रहा। उनके कुछ और साथी नीचे भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मंगलवार को जिला प्रशासन ने नीचे जाल भी लगवा दिया।
आंदोलनकारी नर्सों ने सोमवार शाम को ही अस्पताल की ओपीडी को कीलों के साथ लकड़ी की एक फट्टी लगाकर बंद कर दिया था। साथ ही इमरजेंसी को छोड़कर बाकी सारे ऑपरेशन थियेटरों को भी बंद कर दिया था। मंगलवार को अस्पताल प्रशासन के समझाने पर भी नर्सों ने ओपीडी और ओटी को नहीं खोला।
नर्सों ने कहा कि पूर्व बादल सरकार के राज में जब वह आंदोलन कर रही थीं, तो पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने धरनास्थल पर पहुंच कर वादा किया था कि पंजाब में कैप्टन की सरकार बनने पर नर्सों को रेगुलर कर दिया जाएगा। अब वादा पूरा करने से मुंह मोड़ रही हैं। उन्होंने मांग की कि नर्सों को जल्द से जल्द रेगुलर किया जाए। खबर लिखे जाने तक नर्सों का आंदोलन जारी था।
ओपीडी और ओटी बंद होने से मरीज हुए परेशान
सरकारी राजिंदरा अस्पताल पटियाला ही नहीं, बल्कि पूरे मालवा क्षेत्र का जाना-माना अस्पताल है। यहां दूर-दूर से लोग इलाज के लिए आते हैं। सोमवार शाम को नर्सों द्वारा ओपीडी व सारे ओटी बंद होने का लोगों को पता नहीं था, जिस कारण मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग ओपीडी में आ रहे थे। ओपीडी बंद होने से मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी हुई।
पातड़ां से कान के इलाज के लिए पहुंचे मयूर ने कहा कि उन्हें ओपीडी बंद होने का पता नहीं था। नर्सों के आंदोलन से उन्हें मतलब नहीं, लेकिन उनकी वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है। सरकार को इस संबंधी कोई कदम उठाना चाहिए। वहीं ऑपरेशन थियेटर बंद होने के कारण विभिन्न विभागों के डॉक्टरों को मरीजों के ऑपरेशन आगे की डेट पर डालने पड़े। जो ऑपरेशन जरूरी थे, उन्हें कहीं और रेफर किया गया।