{"_id":"57a20b764f1c1b54762b9ac0","slug":"gold-fields-medical-collage-faridabad-students-enrollment-50-students","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोल्ड फील्ड के बाकी 50 छात्रों को भी मिलेगा सरकारी कॉलेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोल्ड फील्ड के बाकी 50 छात्रों को भी मिलेगा सरकारी कॉलेज
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 03 Aug 2016 08:50 PM IST
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फरीदाबाद स्थित गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस के जिन 50 विद्यार्थियों को प्रदेश सरकार ने प्राइवेट कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए कहा था, उन्हें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि बाकी विद्यार्थियों की तरह ही इन 50 विद्यार्थियों को भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट किया जाए।
जस्टिस जीएस संधावालिया ने गोल्ड फील्ड के विद्यार्थियों की तरफ से दायर की गई अलग-अलग याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए बुधवार को अपना फैसला सुनाया। फैसले में कहा कि गोल्ड फील्ड के 2014-15 बैच के सीरियल नंबर 51 से 100 तक से सभी विद्यार्थी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के पात्र हैं।
उन्होंने सरकार के निर्देश दिया कि इन विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर सरकारी कॉलेजों में एडजस्ट कर दिया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इन 50 विद्यार्थियों में शामिल छात्राओं को खानपुर कलां (सोनीपत) के बीपीएमएसजीएम कॉलेज फॉर विमेन में एडजस्ट किया जाए। हाईकोर्ट ने यह सारी प्रक्त्रिस्या 10 दिन में पूरी करने को कहा है।
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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इन विद्यार्थियों ने अपने पहले कॉलेज में जो फीस जमा कराई है और जितनी क्लासेस अटेंड की हैं, उनका लाभ भी इन विद्यार्थियों को दिया जाए, ताकि उन्हें फीस और लेक्चर शार्ट होने जैसी समस्या से न जूझना पड़े।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को यह निर्देश भी दिए कि अतिरिक्त विद्यार्थियों के कारण कालेजों पर बढ़ने वाले बोझ को देखते हुए सरकार संबंधित कालेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाए और इस काम के लिए एमसीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार गोल्ड फील्ड कालेज की बैंक गारंटी राशि का इस्तेमाल किया जाए।
यह है मामला
याचिकाकर्ताओं ने शैक्षिक सत्र 2014-15 के लिए हरियाणा सरकार द्वारा 22 मई, 2016 को जारी नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए निचली अदालत द्वारा 18 सितंबर, 2014 और 25 सितंबर, 2014 को दिए आदेश के अनुसार हरियाणा के सरकारी कालेजों में दाखिला दिए जाने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान 20 मई, 2016 को केंद्र सरकार ने माना कि याचिकाकर्ता सरकारी कालेजों में दाखिले के पात्र हैं और उन्हें प्राइवेट कालेजों में ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार ने 22 मई, 2016 को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, गोल्ड फील्ड के 100 विद्यार्थियों को प्रदेश में मुलाना व गुड़गांव स्थित निजी कालेजों समेत छह मेडिकल कालेजों में एडजस्ट करने का फैसला लिया था। इसके साथ ही 30 मई, 2016 को सरकारी कोटे के लिए और 31 मई, 2016 को मैनेजमेंट कोटे के लिए काउंसिलिंग की तिथि तय की गई।
सरकार ने गोल्ड फील्ड के विद्यार्थियों के सरकारी व निजी कालेजों में 64:36 के अनुपात में एडजस्ट करने का फैसला लिया। इनमें पहले 64 विद्यार्थियों को सरकारी कालेजों में और बाकी 36 विद्यार्थियों को निजी कालेजों में दाखिले का फैसला हुआ। लेकिन बाद में सरकार ने अपना फैसला बदलते हुए पहले केवल 50 विद्यार्थियों को ही सरकारी कालेजों में दाखिले को हरी झंडी दी और 51 से 64 तक विद्यार्थियों का सरकारी कालेजों में दाखिला रोक दिया।
सरकार ने इस सभी विद्यार्थियों को निजी कालेजों में दाखिला लेने के लिए कहा गया, जिसे चुनौती देते हुए विद्यार्थी हाईकोर्ट पहुंच गए। इसके अलावा जिन 36 विद्यार्थियों को निजी कालेजों में दाखिले के लिए कहा गया था, उन्होंने भी सरकार के फैसले को गलत ठहराते हुए हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। सभी याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे गोल्ड फील्ड कालेज में सरकारी कोटे में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी थे, लेकिन अब सरकार सरकारी कोटे और मैनेजमेंट कोटे के हिसाब से उन्हें दाखिला लेने पर मजबूर कर रही। सरकारी कोटे के हिसाब के दाखिला पाने वाले विद्यार्थियों को फीस के रूप में केवल 60,220 रुपये ही देने पड़ते जबकि प्राइवेट कालेज में उनसे लगभग 7,00,000 रुपये फीस वसूली जाती।
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जस्टिस जीएस संधावालिया ने गोल्ड फील्ड के विद्यार्थियों की तरफ से दायर की गई अलग-अलग याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए बुधवार को अपना फैसला सुनाया। फैसले में कहा कि गोल्ड फील्ड के 2014-15 बैच के सीरियल नंबर 51 से 100 तक से सभी विद्यार्थी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के पात्र हैं।
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उन्होंने सरकार के निर्देश दिया कि इन विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर सरकारी कॉलेजों में एडजस्ट कर दिया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इन 50 विद्यार्थियों में शामिल छात्राओं को खानपुर कलां (सोनीपत) के बीपीएमएसजीएम कॉलेज फॉर विमेन में एडजस्ट किया जाए। हाईकोर्ट ने यह सारी प्रक्त्रिस्या 10 दिन में पूरी करने को कहा है।
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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इन विद्यार्थियों ने अपने पहले कॉलेज में जो फीस जमा कराई है और जितनी क्लासेस अटेंड की हैं, उनका लाभ भी इन विद्यार्थियों को दिया जाए, ताकि उन्हें फीस और लेक्चर शार्ट होने जैसी समस्या से न जूझना पड़े।
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को यह निर्देश भी दिए कि अतिरिक्त विद्यार्थियों के कारण कालेजों पर बढ़ने वाले बोझ को देखते हुए सरकार संबंधित कालेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाए और इस काम के लिए एमसीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार गोल्ड फील्ड कालेज की बैंक गारंटी राशि का इस्तेमाल किया जाए।
यह है मामला
याचिकाकर्ताओं ने शैक्षिक सत्र 2014-15 के लिए हरियाणा सरकार द्वारा 22 मई, 2016 को जारी नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए निचली अदालत द्वारा 18 सितंबर, 2014 और 25 सितंबर, 2014 को दिए आदेश के अनुसार हरियाणा के सरकारी कालेजों में दाखिला दिए जाने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान 20 मई, 2016 को केंद्र सरकार ने माना कि याचिकाकर्ता सरकारी कालेजों में दाखिले के पात्र हैं और उन्हें प्राइवेट कालेजों में ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार ने 22 मई, 2016 को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, गोल्ड फील्ड के 100 विद्यार्थियों को प्रदेश में मुलाना व गुड़गांव स्थित निजी कालेजों समेत छह मेडिकल कालेजों में एडजस्ट करने का फैसला लिया था। इसके साथ ही 30 मई, 2016 को सरकारी कोटे के लिए और 31 मई, 2016 को मैनेजमेंट कोटे के लिए काउंसिलिंग की तिथि तय की गई।
सरकार ने गोल्ड फील्ड के विद्यार्थियों के सरकारी व निजी कालेजों में 64:36 के अनुपात में एडजस्ट करने का फैसला लिया। इनमें पहले 64 विद्यार्थियों को सरकारी कालेजों में और बाकी 36 विद्यार्थियों को निजी कालेजों में दाखिले का फैसला हुआ। लेकिन बाद में सरकार ने अपना फैसला बदलते हुए पहले केवल 50 विद्यार्थियों को ही सरकारी कालेजों में दाखिले को हरी झंडी दी और 51 से 64 तक विद्यार्थियों का सरकारी कालेजों में दाखिला रोक दिया।
सरकार ने इस सभी विद्यार्थियों को निजी कालेजों में दाखिला लेने के लिए कहा गया, जिसे चुनौती देते हुए विद्यार्थी हाईकोर्ट पहुंच गए। इसके अलावा जिन 36 विद्यार्थियों को निजी कालेजों में दाखिले के लिए कहा गया था, उन्होंने भी सरकार के फैसले को गलत ठहराते हुए हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। सभी याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे गोल्ड फील्ड कालेज में सरकारी कोटे में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी थे, लेकिन अब सरकार सरकारी कोटे और मैनेजमेंट कोटे के हिसाब से उन्हें दाखिला लेने पर मजबूर कर रही। सरकारी कोटे के हिसाब के दाखिला पाने वाले विद्यार्थियों को फीस के रूप में केवल 60,220 रुपये ही देने पड़ते जबकि प्राइवेट कालेज में उनसे लगभग 7,00,000 रुपये फीस वसूली जाती।