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Hindi News ›   Chandigarh ›   Giani Gurbachan Singh Have no Inpformation Regarding Fire Incident in Gurudwara Ramsar Sahib

रामसर साहिब में अग्निकांड, पूर्व जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को 20 दिन बाद मिली थी जानकारी

Thu, 08 Oct 2020 03:24 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमृतसर
अशोक नीर, अमृतसर Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 08 Oct 2020 03:24 PM IST
सार

  • पूर्व जत्थेदार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि कितने पावन स्वरूप अग्निभेंट हुए
  • पावन स्वरूपों की सेवा-संभाल के मामले में एसजीपीसी प्रबंधन कितना गंभीर, खुली पोल

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Giani Gurbachan Singh Have no Inpformation Regarding Fire Incident in Gurudwara Ramsar Sahib
श्री गुरु ग्रन्थ साहिब - फोटो : SOCIAL MEDIA

विस्तार

गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में हुए अग्निकांड मामले में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के कितने पावन स्वरूप अग्निभेंट हुए थे, इसकी जानकारी तत्कालीन जत्थेदार श्री अकाल तख्त ज्ञानी गुरबचन सिंह को नहीं थी। यहां तक कि घटना की जानकारी उन्हें 20 दिन बाद मिली तो वह गुरुद्वारा रामसर साहिब पहुंचे।

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उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर एसजीपीसी के तत्कालीन प्रबंधकों को निदेश दिए थे कि पावन स्वरूपों की जिल्दसाजी बाहर से न करवाकर, गुरु सिख बच्चों से कार्रवाई जाए। पावन स्वरूपों को सुरक्षित रखने के लिए अलमारियां व रैक बनाए जाएं। आरोपी एसजीपीसी कर्मचारियों व अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
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इसके बावजूद एसजीपीसी के तत्कालीन अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने ज्ञानी गुरबचन सिंह द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव पर अमल नहीं किया था। एसजीपीसी द्वारा सार्वजनिक की गई जांच रिपोर्ट में अधिकारी एडवोकेट ईशर सिंह ने लिखा है कि जांच के दौरान जब उन्होंने ज्ञानी गुरबचन सिंह से पूछा कि इस अग्निकांड में कितने पावन स्वरूप जले तो वह संख्या बताने में असमर्थ रहे।
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इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि पावन स्वरूपों के अग्निकांड को लेकर सिखों की सर्वोच्च अदालत के मुखिया भी गंभीर नहीं थे। जारी जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिकेशन विभाग के सुपरवाइजर कंवलजीत सिंह की ओर से पावन स्वरूपों के रिकॉर्ड की लेजर पर कच्ची पेंसिल से की गई एंट्रियों पर कभी भी किसी बड़े अधिकारी ने आपत्ति नहीं उठाई।

कभी भी पब्लिकेशन विभाग में नहीं गए

एसजीपीसी के पूर्व महासचिव सुखदेव सिंह भोर ने जांच कमेटी को जानकारी दी कि वह कभी भी पब्लिकेशन विभाग में नहीं गए। यह विभाग सीधे तौर पर एसजीपीसी के अध्यक्ष, मुख्य सचिव व सचिव पब्लिकेशन विभाग द्वारा संचालित किया जाता है। 19 मई को वह कार्यकारिणी की एक बैठक में भाग लेने के लिए अमृतसर आए थे। एसजीपीसी पहुंचने पर उन्हें जानकारी मिली कि गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब में सुबह अग्निकांड हुआ है। किसी भी अधिकारी ने महासचिव को इसकी जानकारी तत्काल देने के लिए कोई भी फोन नहीं किया। जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो अग्निभेंट हुए व पानी की बौछारों से भीगे पावन स्वरूपों की देखरेख शुरू हो चुकी थी। किसी भी अधिकारी ने उन्हें नहीं बताया कि कितने पावन स्वरूप जले हैं।

प्रेस से आए अतिरिक्त अंगों को रुमालों में बांध रखा जाता रहा
जिल्दसाज कुलवंत सिंह ने जांच कमेटी को बताया कि 2013-14 के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशित अतिरिक्त अंगों को संभालने का कोई भी प्रबंध नहीं होता था। वह इन अंगों को रुमालों में बांध कर रख लेते थे। प्रेस से आए अंगों की कोई भी गिनती या रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। पावन स्वरूपों की जिल्दसाजी के दौरान कुछ अंग कम पड़ जाते तो पहले से पड़े अतिरिक्त अंगों का इस्तेमाल कर लिया जाता था। कई बार अतिरिक्त अंग इतने अधिक हो जाते कि की पूरा एक पावन स्वरूप है तैयार हो जाता। लेकिन वह दफ्तर के आदेश के बाद ही स्वरूप तैयार करते थे।

अतिरिक्त अंगों से 61 पावन स्वरूप मौखिक आदेश पर कर दिए तैयार
जिल्दसाज ने जांच कमेटी को बताया कि जनवरी 2020 में मीत सचिव गुरबचन सिंह, सुपरवाइजर कंवलजीत सिंह व गुरमुख सिंह के मौखिक आदेश के बाद अतिरिक्त पड़े अंगों से 61 बड़े अकाल के पावन स्वरूप तैयार किए थे। इस पर कंवलजीत सिंह ने जांच कमेटी को बताया कि इन 61 पावन स्वरूपों की एंट्री उन्होंने अपने रिकॉर्ड में दर्ज की है, परन्तु स्टॉक लेजर में दर्ज नहीं की। जिल्दसाज के अनुसार इन पावन स्वरूपों पर जो शृंखला नंबर लगाए गए थे, वह भी कंवलजीत सिंह के आदेश पर ही लगाए गए थे।
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