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Captain@100: कानून-व्यवस्था के दावे भी हुए हवा, गैंगस्टर्स बेलगाम
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 24 Jun 2017 09:25 AM IST
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पंजाब
- फोटो : ANI
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पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के गठन के साथ ही कानून-व्यवस्था बहाल करने के जो दावे किए गए थे, उन पर बीते 100 दिन के शासन में कोई ठोस काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने खुद जो घोषणाएं कीं, उन पर भी अब तक अमल नहीं हुआ है।
सूबे की जेलों में आतंकवादी-गैंगस्टर गठजोड़ को तोड़ने के लिए खुफिया विंग के तहत आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) गठित करने को मंजूरी तो दी गई, लेकिन अभी तक इसका गठन नहीं हो सका। मुख्यमंत्री ने पंजाब कंट्रोल आफ आर्गेनाइज्ड क्रिमिनल्स एक्ट (पकोका) को सख्त व प्रभावशाली बनाने का एलान किया, लेकिन इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
मोगा में आतंकवादी गिरोह का भंडाफोड़ और नाभा जेल से फरार कुछ गैंगस्टरों की धरपकड़ के मामलों को छोड़ दें तो पंजाब पुलिस को अब तक संगठित अपराधों की रोकथाम में कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिल सकी है। पिछले साल हिंदू नेताओं की हत्या के मामलों में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। गैंगस्टरों के जेलों में बंद होने के बावजूद बाहर अपने गिरोहों से जुड़े रहने पर भी रोक नहीं लगाई जा सकी है। हाल ही में पंजाब पुलिस ने उत्तर भारत के आठ राज्यों के बीच संगठित गिरोहों और वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान का खाका तैयार कर आठ राज्यों की पुलिस की एक टीम का गठन किया है। यह टीम कितनी सफल रहेगी, यह आने वाला समय बताएगा।
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सूबे की जेलों में आतंकवादी-गैंगस्टर गठजोड़ को तोड़ने के लिए खुफिया विंग के तहत आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) गठित करने को मंजूरी तो दी गई, लेकिन अभी तक इसका गठन नहीं हो सका। मुख्यमंत्री ने पंजाब कंट्रोल आफ आर्गेनाइज्ड क्रिमिनल्स एक्ट (पकोका) को सख्त व प्रभावशाली बनाने का एलान किया, लेकिन इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
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मोगा में आतंकवादी गिरोह का भंडाफोड़ और नाभा जेल से फरार कुछ गैंगस्टरों की धरपकड़ के मामलों को छोड़ दें तो पंजाब पुलिस को अब तक संगठित अपराधों की रोकथाम में कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिल सकी है। पिछले साल हिंदू नेताओं की हत्या के मामलों में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। गैंगस्टरों के जेलों में बंद होने के बावजूद बाहर अपने गिरोहों से जुड़े रहने पर भी रोक नहीं लगाई जा सकी है। हाल ही में पंजाब पुलिस ने उत्तर भारत के आठ राज्यों के बीच संगठित गिरोहों और वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान का खाका तैयार कर आठ राज्यों की पुलिस की एक टीम का गठन किया है। यह टीम कितनी सफल रहेगी, यह आने वाला समय बताएगा।
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कैप्टन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
Captain Amarinder Singh
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
सूबे की कानून-व्यवस्था के सवाल पर कैप्टन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पिछली सरकार के समय सियासी संरक्षण में चल रहे गिरोहों की ओर से की जाने वाली हत्यांएं, पैसे लेकर हत्या करने, रियल एस्टेट डेवलपरों, नशा तस्करों/व्यापारियों, सट्टेबाजों/हवाला डीलरों/शराब कारोबारियों आदि से पैसा वसूली, जमीनों पर कब्जे करने, फिरौती के लिए अपहरण और नशा-हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर अपराध हैं।
नशा तस्करी से निपटने के लिए जहां एसटीएफ का गठन किया गया, वहीं बीते 100 दिन में राज्य सरकार का ज्यादा ध्यान पुलिस प्रशासन में नीचे से ऊपर तक फेरबदल पर ही रहा। तबादलों की प्रक्रिया के दौरान कई पुलिस अफसरों को दो-तीन बार बदल दिया गया। बीते तीन महीनों के दौरान ही सूबे की जेलों में गैंगस्टरों के बीच झड़पें सुर्खियों में आई तो इससे निपटने के लिए कई कदम उठाए गए।
जेलों में दुर्दांत अपराधियों और गैंगस्टरों को साधारण कैदियों से अलग विशेष सेल में रखा जाने लगा। उनसे मिलने वालों पर भी नजर रखी जाने लगी। जेलों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पंजाब पुलिस के 300 जवान और सीआईएसएफ की कंपनियां भी तैनात कर दी गईं, लेकिन इतने प्रयासों के बाद भी जेल में बंद गैंगस्टरों की ओर से मोबाइल का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने पर अंकुश नहीं लगाया जा सका।
सूबे की कानून-व्यवस्था के सवाल पर कैप्टन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पिछली सरकार के समय सियासी संरक्षण में चल रहे गिरोहों की ओर से की जाने वाली हत्यांएं, पैसे लेकर हत्या करने, रियल एस्टेट डेवलपरों, नशा तस्करों/व्यापारियों, सट्टेबाजों/हवाला डीलरों/शराब कारोबारियों आदि से पैसा वसूली, जमीनों पर कब्जे करने, फिरौती के लिए अपहरण और नशा-हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर अपराध हैं।
नशा तस्करी से निपटने के लिए जहां एसटीएफ का गठन किया गया, वहीं बीते 100 दिन में राज्य सरकार का ज्यादा ध्यान पुलिस प्रशासन में नीचे से ऊपर तक फेरबदल पर ही रहा। तबादलों की प्रक्रिया के दौरान कई पुलिस अफसरों को दो-तीन बार बदल दिया गया। बीते तीन महीनों के दौरान ही सूबे की जेलों में गैंगस्टरों के बीच झड़पें सुर्खियों में आई तो इससे निपटने के लिए कई कदम उठाए गए।
जेलों में दुर्दांत अपराधियों और गैंगस्टरों को साधारण कैदियों से अलग विशेष सेल में रखा जाने लगा। उनसे मिलने वालों पर भी नजर रखी जाने लगी। जेलों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पंजाब पुलिस के 300 जवान और सीआईएसएफ की कंपनियां भी तैनात कर दी गईं, लेकिन इतने प्रयासों के बाद भी जेल में बंद गैंगस्टरों की ओर से मोबाइल का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने पर अंकुश नहीं लगाया जा सका।