{"_id":"5f3ecaee8ebc3e3cd921930b","slug":"ganesh-chaturthi-2020-date-eco-friendly-idols-demand-increased-in-chandigarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेहद खास हैं ये गणपति बप्पा, करेंगे पर्यावरण की रक्षा, पढ़ें- मूर्ति स्थापना और पूजा का मुहूर्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेहद खास हैं ये गणपति बप्पा, करेंगे पर्यावरण की रक्षा, पढ़ें- मूर्ति स्थापना और पूजा का मुहूर्त
Fri, 21 Aug 2020 12:56 AM IST
ajay kumar
नीरज कुमार, चंडीगढ़
नीरज कुमार, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 21 Aug 2020 12:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना के बावजूद लोगों की आस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। इस बार लोग भगवान गणेश की ईको फ्रेंडली मूर्ति घर लेकर आएंगे। प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय इस बार मिट्टी के गणेशजी की मांग ज्यादा है। क्योंकि विसर्जन के लिए किसी नदी या नहर पर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि घर पर ही मिट्टी की मूर्ति को विसर्जित किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मिट्टी से बनी गणेशजी की मूर्ति को घर गार्डन की क्यारी में या फिर गमले में डालकर विसर्जित कर सकते हैं। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष एमबी साने ने बताया कि सेक्टर 19 स्थित महाराष्ट्र भवन में इस बार भगवान गणेश को एक ड्राम में पानी भरकर विसर्जित किया जाएगा। पानी और मिट्टी के घोल को गमलों में डाला जाएगा। सेक्टर-44 निवासी शीनू राणा ने बताया कि उन्होंने छोटे और ईको फ्रंडली गणेशजी को घर पर आमंत्रित किया है। इस बार घर में ही विर्सजन करेंगे ताकि गणेश ही हमेशा पास ही रहें।
विज्ञापन
पिछली बार से कम मिले ऑर्डर
कालीबाड़ी स्थित मूर्तिकार खोकन अधिकारी का कहना है कि पिछले वर्ष छह सौ मूर्तियां बनाई गईं थीं लेकिन इस वर्ष एक सौ दस मूर्तियां ही बनाई हैं। उन्होंने कहा कि नौ इंच से लेकर साढ़े पांच फीट तक के गणेशजी ही इस बार बनाए गए हैं। साढ़े पांच फीट की सिर्फ एक ही मूर्ति बनाई गई है। अधिकतर दो फीट की मूर्तियों की ही मांग है।
गणेशोत्सव पर इस बार चंद्राधि योग
गणेशोत्सव 22 अगस्त को है। 21 अगस्त दिन शुक्रवार को रात 11 बजकर चार मिनट से चतुर्थी तिथि का प्रारंभ काल है। 22 अगस्त दिन शनिवार को शाम सात बजकर 57 मिनट तक चतुर्थी तिथि है। हस्त नक्षत्र शुक्रवार की रात यानि 21 अगस्त की रात नौ बजकर 30 मिनट से शुरू होकर शनिवार 22 अगस्त की शाम सात बजकर 11 मिनट तक है। हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। लग्न तुला है।
तुला का स्वामी शुक्र है। इन तीनों को यानि दिन शनिवार हो, लग्न तुला हो और नक्षत्र हस्त हो तो चंद्राधि योग बनता है। यह योग चालीस वर्षों के बाद आता है। ऐसा ज्योतिष गणना के अनुसार मना गया है। ऐसा योग समाज, शहर और देश के लिए शुभ कारक नहीं है। यह कहना है सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश का जन्म दोपहर काल में माना गया है।
गणेश स्थापना एवं पूजा का विशेष मुहूर्त
देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री का कहना है कि 21 अगस्त को रात्रि 11:03 बजे से चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी तथा 22 अगस्त को रात्रि 7:58 पर समाप्त होगी। इसलिए विनायक चतुर्थी का व्रत 22 अगस्त को किया जाएगा। 22 अगस्त को मध्याह्न काल, अभिजीत मुहूर्त, शुभ योग एवं वृश्चिक (स्थिर) लग्न में गणेश जी की स्थापना व पूजा करना शुभ रहेगा। मध्याह्न काल में भगवान गणेश जी का प्राकट्य माना जाता है। पूजा की समय अवधि दोपहर 12:31 बजे से दोपहर 2:58 बजे तक रहेगी। चंद्रमा कन्या राशि एवं सूर्य सिंह राशि में रहेंगे।
पूजा विधि
प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करें। गणेश जी की मूर्ति को सुंदर चौकी पर स्थापित करें। गणेश जी मूर्ति चांदी, सोना, तांबा अथवा मिट्टी की हो सकती है। प्लास्टर या प्लास्टिक से बनी हुई मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए। गणेश जी को सुंदर वस्त्र एवं यज्ञोपवीत धारण करवाएं। धूप, दीप, नैवेद्य, फल आदि से भगवान जी की पूजा करें। सुंदर फूलों की माला भगवान को अर्पित करें। गणेश जी को लड्डू अर्थात् मोदक अधिक प्रिय हैं। 21 लड्डुओं का भोग लगाएं और 21 दूर्वांकुर भगवान को समर्पित करें। पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को अर्पित करें। कपूर और शुद्ध देसी घी की वर्तिका से गणेश जी की आरती उतारें।
गणपति की मूर्ति को लेकर यह है जिज्ञासा
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि गणपति की मूर्ति को लेकर एक जिज्ञासा हमेशा रहती है कि उनकी सूंड किस दिशा में होनी चाहिए। कहीं दाईं ओर तो कहीं बाईं ओर सूंड वाले गजानन दिखाई देते हैं। बाईं ओर सूंड वाले गणपति ज्यादा सिद्ध माने जाते हैं। माना जाता है कि बाईं ओर की सूंड किए गणपति हमेशा ही सकारात्मक नतीजे देते हैं। वैसे भी गणपति को बुद्धि का देवता कहा जाता है। यदि विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो बुद्धि दो भागों में बटीं होती है।
दाईं तरफ के हिस्से को कर्म प्रधान कार्यों में महारत हासिल होती है जबकि बाएं तरफ का हिस्सा रचनात्मकता में प्रवीण होता है। बाईं सूंड वाले गणपति रचनात्मक बुद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। जिस किसी भी घर, दुकान, प्रतिष्ठान आदि में बाईं सूंड वाले गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है वहां हमेशा रचनात्मक कार्यों के प्रति लगाव बना रहता है। ऐसा स्थान हमेशा प्रगति करता है। ऐसे स्थान पर विध्वंस और नकारात्मक विचारों का अभाव होता है।
चंद्र दर्शन निषेध
सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी और देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि विनायक चतुर्थी को कलंक चतुर्थी का नाम भी दिया गया है, इस दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। यदि इस दिन कोई चंद्रमा का दर्शन कर लेता है तो उस पर झूठा आरोप यानी कलंक लगने की संभावना होती है। भगवान कृष्ण ने एक बार भाद्रपद मास की विनायक चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन कर लिया था अत: उन पर समयन्तक मणि को चुराने का आरोप लग गया था। आज भी यह मान्यता है कि यदि कोई भूल से इस चतुर्थी के चंद्रमा का दर्शन कर लेता है तो उसे समयन्तक मणि की कथा अवश्य ही सुननी चाहिए। इससे वह कलंक से बचा रहता है।