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Hindi News ›   Chandigarh ›   Ganesh Chaturthi 2021: Know the Puja Vidhi and Shubh Muhurat of Ganesh Chaturthi

आज से गणेश उत्सव शुरू: जानें- गणपति स्थापना का शुभ मुहुर्त, इस बार बन रहा बेहद खास संयोग

Fri, 10 Sep 2021 11:23 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 10 Sep 2021 11:23 AM IST
सार

ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि चतुर्थी तिथि के दिन यदि गलती से आप चंद्र दर्शन कर लेते हैं तो श्री भागवत जी में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण व समयंतक मणि की कथा ब्राह्मण के मुख से सुनना चाहिए। इस कथा श्रवण से चंद्र दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है।

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Ganesh Chaturthi 2021: Know the Puja Vidhi and Shubh Muhurat of Ganesh Chaturthi
गणेश चतुर्थी - फोटो : Pixabay

विस्तार

गणेश उत्सव शुक्रवार से शुरू हो रहा है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होती है। यह उत्सव 10 से 19 सितंबर तक मनाया जाएगा। गणेश उत्सव के पहले दिन गणपति की घर में स्थापना की जाती है और पूरे 10 दिनों तक उनकी विधि-विधान से पूजा कर त्रयोदशी को विसर्जन किया जाता है।

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यह कहना है देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री का। उन्होंने कहा कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ही गणेश जी प्रकट हुए थे। गणेश उत्सव में मिट्टी की प्रतिमा का विशेष महत्व है।
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जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा और स्थापना विधि 

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 9 सितंबर रात 12 बजकर 18 मिनट से
  • चतुर्थी तिथि समाप्त : 10 सितंबर रात 9 बजकर 57 मिनट तक
  • मध्याह्न पूजन मुहूर्त : सुबह 11 बजकर 05 मिनट से दोपहर 1 बजकर 26 मिनट तक


भगवान गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त
  • 10 सितंबर 2021 को दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 बजे के बीच गणेश स्थापना के लिए अच्छा मुहूर्त है

स्थापना व पूजन विधि

ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि गणपति का स्मरण करते हुए पूजा की पूरी तैयारी करें। इस दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करें। एक कलश में जल भरकर उसमें सुपारी डालें और उसे कोरे कपड़े से बांधना चाहिए। इसके बाद सही दिशा में चौकी स्थापित करके उसमें लाल रंग का कपड़ा बिछा दें। जयकारे लगाते हुए स्थापित करें।

भगवान गणेश की पूजा विधि
पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि स्थापना के बाद गणपति को पुष्प की मदद से जल अर्पित करे। इसके बाद रोली, अक्षत और चांदी का वर्क लगाएं। इसके बाद लाल रंग का पुष्प, जनेऊ, दूब, पान में सुपारी, लौंग, इलायची और कोई मिष्ठान रखकर अर्पित करें। भोग में मोदक अर्पित करें। षोडशोपचार के साथ उनका पूजन और आरती करनी चाहिए।

खास संयोग बन रहा है गणेशोत्सव पर
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर खास संयोग बन रहा है। उन्होंने कहा कि सूर्य, बुध, शुक्र और शनि इस दिन अपनी अपनी राशियों में मौजूद रहेंगे। चंद्र तुला राशि में शुक्र के साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस दिन कन्या राशि वालों के खोए हुए धन और नुकसान की भरपाई संभव है। धार्मिक यात्रा का योग बन सकता है और किसी बड़े आय देने वाले काम की स्थापना भी हो सकती है। तुला राशि वाले जो लोग अपने खराब दौर से गुजर रहे थे, अब बेहतरी की ओर बढ़ेंगे। वृश्चिक राशि वालों को गणेश जी के जाते समय कोई बड़ी खुशी की खबर मिल सकती है। धनु राशि के लिए भी बेहतर है। मकर राशि वालों के लिए यह समय अच्छा रहेगा। यश कीर्ति में वृद्धि होगी। नए वस्त्र व आभूषणों की प्राप्ति होगी।a

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