डीएलएफ को जमीन वापस दे सरकार: हाईकोर्ट
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुड़गांव में निर्माणाधीन डीएलएफ के हाउसिंग प्रोजेक्ट में जन सुविधाओं की इमारतें विकसित करने के लिए सरकार की ओर से ली गई जमीन वापस लौटाने का आदेश दिया है। हालांकि, डीएलएफ का करोड़ों का इंटरनल बिल्डिंग चार्जेज़ (आईसीबी) का दावा हाईकोर्ट ने नकार दिया है।
जनसुविधाओं की इमारतें सरकार अभी तक नहीं बना पाई है और डीएलएफ की मांग थी कि निर्माण किया जाए, अन्यथा जमीनें वापस दी जाएं।
जस्टिस सूर्यकांत की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि डीएलएफ के पास इमारतें विकसित करने के लिए अभी और समय है। ऐसे में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रधान सचिव वह सभी जगहें डीएलएफ को वापस करें, जिन पर सरकार अभी तक निर्माण नहीं कर पाई है।
हाईकोर्ट का अहम फैसला
डीएलएफ टाउनशिप में जन सुविधाओं की इमारतें विकसित करने के लिए सरकार ने जमीनें ली थीं, लेकिन यह इमारतें विकसित नहीं हुईं। जमीनें वापस लौटाने के आदेश के साथ बेंच ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि डीएलएफ तय समय में जन सुविधाएं विकसित करने में विफल रहता है तो सरकार संबंधित चार्जेज़ भी वसूल कर सकती है और जमीन भी ले सकती है।
सरकार की ओर से हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन अर्बन एरिया एक्ट-1975 में वर्ष 2012 में किए संशोधन को डीएलएफ ने चुनौती दी थी। इस एक्ट में सुप्रीमकोर्ट के एक फैसले के मुताबिक व्यवस्था बनाई गई थी कि एक बार लिया गया आईबीसी निर्माण कंपनी को नहीं लौटाया जाएगा।
हाईकोर्ट ने संशोधन को बरकरार रखते हुए कहा है कि विधायिका के फैसले में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने डीएलएफ की ओर से आईबीसी का दावा ठुकरा दिया है।