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गोरक्षकों और पुलिस के बीच सत्यापन का विवाद खत्म, ये फैसला हुआ

Thu, 18 May 2017 02:20 PM IST
यशपाल शर्माअमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्माअमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 18 May 2017 02:20 PM IST
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gau rakshak and police controversy sort outed, police will not charge verification fee now
डेमो पिक
गो सेवा आयोग और पुलिस विभाग के बीच काफी समय से चल रहा गो रक्षकों के पुलिस सत्यापन की फीस लेने का विवाद सुलझ गया है। हरियाणा में गो रक्षक जल्द आधार लिंक पहचान पत्र से लैस नजर आएंगे। पुलिस विभाग सत्यापन के लिए प्रति गो रक्षक पांच सौ रुपये की वसूली नहीं करेगा। इस पर लंबे समय से पेंच फंसा था और जिलों में सत्यापन कार्य पर ब्रेक लग गई थी। गो सेवा आयोग के चेयरमैन भानी राम मंगला ने इस मुद्दे को सीएम मनोहर लाल के समक्ष बीते महीने उठाया था।
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इसके बाद सरकार यह शुल्क माफ करने को तैयार हो गई। सरकार ने पुलिस विभाग को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है। बीते हफ्ते वीरवार को भानी राम इस मसले को लेकर पुलिस महानिदेशक बीएस संधू से पुलिस मुख्यालय में मुलाकात भी कर चुके हैं। बैठक के दौरान गो रक्षकों के पुलिस सत्यापन में तेजी लाने को लेकर चर्चा हुई है। संधू ने आश्वस्त किया है कि बिना फीस वसूले जल्द सत्यापन कार्य पूरा कर गो सेवा आयोग को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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700 गो रक्षकों ने कराया पंजीकरण
आयोग के चेयरमैन भानी राम मंगला ने बताया कि प्रदेश के 700 गो रक्षकों ने पंजीकरण कराया है। इसमें से 350 पहचान पत्र के लिए आवेदन कर चुके हैं। जिलों से इनकी सत्यापन रिपोर्ट जल्द मंगवाई जाएगी। इसके बाद आयोग पहचान पत्र जारी करेगा। इसमें गो रक्ष की फोटो के साथ स्थायी पता और पूरा रिकार्ड होगा। पहचान पत्र आधार से जुड़े होंगे। इससे प्रदेश में फर्जी गो रक्षकों की हिंसक घटनाओं पर रोक लगेगी।
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जालसाजों को नहीं देंगे पहचान पत्र
मंगला ने बताया कि गो रक्षा बल के सक्रिय और ईमानदार कार्यकर्ताओं को ही पहचान पत्र दिया जाएगा। जालसाज और उपद्रव करने में शामिल गो रक्षकों को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। गो रक्षक कानून को अपने हाथ में नहीं लेंगे, बल्कि पुलिस की मदद करेंगे। गो रक्षकों को गो सेवा के साथ ही सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी।

 
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