Punjab News: जाली जाति प्रमाणपत्र के सहारे शिक्षक और पंच बनने वालों पर गिरी गाज, वसूली भी करेगी सरकार
टीचर ने पिछड़ी जाति का फर्जी प्रमाणपत्र और पंच ने अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवाया था। सरकार ने दोनों के प्रमाणपत्रों को खारिज कर दिया है। डीसी पटियाला को दोनों के सर्टिफिकेट जब्त करने का आदेश दिया। विभाग इनसे वसूली भी करेगा। इसके लिए शिक्षा विभाग व पंचायत विभाग को भी पत्र लिखा गया है।
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जाली जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी या सरकारी लाभ लेने वालों पर राज्य सरकार सख्त है। ऐसे लोगों की शिनाख्त कर कार्रवाई भी की जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को मोहाली के बलटाना के स्कूल में तैनात ईटीटी टीचर जसवीर सिंह निवासी पटियाला व पंच मिट्ठू राम निवासी गांव सुरल कलां जिला पटियाला के प्रमाणपत्र जाली मिले।
टीचर ने पिछड़ी जाति का फर्जी प्रमाणपत्र और पंच ने अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवाया था। सरकार ने दोनों के प्रमाणपत्रों को खारिज कर दिया है। डीसी पटियाला को दोनों के सर्टिफिकेट जब्त करने का आदेश दिया। विभाग इनसे वसूली भी करेगा। इसके लिए शिक्षा विभाग व पंचायत विभाग को भी पत्र लिखा गया है। इससे पहले करीब 10-12 मामले ऐसे पकड़े जा चुके हैं।
ऐसे शुरू हुई थी दोनों मामलों की जांच
बलवीर सिंह निवासी गांव आलमपुर (पटियाला) ने सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग के निदेशक के पास शिकायत दर्ज करवाई थी। उनका आरोप था कि जसवीर सिंह हरियाणा से आकर शादी के बाद यहां का निवासी बन गया और उसने पंजाब राज्य का पिछड़ी श्रेणी प्रमाणपत्र बनवा लिया। इस सर्टिफिकेट के आधार पर उसने शिक्षक की नौकरी प्राप्त की। शिकायतकर्ता ने जसवीर का पिछड़ी श्रेणी का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने और उसके खिलाफ कार्रवाई को कहा।
वहीं, दूसरे मामले में पाला सिंह, जसविंदर सिंह और हरनीत सिंह सभी निवासी गांव सुरल कलां तहसील राजपुरा जिला पटियाला ने शिकायत दी। इसमें उन्होंने बताया कि मिट्ठू राम राजपूत जाति से है लेकिन उसने अनुसूचित जाति का प्रमाणत्र बनवा रखा है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर वह सुरल कलां का पंच चुना गया। शिकायतकर्ताओं ने मिट्ठू राम का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
डीसी पटियाला ने जांच की तो खुली पोल
विभाग ने इस मामले में डिप्टी कमिश्नर पटियाला से रिपोर्ट मांगी गई। इस मामले की जांच करने पर पता चला कि जसवीर सिंह पिछडी श्रेणी से है लेकिन वह बाहर से आकर यहां का निवासी बना है। सरकार के निर्देशानुसार वह पंजाब में पिछड़ी श्रेणी का लाभ नहीं ले सकता। इसके बाद जसवीर सिंह को पंजाब के स्थायी निवासी के रूप में जारी पिछड़ी श्रेणी का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
मिट्ठू राम के मामले की जांच करने पर यह सामने आया कि वह अपने स्कूल रिकॉर्ड, नंबरदारों के बयान के अनुसार राजपूत जाति से है लेकिन उसने अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवा रखा था। मिट्ठू राम को विजिलेंस सेल ने रिपोर्ट के लिए 22, 28 जून, 24 अगस्त और एक सितंबर को उपस्थित होने को कहा था। हालांकि वह उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता अधिकारी पटियाला की रिपोर्ट पर विचार करते हुए मिट्ठू राम का जाली जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का निर्णय लिया गया है।